पहाड़ी माणु बनाम मराठी मानुष

Sep 9th, 2012 12:10 am

बेशक राज ठाकरे की वाणी आग उगलती हो, किसी की खिलाफत करती हो या जाति-संप्रदाय से प्रेरित हो, लेकिन इन तीखे शब्दों में कुछ न कुछ सच्चाई जरूर होती है। हालांकि यूपी-बिहार के लोगों पर की गई उनकी टिप्पणी जायज नहीं है और हिंदोस्तानी को देश के किसी भी कोने में रहने का हक है, लेकिन मर्यादित आचरण की शर्तें हमेशा जीवित रखनी होंगी। जिस तरह मराठी प्रतिष्ठा के संबोधन खौलते हैं, ठीक उसी तरह हिमाचली अस्तित्व की सौगंध खाते जज्बात भी धारा 118 के पक्ष में एक हो जाते हैं। पहाड़ी माणु भी मराठी मानुष की तरह हिमाचली परिवेश में अपने अधिकार सुरक्षित रखना चाहता है। सारा देश महाराष्ट्र के पक्ष में उठी आवाज के खिलाफ ठाकरे को कोसता है, लेकिन हिमाचल में तो देश के नागरिक को एक इंच भी जमीन खरीदने का अधिकार नहीं। क्या हिमाचल का ऐसा फैसला राष्ट्रीय संविधान की गरिमा के अनुरूप है? इसी सवाल की नब्ज पर हाथ रखते हुए पेश है दखल…

मनसे प्रमुख राज ठाकरे की एक टिप्पणी पर सारे हिंदोस्तान का सियासी पारा गर्म हो जाता है। विशेषकर जब-जब राज ठाकरे ने मराठी बनाम उत्तर-भारतीय का नारा देकर राजनीतिक दुराग्रह किया हो, तब-तब देश में राजनीतिक अस्थिरता देखने को मिली है। कई मर्तबा राज ठाकरे की टिप्पणी क्षेत्रवाद व मराठी लोगों से प्रेरित रही है, लेकिन उनके बहुत से बयानों में से कुछ एक अच्छी सोच भी छिपी है। अच्छी वजह यह है कि राज ठाकरे अकसर बाहरी राज्य विशेषकर उत्तर-प्रदेश व बिहार के लोगों का पंजीकरण कराने के हिमायती रहे हैं, ताकि आपराधिक वारदातों को अंजाम देकर अपने राज्य भागने के बाद गुनहगारों का पता लगाया जा सके, मगर राज ठाकरे के उत्तर-भारतीय के खिलाफ आने वाले बयानों की हमेशा निंदा की जाती रही है। उनके बयानों को अकसर राजनीतिक दुराग्रह की लड़ाई से जोड़ा गया है। कायदे से किसी भी बाहरी राज्य के लोगों को देश के किसी भी प्रदेश में जाकर पंजीकरण कराना होता है। पंजीकरण कराए बिना रहना अपराध माना जाता है। हिमाचल में भी बाहरी राज्यों से आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को पंजीकरण कराना अनिवार्य किया गया है, मगर प्रदेश में बाहरी राज्यों से आने वाले पांच फीसदी लोग भी पंजीकरण नहीं करवा रहे हैं। पंजीकरण के नजरिए से देखा जाए तो राज ठाकरे का बयान सही है। हिमाचल में दर्जनों आपराधिक वारदातों को अंजाम देकर अपने राज्य भाग चुके अपराधी आज भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। ऐसे में यदि हिमाचल में सभी गैर-हिमाचली पंजीकृत होते तो हिमाचल छोड़कर भाग चुके लोगों का ब्यौरा जुटाने के बाद पुलिस अपराधियों तक पहुंच सकती थी, मगर इसके लिए सभी गैर हिमाचलियों का पंजीकरण आवश्यक है। हिमाचल में गैर हिमाचलियों के पंजीकरण का सच अभी भी पर्दे के पीछे छिपा हुआ है। शिक्षाविद बालकृष्ण, केवलराम, हेतराम का कहना है कि हिमाचलियों को 70 फीसदी रोजगार की शर्त श्रेणीवार भी लागू होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उद्योगों व निजी कंपनियों में प्रथम व द्वितीय श्रेणी के पदों पर भी हिमाचलियों को आरक्षण मिलना चाहिए। उच्च पदों पर बाहरी राज्यों के लोग बैठे हैं, जबकि हिमाचलियों को तृतीय व चतुर्थ श्रेणी पदों पर ही आरक्षण दिया जा रहा है।

 

Himachal List

Free Classified Advertisements

Property

Land
Buy Land | Sell Land

House | Apartment
Buy / Rent | Sell / Rent

Shop | Office | Factory
Buy / Rent | Sell / Rent

Vehicles

Car | SUV
Buy | Sell

Truck | Bus
Buy | Sell

Two Wheeler
Buy | Sell

Polls

क्या आप स्वयं और बच्चों को संस्कृत भाषा पढ़ाना चाहते हैं?

View Results

Loading ... Loading ...

Miss Himachal Himachal ki Awaz Dance Himachal Dance Mr. Himachal Epaper Mrs. Himachal Competition Review Astha Divya Himachal TV