Daily Archives

Jan 4th, 2012

बौद्ध भिक्षुओं के उज्जवल मंत्र

(शेर सिंह मेरुपा, कुल्लू) देख रहे हैं परतंत्र  समूचे विश्व में  तिब्बत की मात्र चर्चा है  डाक्यूमेंटरी का छप रहा पर्चा है  लेकिन विश्व झील की तरह  खामोश है  रात हो गई तो  चुपचाप नींद की आगोश में है।

अर्थव्यवस्था को लकवा क्यों मारा?

अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर यूपीए सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु और टाटा समूह के अध्यक्ष रतन टाटा के बयान चिंतित करते हैं। बेशक अर्थव्यवस्था की घटती विकास दर के कारण सरकारी नीतियों को लकवा-सा मार गया है। नीतिगत निर्णय नहीं हो पा…

चीन में पिटाई

शंघाई के निकट चीनी कारोबारियों के हाथों एक भारतीय राजनयिक की पिटाई चौंकाने वाली है। इससे भारत-चीन संबंधों में उतार-चढ़ाव के क्रम में एक और अध्याय जुड़ा है, जिसकी आम निंदा की जाएगी। वैसे तो इस तरह की घटनाएं नहीं हैं, लेकिन चीन की एक अदालत की…

अन्ना आंदोलन का बिखरना

(प्रदीप सौरभ,लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं)) अन्ना के आंदोलन के पीछे मध्यमवर्ग ठीक उसी तरह लामबंद हुआ था जिस तरह दिल्ली के प्रगति मैदान में लगने वाले आटो एक्सपो जैसे मेले में जमा होता है। यह बात इस आंदोलन की शुरुआत से ही मैं लगातार कह रहा था…

बस कंडक्टरों की मनमानी

(मोहित शर्मा, हमीरपुर) आजकल कुछ बसों के कंडक्टर लोकल रूटों पर विशेषकर शाम के समय सवारी को टिकट देने से परहेज करने लगे हैं। कई परिचालक तो लंबे रूटों पर भी मौका देखकर अपनी जेबें गर्म करने में लगे रहते हैं। इसके परिणामस्वरूप किराया वृद्धि…

सैन्य प्रशिक्षण स्थल अनाडेल ग्राउंड

(एसआर आजाद, बिलासपुर) एक शताब्दी से सेना के पास रहा हूं। सेना की पश्चिमी कमान का शिमला स्थित मुख्यालय का एकमात्र हैलिपेड रहा अनाडेल ग्राउंड आज भी सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। सेना के अनेक प्रशिक्षित कोर्स यहां पर आयोजित किए जाते रहे…

कानून की धज्जियां

(ओमप्रकाश धीमान,जयंिसंहपुर) जिनके हाथों में कानून की रखवाली सौंपी है वही कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं। कहां का न्याय है यह। फिर क्या मतलब है चालान काटने का। एक ओर तो हिमाचल पुलिस न्याय व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए जी जान से…

और यह भी…

(रचना शर्मा, डलहौजी) चीन में भारतीय राजनयिक की पिटाई। चीन के लिए बड़ी बात नहीं और भारत के लिए यह आम है। कई बार चीनी सैनिक अरुणाचल में अतिक्रमण कर चुके हैं। तब कुछ नहीं किया तो अब केंद्र सरकार क्या तीर मार लेगी।

प्रेरणा, प्रगति व प्रशंसा की राहों पर भी हिमाचल ने खोया बहुत

(प्रेम चंद माहिल,लेखक, हमीरपुर से सेवानिवृत्त प्रवक्ता हैं) ब्याह-शादी संक्षेप रूप में संपन्न होती थी। निर्धन के लिए कोई परेशानी नहीं थी, परंतु अब मोटर गाडि़यां दहेज में मांगी जा रही हैं। शराब का दौर, डीजे पर नाच, अत्यधिक बरात, हिमाचल के…

पहले जलती थीं, अब गिरने लगी हैं…

शिमला — राजधानी शिमला की प्राचीन भव्य इमारतों को पहले आग की घटनाएं ही सताती थीं,  मगर अब जिस तरह से पुरानी इमारतें अनदेखी का शिकार हो रही हैं, उससे स्थानीय लोगों ने भी दखलअंदाजी जताना शुरू कर दिया है। बहरहाल शिमला की प्राचीन इमारतें जो अब…