कांग्रेस से जमीन छीनने की कसम

Sep 6th, 2012 12:15 am

सरकार की शक्ति, सत्ता का स्पर्श और सियासत के सारांश को लेकर मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कांग्रेस के लिए सरहदें ऊंची कर दी हैं। सुविचारित कदम, समय का सदुपयोग और सारथी का सफर कैसा हो सकता है, यह साबित करते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को चौराहे पर छोड़ दिया है। इसके विपरीत कांग्रेस विधायक दल के पेंच, बागडोर के छोर और भविष्य की होड़ में नेताओं की बिजलियां पार्टी के ही वजूद पर गिर रही हैं। पार्टी अध्यक्ष के तौर पर वीरभद्र ने अगर हिसाब किया तो कौल सिंह ने अपने रक्षा कवच की पहरेदार पंक्ति का साथ दिया। कुल मिलाकर धूमल सरकार के सामने कांग्रेस के हथियार जंग खा रहे हैं। रिकार्ड उद्घाटन व शिलान्यास, कर्मचारी पुरस्कार और नौकरी के अनेक इश्तिहार चस्पां कर सरकार की ओर से आगे बढ़ने का स्पष्ट संकेत, राजनीतिक खुजली कर रहा है। रिकार्ड उद्घाटनों की जमीन पर सत्ता और सियासत का संतुलन बनाने में धूमल काफी आगे निकलते हुए नजर आते हैं और अगर दौड़ में कांग्रेस को शामिल होना है तो पार्टी को अपने हाशियों से बाहर निकलकर आकाश खोलना होगा। कौल सिंह के अजायबघर में रही कांग्रेस का संरक्षण, पार्टी की त्वचा पर भले ही लेप करता रहा, लेकिन इससे विपक्ष की स्वाभाविक आक्रामकता ही कमजोर पड़ गई। आज पार्टी को सामर्थ्यवान होने के लिए न तो धक्का दिया जा सकता है और न ही इसे माकूल ईंधन मिल रहा है। आखिर कब तक पार्टी के भीतरी गिले-शिकवे और गली-कूचों की लड़ाई का पिटारा आलाकमान देखता रहेगा। बेशक दिल्ली सत्ता के पैमाने शिमला से मुखातिब हैं, लेकिन सच का सामना कई प्रश्नों के निशाने पर है। रेल विस्तार में हारा प्रदेश, औद्योगिक पैकेज से महरूम हिमाचल और रोड नेटवर्क के राष्ट्रीय पैमाने से अछूत राज्य की तकदीर का हिसाब, जनता तो केंद्र से ही मांगेगी। चुनावी माहौल में केंद्र बनाम हिमाचल के मुद्दों पर कांग्रेसी नेताओं को गला साफ करना पड़ेगा, ताकि पता चले कि कब ऊना से निकली ट्रेन तलवाड़ा पहुंचेगी। क्यों नहीं मनाली-लेह रेल मार्ग से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा के मसले पर हिमाचल की पैरवी होती या विस्थापित लोगों की आहों के आगे सियासत की जागीर पिघलती। बहरहाल सत्ता बनाम सत्ता के सवाल पर धूमल सरकार अगर एक दिन मंे दर्जनों उद्घाटन-शिलान्यास के माध्यम से बाहर निकली है तो केंद्र के आश्वासन क्यों ढेर हो रहे हैं। क्या कोई विशेष रेल पैकेज या केंद्रीय संस्थानों की नई खेप कांग्रेस उतार पाएगी। चुनाव की भाषा में धूमल सरकार ने भाजपा के अर्थ प्रस्तुत किए हैं, लेकिन सत्ता की शब्दावली खोज रही कांग्रेस कहीं अपने ही गम में गुम है। हिमाचल में चुनावी इबारतें सदा बदलती रही हैं और सत्ता की इमारतों को सदा जनाक्रोश का सामना करना पड़ा। इस बार सफर और मुकाम को बदलने की कोशिश में मुख्यमंत्री एक बड़े रणनीतिकार और सिंहासन के पैगंबर के मानिंद फासला तय करने में जुटे हैं। राजनीति का परिवेश बदलने की पहली बार हिमाचल में कोशिश हो रही है। सत्ता की व्यावहारिकता का मुकाबला राजनीतिक मुहावरों से है। देखना यह होगा कि राजनीति अपनी रेखाओं से कितनी संभावनाओं को चित्रित करती है या सत्ता की खूबियां मिशन रिपीट को सफल कर पाती हैं। जो भी हो हिमाचल की सत्ता के खिलाफ कांग्रेस का आंतरिक बल, असहाय या अलगाव की मुद्रा में छिन्न-भिन्न दिखाई दे रहा है। कहीं न कहीं कांग्रेस के पक्ष में खड़ी संभावनाओं की मिट्टी छीनने में सत्ता की सतह कामयाब है और यह कांग्रेस की बढ़ती हुई चुनौती है। अंततः किसी भी जीत की ओर बढ़ने से पूर्व अपनी जमीन को बचाने की आवश्यकता बढ़ जाती है।

Himachal List

Free Classified Advertisements

Property

Land
Buy Land | Sell Land

House | Apartment
Buy / Rent | Sell / Rent

Shop | Office | Factory
Buy / Rent | Sell / Rent

Vehicles

Car | SUV
Buy | Sell

Truck | Bus
Buy | Sell

Two Wheeler
Buy | Sell

Polls

क्या आप बाबा रामदेव की कोरोना दवा को लेकर आश्वस्त हैं?

View Results

Loading ... Loading ...


Miss Himachal Himachal ki Awaz Dance Himachal Dance Mr. Himachal Epaper Mrs. Himachal Competition Review Astha Divya Himachal TV Divya Himachal Miss Himachal Himachal Ki Awaz