‘जलपुरुष’ राजेंद्र सिंह

अटल पानीदार समाज बनाने के संकल्प के कारण ही आज राजेंद्र सिंह ‘जलपुरुष’ के नाम से पुकारे जाते है। राजेंद्र सिंह का जन्म गांव डौला, जिला बागपत उत्तर प्रदेश में हुआ। वह एक राजपूत घराने से संबंधित थे। उनके पिता एक बड़े काशतकार थे। जब राजेंद्र सिंह उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे थे, तब 1974 में उनकी जिंदगी में महत्त्वपूण्र परिवर्तन आया। यह परिवर्तन रमेश शर्मा जो कि गांधी फाउंडेशन के सदस्य थे, उनके कारण आया। उन्होंने राजेंद्र के दिमाग में गांवों के सुधारों प्रति वार्तालाप से परिवर्तन कर दिया। दूसरा प्रभावशाली परिवर्तन उनके अंग्रेजी अध्यापक प्रताप सिंह के द्वारा आया, जो कि स्कूल में छुट्टी के उपरांत सामाजिक व राजनीतिक गतिविधियों में चर्चा करते थे। उच्च शिक्षा की पढ़ाई के उपरांत राजेंद्र सिंह ने ‘आयुर्वेदिक मेडिसन एंड सर्जनी’ की डिग्री भारतीय ऋषिकुल आयुर्वेदिक कालेज में हासिल की। 1975 में राजेंद्र सिंह ने ‘तरुण भारत संघ’ की नींव रखी। उन्होंने टीवीएस संस्था के जरिए लगभग एक हजार गांवों में लोगों को पानी की सुविधा द्वारा राहत दिलाई। राजेंद्र सिंह ने गर्म व शुष्क मौसम में जो पानी पहले से सरंक्षित किया जाता था, उसका प्रयोग आसानी से लोगों को करवाते थे। पानी के लिए जगह-जगह उचित प्रबंध करवाए। भारत सरकार द्वारा संचालित 2009 में ‘नेशनल गंगा रविर बेसिन एथोरिटी’ के मुख्य सदस्य थे। वह वहां के हर कार्य जैसे नियोजन, प्रबंधक, सलाहकार व वित्तीय खर्च का कार्यभार पूरी निष्ठा व ईमानदारी के साथ निभारते थे। 2001 में राजेंद्र सिंह को ‘रेभोक मैगसिक’ अवार्ड से नवाजा गया। यह अवार्ड उन्हें कम्युनिटी लीडरशिप में प्रगति से कार्यभार संभालने के लिए दिया गया। आज पूरे विश्व में ग्रहों की सुरक्षा हेतु राजेंद्र सिंह का नाम प्रथम पचास व्यक्तियों में एक के रूप में उल्लेखनीय व प्रसिद्ध है। राजेंद्र सिंह ने जो कर दिखाया, उसके लिए समूचा भारतवर्ष उनका ऋणी है।

You might also like