खुरदरापन

(ज्ञान चंद शर्मा दरवानी, सरकाघाट)

आकाश से गिरते उल्कापिंडों

और सागर की उत्तुंग उच्छृंखल लहरों को

आत्मसात करने की

अद्भुत शक्ति है हम सब में

अफसोस, मिट्टी के लोंदो की मानिद

नित नए-नए चाकों पर चढ़

गड़े जाना नियति हो गई है हमारी

बन कर उनके

फर्श का संगे मरमर,

नित सहते हैं हम

सीना फुला कर उन के पदाघात

अकारण नहीं है यह सब

हमीं ने खो दिया है सस्ते में

कहीं न कहीं अपना अपना खुरदरापन

You might also like