जिम्मेदार कौन

(सुरजीत राणा, बैजनाथ)

हमारे देश की व्यवस्था में बहुत सारी खामियां हैं, जिसके लिए हम सीधे-सीधे सरकार को जिम्मेदार ठहरा देते हैं, जबकि गंभीरता से विचार किया जाए तो आज देश यदि बेरोजगारी, रिश्वतखौरी एवं जमाखौरी इत्यादि समस्याओं से त्रस्त है तो उसके जिम्मेदार हम हैं। सरकारी नौकरी पा लेने के बाद जवाबदेही से काम न करने वाले भी हम हैं, चपरासी से लेकर नौकरशाह तक की कुर्सी पर बैठे रिश्वत लेने वाले भी हम हैं और आसान तरीके से काम करवाने के लिए रिश्वत देने वाले भी हम ही हैं। राजनेताओं को विधानसभा/लोकसभा में पहुंचाने वाले भी हम हैं, साथ ही उनके विरोध में दिन-प्रतिदिन जगह-जगह किए जा रहे आंदोलनों का हिस्सा भी हम हैं। शायद हम स्वयं की पहचान ही भूला चुके हैं, पहले हमें स्वयं को बदलना होगा फिर दूसरों से अपेक्षाएं लगानी होंगी तभी इस देश व दुनियां का भला हो सकता है। मेरा मानना है कि अपने हित से हट कर सोचने वाला इनसान ही जीवन के महत्त्व को समझता है तथा जनहित में सहयोगी बनता है।

 

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