अनोखा दूधवाला जिसने कभी दूध नहीं पिया

(प्रो. एनके सिंह लेखक, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं)

मानव जाति के ऐसे बहुत कम सृजनशील प्रतिभा संपन्न व्यक्ति हैं जो समाज को बदल देने के लिए आते हैं और राष्ट्र को गौरव और सम्मान प्रदान करते हैं। मैंने ‘कारपोरेट सक्सेस’ नामक एक पुस्तक लिखी थी जिसमें मैंने उनसे अपनी इस आश्चर्यजनक उपलब्धि के अनुभव का वर्णन करने के लिए कहा था…

वर्गीस कुरियन, जो कि एक महान स्वप्नद्रष्टा और संस्थान निर्माता थे और अमूल ब्रांड की स्थापना की, का हाल ही में आनंद में निधन हो गया। 91 वर्ष की आयु में अपनी मृत्यु से पहले उन्होंने विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक बनाने में राष्ट्र की सेवा की। जब वह आनंद आए तो वहां मात्र दो गांव 247 लीटर दूध का उत्पादन कर रहे थे और आज उनके द्वारा स्थापित सहकारी समिति 11,668 करोड़ के व्यवसाय सहित 2-8 अरब लीटर दूध एकत्र कर रही है। मानव जाति के ऐसे बहुत कम सृजनशील प्रतिभा संपन्न व्यक्ति हैं जो समाज को बदल देने के लिए आते हैं और राष्ट्र को गौरव और सम्मान प्रदान करते हैं। मैंने ‘कारपोरेट सक्सेस’ नामक एक पुस्तक लिखी थी जिसमें मैंने उनसे अपनी इस आश्चर्यजनक उपलब्धि के अनुभव का वर्णन करने के लिए कहा था। अपने वृतांत में, जो बाद में स्पैनटैक द्वारा प्रकाशित भी किया गया था, उन्होंने बताया कि देश के हितों की सुरक्षा तथा समूचे दुग्ध उत्पादन के स्वदेशीकरण के लिए किस तरह वे बहुराष्ट्रीय कंपनियों से लड़े, जो पहले आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड आदि से आयात पर निर्भर था। असल में कइयों को याद होगा कि पोल्सन एक ब्रांड का नाम था जो भारत के प्रत्येक परिवार में जाना जाता था। यहां तक कि किसी भी मक्खनबाजी या चापलूसी का मुहावरा प्रयोग करना होता था तो हम कहते थे ‘उसे पोल्सन न करें’ अब कोई इसे जानता तक नहीं और अमूल एक पारिवारिक नाम है। मैं उनसे नब्बे के पूर्वार्द्ध में मिला जब योजना आयोग द्वारा गठित एक अध्ययन दल के अध्यक्ष के रूप में मैंने आनंद का दौरा किया। उन्होंने मुझे गांव में अपने विशाल दुग्ध एकत्रण केंद्र तथा अपना संयंत्र भी दिखाया। उनके ग्रामीण विकास संस्थान में उनके साथ हमारी सार्थक बातचीत हुई। जैसे ही देर रात बैठक समाप्त हुई मैंने उनसे दरयाफ्त किया कि अब क्या किया जाए, क्योंकि राज्य में नशाबंदी लागू थी और एक ड्रिंक की भारी तलब हो रही थी। वह हंसे और बोले ‘चिंता न करो रात का भोजन मेरे घर पर आकर करो’ हम उनके प्रत्युत्तर पर चकित थे और यह उम्मीद कर रहे थे कि रात के भोजन के साथ आज वह एक गिलास दूध पेश करेंगे। जब हम उनके डाइनिंग टेबल पर पहुंचे तो देखा वहां ब्लैक लेबल स्कॉच की एक बोतल पड़ी थी जिसे देखकर हम सबके चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ पड़ी लेकिन हमने अपने मेजबान से बड़ी उत्सुकता से जानना चाहा कि इस ‘ड्राइ’ राज्य में दूध की जगह स्कॉच कैसे? वे मुस्कराए और हमें बताया कि उनके पास परमिट था। क्या मजाक है कि उन्हें इसके लिए अपने आपको व्यसनी घोषित करना पड़ा था। उन्होंने कभी भी दूध नहीं पिया। हालांकि पूरे देश को उन्होंने दूध और दुग्ध उत्पादों की आपूर्ति की। मुझे उस दिन पता चला कि कुरियन ने थोड़े समय के लिए भिलाई स्टील प्लांट में भी सेवाएं दी थीं और क्योंकि मैंने भी अपनी जीविका की शुरुआत असल में भिलाई से ही की थी, सो हमने छत्तीसगढ़ से जुड़ी अपनी यादों को भी साझा किया। उनके चाचा जान मधाई ने, जो जवाहर लाल नेहरू के साथ वित्त मंत्री थे, उनसे आनंद सहकारी समिति की सहायता करने के लिए कहा। वह इस दूरवर्ती स्थान पर छः मास के लिए आए लेकिन फिर इसे कभी भी नहीं छोड़ा। विडंबना यह है कि वस्तुतः उन्हें उसी संस्थान विशेष से बाहर कर दिया गया जिसकी स्थापना और विकास असल में उन्होंने अपने खून-पसीने से किया था। उन्होंने अथक रूप से किसानों की सेवा की थी। आठ वर्ष पहले उन्हें अपनी ही शिष्या कु. अमिता पटेल से मतभेदों के चलते उसे छोड़ना पड़ा था। राष्ट्र के लिए की गई उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए वह निश्चय ही भारत रत्न के हकदार हैं यदि यह सर्वोच्च पुरस्कार श्रेष्ठतम उपलब्धियों के लिए रखा गया है।

क्या हिमाचल में कांग्रेस अपना घर व्यवस्थित कर पाएगी?

विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही महीने बाकी बचे हैं और भाजपा युद्ध क्षेत्र में अपनी तोपें स्थापित करने की दिशा में दिन रात जुटी है जबकि कांग्रेस अभी तक भी मिठाइयां बांटने और अपने नेताओं को हार पहनाने से मुक्त नहीं हो पाई है। उसका कुनबा अभी भी विभाजित है जैसा उसकी पहली ही बैठक में कई नेताओं की अनुपस्थिति से प्रकट होता है और केंद्र से किसी ने भी मतभेदों को दूर करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। यहां तक कि चुनावों से पहले ही भाजपा 50% सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है और नए सिरे से मोर्चा संभालने के लिए उन्हें पर्याप्त समय मिलेगा। भाजपा और कांग्रेस के बीच संख्या का अंतर जो कुछ माह पहले काफी था वह और भी कम हुआ है जैसे कि विशेषज्ञों की राय है और अनुमान दर्शाते हैं। दिल्ली में सत्ता के गलियारों से किसी ने उत्सुकता से मुझसे विश्वास से पूछा ‘मुझे आशा है कि आपके राज्य का हाल पंजाब जैसा नहीं होगा’ मैंने नकारात्मक जवाब दिया क्योंकि सभी संकेत ऐसे हैं कि स्थिति में धीरे-धीरे सुधार आता जा रहा है परंतु जो स्थिति अब चल रही है उसे नेतृत्व द्वारा जल्दी से जल्दी काबू में किया जाना जरूरी है। स्तंभकारों का व्यवसाय केवल हवा के रुख को समझने का है परंतु यह नेताओं पर निर्भर है कि वे एकता दर्शाएं और इस बाजी को जीतने के लिए सामूहिक बल लगाएं।

बस स्टैंड

पहला यात्रीः सरकार गृहिणियों को वेतन दिए जाने पर विचार कर रही है।

दूसरा यात्रीः आज की मूल्य वृद्धि में यह अच्छा है कि सरकार ऐसा करती है लेकिन यदि पतियों को देने के लिए कहा जाए ते वे तलाक मांगने को बाध्य हो जाएंगे।

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