वीरभद्र-बरागटा के हाथ पार्टियों की डोर

विधानसभा चुनाव में शिमला जिला में कांग्रेस की डोर एक दफा फिर वीरभद्र सिंह के ही हाथ में रहेगी। दूसरी तरफ भाजपा में वर्तमान बागबानी एवं स्वास्थ्य मंत्री नरेंद्र बरागटा अपनी पार्टी को मझधार से निकालने में अहम किरदार निभाएंगे। जिस तरह से धूमल सरकार ने बरागटा को पूरे जिला की कमान सौंपकर रखी है, उससे तय है कि बरागटा पर भाजपा का दारोमदार रहेगा। शिमला जिला की सियासत में वीरभद्र सिंह सबसे बड़ा रोल अदा करते हैं। शिमला में उनका अपना घर है, वहीं रामपुर उनका गृह क्षेत्र है। रोहडू विस क्षेत्र से वह कई दफा चुनाव लड़ते हैं, वहीं शेष पांचों विधानसभा  क्षेत्रों में उनके समर्थकों की कोई कमी  नहीं है। विधायक दल की नेता विद्या स्टोक्स को भी ठियोग में चुनाव लड़ने के लिए उनका सहारा लेना ही पड़ेगा। दूसरी तरफ भाजपा के लिए नरेंद्र बरागटा कहां तक शिमला जिला में तारणहार बन सकेंगे, यह भी देखने की बात है, क्योंकि शिमला जिला में बतौर बागबानी मंत्री उनकी उपलब्धियां अहम हैं। शिमला जिला पूरी तरह से बागबानी बैल्ट है, लिहाजा यहां पर एप्पल री-जूविनेशन, ठियोग में बागबानों के लिए पराला मंडी, सेब को ओलों से बचाने के लिए एंटी हेलगन व एंटी हेलनेट के साथ कोल्ड चेन की योजनाएं अत्यधिक लाभकारी रही हैं। इन्हीं योजनाओं के सहारे नरेंद्र बरागटा जुब्बल-कोटखाई में भाजपा का परचम तो लहराएंगे ही, वहीं दूसरे क्षेत्रों में भी उन्हें भाजपा का ग्राफ बढ़ाने की चुनौती है। वह शिमला से एक दफा पहले विधायक भी रह चुके हैं। इन दोनों नेताओं को कांगे्रस व भाजपा की तरफ से ट्रेंड सेटर भी माना जा सकता है, क्योंकि पूरे जिला की राजनीति का दारोमदार इन्हीं पर होगा। इसके अलावा भाजपा के पास पार्टी के पूर्व अध्यक्ष सुरेश भारद्वाज भी हैं, जो शिमला से विधायक हैं और राज्यसभा के सांसद भी रह चुके हैं।

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