आपदा में अवसर

आपदा और मनुष्य का रिश्ता बहुत पुराना है। समय -समय पर आपदाएं मनुष्य को झकझोरती और सचेत करती रही हैं। आपदाओं को दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है- प्राकृतिक आपदा और मानवकृत आपदा । जलवायु-परिवर्तन के कारण  प्राकृतिक आपदाओं की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। नाभिकीय रिएक्टरों से होने वाले विकिरण और गैसों के रिसाव को मानवकृत आपदाओं की श्रेणी में रखा जा सकता है।  रूस के चरनोबिल रिएक्टर में हुई दुर्घटना और भारत में भोपाल गैस त्रासदी की गिनती बड़ी मानवकृत आपदाओं में होती है। विकास की लंबी छलांग ने इन दोनों तरह की आपदाओं की संख्या एवं तीव्रता बढ़ा दी है। प्राकृतिक एवं मानवकृत आपदाओं की बढ़ती संख्या एवं तीव्रता के कारण आपदा अब अध्ययन की अंतर्वस्तु  बन गई है और इसमें कैरियर की संभावनाएं भी बढ़ती जा रही हैं। आपदा प्रबंधन के द्वारा हम वह सब जानने कि कोशिश करते हैं जो आपदा आने पर  स्वयं और दूसरों की जान को बचाने के लिए आवश्यक होता है। आपदा एक असामान्य घटना हैं, जो थोड़े ही समय के लिए आती है और  विनाश के चिन्ह लंबे समय के लिए छोड़ जाती है।

प्राकृतिक आपदा के विभिन्न रूप

* सुनामी, सूखा, बाढ़, चक्रवात सब मौसम से संबंधित प्राकृतिक आपदाएं है।

* भू-स्खलन, हिमपात  भी प्राकृतिक आपदा है।

* सूखा, कीटों का प्रकोप, अग्निकांड भी प्राकृतिक आपदा के ही रूप है।

आपदा प्रबंधन के जरूरी होने का कारण :—

 भारत, इरान, और तुर्की में भयंकर भूकंप, न्यू इंग्लैड में बर्फीले तूफान, नेब्रास्का में ओले का कहर, जापान में भूकंप जैसी त्रासदियों के कारण आपदा प्रबंधन अब जरूरत बन गई है। आपदा प्रबंधन के अंतर्गत आपदाओं की  भविष्यवाणी का भी काम किया जाता है और इस काम में अंतरिक्ष विज्ञान की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है ।

भारत में आपातकालीन प्रबंधन :-

भारत में आपातकालीन प्रबंधन का उत्तरदायित्व  गृह मंत्रालय के अधीनस्थ सरकारी एजेंसी भारतीय राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के कंधों पर  है।

हाल में ही भारत सरकार ने सार्वजनिक व निजी भागीदारी के प्रारूप को अपनाकर आपदा प्रबंधन को व्यापक बनाने की दिशा में कदम उठाया है।

आपातकालीन प्रबंधकों की अंतरराष्ट्रीय एसोसिएशन :-

आपातकालीन प्रबंधकों की अंतराष्ट्रीय एसोसिएशन (एईएएम) आपात स्थिति और आपदाओं के दौरान जान व माल की सुरक्षा को बढ़ावा देने के लक्ष्य को समर्पित एक गैर लाभकारी संगठन है। एईएएम का उद्देश्य जानकारी, नेटवर्किंग और पेशेवर अवसर प्रदान करके अपने सदस्यों की सेवा करना और आपातकालीन प्रबंधन पेशे को उन्नत बनाना है।

संभावनाएं :-

किसी भी प्रकार की आपदा से निपटने के लिए दो चीजें बहुत महत्वपूर्ण होती हैं- प्लानिंग और जन जागरूकता। आज की युवा पीढ़ी आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अच्छा कैरियर बना सकती है।     बढ़ती आपदाओं के कारण आज की युवा पीढ़ी के लिए यह सेक्टर रोजगार के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण बन गया है । इस क्षेत्र में निजी व सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों में रोजगार की अपार संभावनाएं है। सेवा भाव और जुझारू युवाओं के लिए इस क्षेत्र में रोजगार की बेहतर संभानाएं हैं ।

वेतनमान :-

आपदा प्रबंधन में कार्यरत लोगों का वेतनमान उनके स्वयं की रूचि, इच्छाशक्ति व टैलेंट पर निर्भर करता है।  इस सेक्टर में निजी क्षेत्र में सरकारी की अपेक्षा अच्छा वेतनमान प्राप्त किया जा सकता है।

कोर्सेज इन डिजास्टर मैनेजमेंट :-

*सीडीएम (सार्टिफिकेशन प्रोग्राम इन डिसास्टर मैनेजमेंट)

*पीजीडीडीएम (पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन डिजास्टर मैनेजमेंट)

* एएसपीसी (एशियन डिजास्टर प्रीपेयरनेस कालेज), बैंकाक

* जो डिजास्टर मैनेजमेंट में रोजगार पाना चाहते हैं,उनके लिए सर्वप्रथम अपना व्यक्तित्व निखारना होगा। उनकी  यह जिम्मेदारी बन जाती है कि वह इस समाज में आपदा से बचने हेतु हमेशा सकारात्मक रहें। अपने कार्य को पूरी निष्ठा व ईमानदारी से करे।

मुख्य संस्थान :-

* इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, दिल्ली

* दयानंद सागर इंस्टीच्यूट, बंगलौर

* इंस्टीच्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट एंड फायर साइंस, चंडीगढ़

*आर्मी इंस्टीच्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट, नोएडा

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