आरक्षण के बहाने सियासत

(जोगिंद्र ठाकुर, भलयानी, कुल्लू)

मानसून सत्र के दौरान सरकार ने अनुसूचित जातियों व जनजातियों को  सरकारी नौकरियों में प्रमोशन देने के लिए संविधान में संशोधन करने का प्रयास किया गया। यह प्रयास सामाजिक समरसता को कमजोर करने वाला है। नौकरियों में मैरिट को आधार बनाने की बजाय जाति को तरजीह  देना एक अच्छा कदम नहीं है। इतना ही नहीं कुछ सियासी दलों ने ओबीसी के लिए भी आरक्षण की मांग कर सियासत का असली चेहरा सामने ला दिया। इस प्रकार की नीतियां पिछड़ेपन और सामाजिक टकराव को बढ़ाने वाली सिद्ध हो सकती हैं।

 

You might also like