निगम की बैठक में हंगामा

शिमला हर बार की तरह इस बार भी निगम की मासिक बैठक काफी हंगामेदार रही। कांग्रेस पार्षदों ने काली पट्टी बांधकर मेयर का विरोध किया। शनिवार की बैठक एजेंडे पर चर्चा करने से पहले ही विकास कार्यों पर ही अटकी रही। पार्षद सुरेंद्र चौहान ने जहां विकास कार्य को एजेंडे पर चर्चा करने से पूर्व उठाया, वहीं संजय चौहान एजेंडे पर अड़े रहे। विकास को लेकर सुरेंद्र चौहान पांच मिनट का समय मांगते रहे, लेकिन बहस इतनी बढ़ गई कि आधे घंटे से ऊपर का समय लग गया और कुछ निर्णय नहीं लिया जा सका, जिससे सदन में स्थिति काफी तनावपूर्ण रही। सुनियोजित तरीके से पार्षदों ने विकास कार्यों को लेकर सदन में मुद्दे को उठाया। पार्षद सुरेंद्र चौहान विकास कार्यों को लेकर मेयर से जवाब चाह रहे थे कि तभी कांग्रेस के कुछ पार्षद मुंह पर काली पट्टिया बांधकर सदन में प्रवेश किए और जमीन पर बैठकर अपना विरोध जताने लगे। मौके की नजाकत को भांपते हुए भाजपा के पार्षद भी कांग्रेस के समर्थन में दिखे और वे मेयर पर हावी होने लगे। मामले ने इतना तूल पकड़ लिया कि नागरिक सभा के नाम पर पार्षदों ने मेयर को घेरा। पार्षद जहां विकास को लेकर अपनी बात मनवाने को अड़े रहे, तो वहीं मेयर भी एजेंडे पर चर्चा की जिद करने लगे। अंत में समय को बढ़ता देख मेयर को नर्म पड़ना पड़ा और उन्होंने खफा पार्षदों से विकास कार्यों को लेकर उनके द्वारा सुझाए गए पांच कार्यों को मानने पर अपनी सहमति जताई। उधर, पार्षद सुशांत कपरेट शहर में ठप पड़े विकास कार्यों को लेकर भड़के और उन्होंने भी अन्य पार्षदों की तरह मेयर द्वारा करवाई जा रही वार्ड सभा पर अपनी आपत्ति जताई। पार्षद संजय सूद ने मेयर द्वारा करवाई जा रही वार्ड सभा पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि मेयर निगम एक्ट की अवहेलना करते हुए वार्ड सभा के माध्यम से अपनी राजनीति चमका रहे हैं, जबकि कायदे से काउंसलर की अध्यक्षता में वार्ड सभा का प्रावधान एक्ट में है।

 

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