Daily Archives

Jan 16th, 2012

नीतियों ने घटाई सरकारी स्कूलों में विद्यार्थी संख्या

(मधुबाला,लेखिका कांगड़ा से हैं) हर सरकारी स्कूल के बगल में ही निजी स्कूल चल रहे हैं। कहीं-कहीं तो इनकी संख्या दो-तीन है। जब अभिभावक निजी स्कूलों में सारा वर्ष अध्यापक मौजूद देखते हैं तो स्वाभाविक ही निजी स्कूलों की ओर आकर्षित होते हैं...…

महत्त्वपूर्ण थी चूल्हे की आग

(प्रेम चंद माहिल, हमीरपुर)  प्राचीनकाल से लकड़ी जलाकर चूल्हा चलाने की परिपाटी चली आ रही है। चूल्हे पर परिवार के लिए भोजन बनता था, नहाने के लिए गर्म पानी उपलब्ध होता था। सर्दियों में लोग चूल्हे के पास बैठकर आग संेकते थे। लकडि़यां लोगों को…

लाल होता दरख्त

पिछले अंक में आपने पढ़ा कि मथरू की पत्नी पहले बेटी की शादी करने की बात करती है । पढ़ें आगे...  मथरू को घरवाली की बात अपनी मर्दानगी पर हथौड़े की चोट सी लगती है। अपनी नालायकी दिखती है। वह किसी काम का नहीं है... ....खेती दे-देकर ब्याह हो…

आस-पास की की कहानियां

पुस्तक का नाम      ः   आस-पास लेखिका             ः  डा. अपर्णा चतुर्वेदी प्रीता मूल्य                 ः  175 रुपए मात्र प्रकाशन             ः  प्रीता प्रकाशन, सिद्धार्थ नगर                                                       …

पुस्तक समीक्षा

आप इसे पुस्तिका कह लें या पंफलेट बुक, इस नव लेखन की महत्त्वपूर्ण बात यही है कि इसे कालीकट जैसे धुर दक्षिण के अहिंदी भाषी क्षेत्र से लिखा गया है। भूमिका में ही दोनों लेखिकाओं ने स्पष्ट लिखा है कि वे गृहणियां हैं, क्षेत्र के अलग-अलग भागों…

हिमाचल का कमजोर होता खेत

हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्य की सबसे बड़ी चुनौती भूमि के सही इस्तेमाल के जरिए अधिकतम क्षमता हासिल करने की रही है। ऐसे में विकास के भौतिक पक्ष के साथ कृषि-बागबानी के संदर्भ सदा प्रश्न करेंगे। विडंबना यह है कि भू-सुधारों के राष्ट्रीय संकल्प में…

काले धन पर पोतें कालिख

बाबा रामदेव ने काला धन और भ्रष्टाचार पर एक बार फिर ‘स्वाभिमान यात्रा’ की शुरुआत की घोषणा की और उनके चेहरे पर काली स्याही फेंक दी गई। यह निहायत असभ्य,असहिष्णु,अनैतिक हरकत है। ऐसी उद्दंडता हिंसा को जन्म देती है और हिंसा कोई भी विकराल और विकृत…

चुनाव सुधारों में बेतुकापन

(डा. वेदप्रताप वैदिक,लेखक, भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष हैं) डा राममनोहर लोहिया ने क्या खूब कहा था कि किसी भी इंसान की मूर्ति उसके मरने के 300 साल बाद लगाना चाहिए। तब तक उसकी अच्छाइयों-बुराइयों का कच्चा चिट्ठा सबके सामने आ जाता है और…

एक वर्ष और निकल गया अब….?

(कृष्न संधु, कुल्लू)  भ्रष्टाचार और महंगाई ने इस देश के आम आदमी को एक ऐसे चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है कि न वह जीने के काबिल रहा और न मरने के। एक तरफ  विकास के नाम पर देश की हर सड़क व गली गाडि़यों से भर चुकी है, जहां आम आदमी का पैदल…

जाड़ा…

 ( धर्म चंद धीमान, सरकाघाट, मंडी) जाड़े का यंू हुआ आगाज सहारा बने ऊनी वस्त्र, अंगीठी और अलाव पेड़ों का झड़-झड़ कर उतर गया सारा शबाब विदेशी परिंदों का सुनाई देता है राग हर प्राणी भंडार अपना भर रहा आने वाले कोहरे, धंुध और…