सुखराम ने ध्वस्त किए शिमला के मंसूबे

प्रदेश की सियासत में सुखराम की हिविकां ने शिमला जिला के मंसूबों को ध्वस्त कर दिया।  वर्ष 1998 के चुनाव में सुखराम ने वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस को समर्थन देने से इनकार क्या किया शिमला जिला से मुख्यमंत्री की कुर्सी छिन गई। जिला की पूरी राजनीति सुखराम के इस दांव से हिल गई क्योंकि उस समय यदि सुखराम कांग्रेस को समर्थन देते तो यकीनन वीरभद्र सिंह ही दोबारा से मुख्यमंत्री बनते, क्योंकि उनके पास विधायकों का समर्थन था, लेकिन सुखराम ने इनकार कर दिया और शिमला जिला से मुख्यमंत्री की कुर्सी छिटककर हमीरपुर के पास चली गई।

एक सच यह भी

सुखराम भले ही आज वापस कांग्रेस में हैं, लेकिन वीरभद्र सिंह के साथ उनका आंकड़ा पुराना रहा है। वर्ष 1992 में पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री सुखराम ने कांग्रेस के 20 एमएलए अपने साथ होने का चंडीगढ़ में दावा जताया था। कांग्रेस का इतिहास गवाह है कि शिमला पहुंचने तक उनकी संख्या 10 भी नहीं रह सकी, लेकिन  वर्ष 1997-98 में हिविकां के गठन ने शिमला जिला को पछाड़ दिया।

भाजपा को विकास दिलाएगा वोट

भाजपा विकास के मुद्दे पर चुनाव मैदान में उतर रही है। पूरे प्रदेश में उसके पास विकास का एकमात्र मुद्दा है। सरकार ने शिमला जिला की सेब बैल्ट व किसानों के लिए जिन योजनाओं को चलाया है, वे उसका मुख्य हथियार बनेंगी। जिला के दूरदराज के क्षेत्रों में लोगों को अटल स्वास्थ्य सेवा के तहत रोगी वाहन की सेवा एक बड़ा मुद्दा है, जिससे जिला की जनता को काफी लाभ मिला है। इसके अलावा एप्पल री-जूूविनेशन, प्रगतिनगर में तकनीकी संस्थान, पराला की मंडी, एंटी हेल नेट, गन आदि की योजनाएं धूमल सरकार ने प्रभावी तौर पर शिमला जिला में दी हैं, जो वर्तमान सरकार के लिए अहम मुद्दे हैं।

कांग्रे्रस खराब सड़कों को बनाएगी मुद्दा

कांग्रेस बागबानी क्षेत्र में सड़कों की दुर्दशा को मुख्य मुद्दा बनाकर चली हुई है। ठियोग-हाटकोटी-रोहड़ू सड़क कांग्रेस का मुख्य मुद्दा है, क्योंकि इस सड़क की स्थिति ठीक नहीं हो सकी है और हर साल बरसात में बड़ी परेशानी बनकर उभरती है। खासकर सेब बागबानों के लिए सेब सीजन में यह सड़क बड़ा मुद्दा रहती है, जिस पर सरकार पांच साल से जवाब दे रही है। इसके अलावा कांग्रेस स्वास्थ्य संस्थानों में स्टाफ की कमी, स्कूलों की दयनीय हालत, यहां के कर्मचारियों के तबादलों और विकास की कुछ दूसरी योजनाओं के पूरा नहीं होने पर भी भाजपा को घेरेगी।

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