बात यही है सत्य

(सुरेंद्रपाल वैद्य, मंडी)

कहीं-कहीं पर भारी वर्षा

मगर कहीं है सूखा

कहीं सड़ रहा अन्न

गरीब है फिर भी भूखा

मरने को अभिशप्त

खा रहा दर-दर ठोकर

जननेता हैं व्यस्त

घोटालों में बढ़चढ़कर

बात यही है सत्य

मगर यह लोकतंत्र है

जनता ही है मालिक

नेता तो जनसेवक है

 

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