प्रयोग से प्रतिज्ञा तक पर्यावरण

Sep 15th, 2012 12:15 am

पर्यावरण को प्रयोगशाला से प्रतिज्ञा तक ले जाने का संकल्प अगर हिमाचल ले रहा है, तो यह परिवेश से इनसान के नए रिश्तों का आगाज है। टीईआरआई के अध्यक्ष डाक्टर आरके पचौरी हिमाचल में हरियाली के बीज देखते हुए, वैश्विक मॉडल का पौधारोपण करते हैं। सरकार अपने तौर पर पर्यावरण के प्रश्नों का समाधान ढूंढते हुए डाक्टर पचौरी की प्रयोगशाला में प्रवेश करती है, तो प्रमाणित होती इच्छा शक्ति का दस्तूर सामने आता है। ग्रीन ग्रोथ की कथा को बजटीय प्रावधानों का आसरा चाहिए, लेकिन इससे पहले मकसद और मंजिल के निशान स्थापित करने होंगे। हिमाचल की सामाजिक-आर्थिक तरक्की के हर पहलू के साथ पर्यावरण के संबोधन नत्थी हैं। हालांकि आधुनिक विकास की रफ्तार और रगड़ का अनुभव पर्वतीय संदर्भों को बिगाड़ रहा है, फिर भी समाज और साधन अगर संतुलित रहें तो जीवन की परिभाषा नहीं बिगड़ेगी। जीवन का संबंध केवल निजी जरूरतों या आकांक्षाओं तक सीमित नहीं, बल्कि अगली पीढ़ी की हिफाजत के दस्तावेज सुरक्षित रखते हुए ही प्रगति के फलक को चौड़ा कर पाएंगे। दीर्घकालीन विकास के मायनों में लोगों के जीवन में खुशहाली और संतोष से जुड़ी हर जरूरत का इंतजाम जहां लाजिमी है, वहीं भविष्य के मार्ग भी सुरक्षित रखने पड़ेंगे। पर्यावरण सुरक्षा के नाम पर न तो विकास के मार्ग अवरुद्ध हो सकते हैं और न ही जनता की तरक्की के अवसर कम किए जा सकते। हिमाचल के संदर्भ में विकास और पर्यावरण का संतुलन हमेशा जल, जंगल और जमीन के इस्तेमाल का वर्णन करता है और यही हमारे भविष्य की रखवाली का मसौदा भी है। विडंबना यह है कि निजी कारणों से कुछ हद तक पर्यावरण के खिलाफ अत्याचार हुए हैं। पर्वतीय परिवेश ने आर्थिक तरक्की, रोजगार के अवसर या मानवीय प्रतिस्पर्धा के कारण, अपनी जटिलताओं के समाधान से दर्द ही एकत्रित किया।  कुछ साल पहले तक हिमाचल में पारंपरिक सिंचाई के जो साधन थे, वे आज दफन हैं या उन पर लोभ की प्रेत छाया है। कांगड़ा जिला की कई कूहलों पर अतिक्रमण, कुल्लू-चंबा की नदियों का सिकुड़ता वजूद, कटते पहाड़ों पर शहरीकरण की चढ़ाई और पर्यटन दोहन की खुमारी से हम अपना वजूद इतना न खो दें कि जीवन यात्रा किसी विराम तक पहुंच जाए। पर्वतीय परिवेश की विकास जिंज्ञासा हमेशा मैदान से मुकाबिल होती है, लेकिन अपने यर्थाथ को हम गुनहगार भी तो नहीं बना सकते। ऐसे में पचौरी का संस्थान ऐसी अभिलाषा बन सकता है, जिसके कारण पर्वतीय भविष्य को न्योता दे सकें। हिमाचल के विषयों को रेखांकित करते हुए टीईआरआई ने बायो तकनीक, जैविक खेती व हर्बल उत्पादन को नई आशाओं से जोड़ा है। कृषि व बागबानी उत्पादों के समर्थन में तकनीकी सामर्थ्य को परिभाषित करते इरादे अगर कोल्ड स्टोरेज की शृंखला बनाने में मददगार हों, तो वाकई क्रांति आ सकती है। आजतक पर्वतीय आर्थिकी का कोई केंद्रीय खाका नहीं बना। कोई ऐसा विभाग स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रहा, जिसके माध्यम से अलग मानक, मानदंड और आर्थिक सहायता तय हो। पर्वतीय राज्यों में ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के लिए विशेष रेल परियोजनाएं, रज्जु मार्ग या एरियल ट्रांसपोर्ट सिस्टम की दिशा में भारत सरकार ने विशेष योजनाओं को अहमियत नहीं दी। मजबूरन पारंपरिक सड़क मार्गों के लिए पहाड़ को चीरने की जिद प्रभावी रहती है। इसी तरह ऊर्जा नीति से पर्वतीय परिवेश की सुरक्षा नहीं जुड़ पाई। जल विद्युत परियोजनाओं ने नदियों को जख्म दिए और इसी कारण जलजीव व वनस्पति भी प्र्रभावित हुई। हिमाचल जैसे राज्य में आवासीय जरूरतों को नजरअंदाज करके सरकारों ने निजी क्षेत्र को प्रकृति के विरुद्ध जाने की छूट दे दी, नतीजतन सोलन जैसे शहर की पहाडि़यां जमींदोज हो रही हैं। बेशक सरकारी तौर पर हिमाचल ने पर्यावरण जागरूकता का अलख जगाया है, लेकिन आवश्यक यह भी है कि जनता के बीच सामुदायिक भावना से जल व वन संपदा की रक्षा हो। रेन वाटर हार्वेस्टिंग के प्रति चेतना व इसके मुताबिक अधोसरंचना का विकास अब समय की जरूरत है। हिमाचल के प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए सरकारी तौर पर मजबूत अधोसरंचना के साथ-साथ सामुदायिक जिम्मेदारी का एहसास भी लाजिमी रहेगा।

Himachal List

Free Classified Advertisements

Property

Land
Buy Land | Sell Land

House | Apartment
Buy / Rent | Sell / Rent

Shop | Office | Factory
Buy / Rent | Sell / Rent

Vehicles

Car | SUV
Buy | Sell

Truck | Bus
Buy | Sell

Two Wheeler
Buy | Sell

Polls

क्या आप स्वयं और बच्चों को संस्कृत भाषा पढ़ाना चाहते हैं?

View Results

Loading ... Loading ...

Miss Himachal Himachal ki Awaz Dance Himachal Dance Mr. Himachal Epaper Mrs. Himachal Competition Review Astha Divya Himachal TV