ग्रीन शिमला

हिमाचल के स्थानीय निकायों को ग्रीन करने की मुहिम, मनाली से शिमला पहंुचकर राज्य को वैश्विक सोच से भी जोड़ रही है। खास तौर पर समुद्र तटीय व पर्वतीय इलाकों की पर्यावरणीय आवश्यकताओं को देखते हुए ईको टैक्स प्रणाली के जरिए हिमाचल में पर्यावरणीय जवाबदेही बढ़ेगी। हालांकि ऐसे फैसलों में राजनीतिक स्वार्थ सूंघने की रिवायत, शिमला की अहमियत को कम ही करेगी, फिर भी ऐसे निर्णय से भविष्य के प्रति मानवीय संवेदना का पता चलता है। ग्लोबल प्रभाव से आहत शिमला में मानवीय गतिविधियों और प्रगति के आलम में पर्वतीय चिन्हों पर बढ़ते आक्रमण को रोकने की व्यापक योजना व नीति हिमाचल के हित में सदा रहेगी। शिमला में बढ़ती भीड़ और वाहनों की तादाद में इजाफे के खिलाफ ग्रीन टैक्स एक राहत भरा पैगाम है। बाहरी वाहनों से कर अदायगी के औचित्य को सही ठहराने के लिए, इसके उचित व्यय की शर्त भी नत्थी है। इससे पूर्व मनाली में पर्यटन के मार्फत जमा हुए 12 करोड़ की आय ऐसी योजना पर खर्च नहीं हुई, जिससे प्रदूषण पर नियंत्रण व पर्यावरण का संतुलन बढ़ जाता। प्रदेश में कूड़ा-कचरा प्रबंधन, पोलिथीन प्रतिबंध, कार्बन क्रेडिट योजना का श्रीगणेश तथा सीएफएल की मुफ्त खेप उतार कर सरकार ने परिवेश को नई कलम से लिखा है। इसके अलावा हमीरपुर, शिमला व सोलन जैसे शहरों को सोलर सिटी के रूप में योजनाओं का माल्यार्पण किया गया। यह दीगर है कि शिमला समेत अन्य हिल स्टेशनों की विकास योजनाओं के तहत ‘ग्रीन स्पेस’ बढ़ाने के प्रयत्न करने होंगे। हर शहर की अलग से पर्यावरण योजना के अलावा शहरी वन क्षेत्र की भी अलग से नीति का निर्धारण करना होगा। प्रमुख सड़कों व शहरी सड़कों के किनारे सजावटी पौधे उगाने की योजना को अमलीजामा पहनाना होगा। प्रदेश में ग्रीन टैक्स के मायने केवल कर उगाही तक ही सीमित नहीं, बल्कि इसके साथ नागरिक जिम्मेदारी, जागरूकता तथा सामुदायिक जवाबदेही में भी प्रसार चाहिए। हिमाचल के शहरों में ग्रीन बिल्डिंग, पर्वतीय वास्तुशिल्प, मौसम कार्य योजना, वैकल्पिक ऊर्जा वाहन तथा निजी वाहनों के बढ़ते प्रभाव को कम करने की दिशा में बढ़ना होगा। मनाली-शिमला के पद चिन्हों पर बाकी महत्त्वपूर्ण शहरों, पर्यटक एवं धार्मिक स्थलों को ग्रीन सिटी बनाने की उपयोगिता हम अधिक समय तक नजरअंदाज नहीं कर सकते। इसके लिए धन अर्जित करने के विभिन्न रास्तों में ग्रीन टैक्स सर्वोपरि रहेगा। इस बहाने शिमला के अस्तित्व को सुरक्षित और भविष्य के प्रति सरोकार पुख्ता किए जा सकते हैं। ग्रीन टैक्स से होने वाली आय का सबसे बड़ा योगदान प्रदूषण रहित यातायात व्यवस्था को पुष्ट करने में रहेगा। शिमला या अन्य महत्त्वपूर्ण शहरों में बिजली संचालित यातायात व्यवस्था का खाका तैयार करना होगा। पर्वतीय शहरों में स्काई बस, एरियल ट्रॉम, मोनो टे्रन, रज्जु मार्ग व पदयात्रियों की सुविधानुसार फुटपाथ, फुटपाथ ब्रिज तथा सुरंग मार्ग तैयार किए जा सकते हैं। प्रदेश में ग्रीन टैक्स के माध्यम से जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण तथा प्रदूषण मुक्त यातायात को बढ़ावा मिलेगा। मनाली में साढ़े तीन करोड़, शिमला में छह करोड़ ग्रीन टैक्स उगाने की क्षमता है, तो कल मकलोडगंज, चिंतपूर्णी, नयनादेवी, डलहौजी तथा दियोटसिद्ध जैसे शहरों में भी परिदृश्य को बदलने के लिए ऐसे उपाय सार्थक होंगे। हिमाचल के शहरों में वाहन वर्जित मार्गों की संख्या बढ़ाने के दृष्टिगत, नगर नियोजन की अवधारणा को और पर्यावरण मित्र बनाने की आवश्यकता है। हमीरपुर में मालरोड की मांग को दरकिनार करने के राजनीतिक कारणों को हटाकर ही हम शहरी परिवेश को ग्रीन कर पाएंगे। हिमाचल में कार्बन के्रडिट योजना के जरिए पर्यावरण का आधार विस्तृत होगा, लेकिन यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि निजी क्षमता में जनता अपनी भूमि का इस्तेमाल किस तरह से करती है। सोलन-शिमला में बिल्डरों ने जिस तरह लैंड यूज की परिभाषा को व्यापार का मुखौटा बना दिया, उसके खिलाफ सशक्त कार्रवाई का रास्ता चुनना ही पड़ेगा। ग्रीन अधोसंरचना के निर्माण में सामुदायिक भावना का अलख जगाकर ही हम पर्यावरण के प्रति जवाबदेही को प्रदर्शित कर पाएंगे।

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