अनशन में अव्वल हिमाचली

{दयाल चंद रघुवंशी, सोलन}

आज हमारे प्रदेश की जनता को एक अनोखी बीमारी ने घेर लिया है और अब यह बीमारी लाइलाज बनती जा रही है और पीडि़त लोग खाना-पीना तक छोड़ रहे हैं। दरअसल इस मर्ज का नाम अनशन है। अपनी बात मनवानी हो ख्वाहिशें, पूरी करनी हो या फिर बैठकर बात मनवानी हो, तो एकदम लोग इसके लिए खाना-पीना छोड़ देते हैं। ऐसे किस्से अस्पतालों में भी अकसर पहुंच जाते हैं। अन्य राज्यों के मुकाबले अपनी मांगें मनवाने के लिए हिमाचली जनता दूसरों को नुकसान पहुंचाने की बजाय अपने आपको ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। नतीजतन भोजन का परित्याग कर बैठे व्यक्ति को डाक्टरी सलाह तक लेनी पड़ती है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा व जयपुर के लोगों की मानसिक प्रवृति से हिमाचली जनता की प्रवृत्ति काफी भिन्न है। पुरुष ही नहीं महिलाएं भी अपनी मांग को मनवाने के लिए भोजन का परित्याग कर देती हैं। आज चाहे कोई भी सरकारी क्षेत्र हो, विश्वविद्यालय हो, अपनी मांगें मनवाने के लिए अनशन पर बैठ जाते हैं, लेकिन आज स्थिति यह आ गई है कि घर में बच्चे भी अपनी मांगें मनवाने के लिए अन्न तक परित्याग करने से नहीं हिचकिचाते हैं। नतीजा साफ है कि अपनी मांगें मनवाने के लिए अब राज्यों की जनता की तर्ज पर हिमाचली जनता भी अपने आप का ही नुकसान कर रही है।

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