स्टोक्स-जय बिहारी की हसरत अधूरी

हिमाचल की सियासत में शिमला जिला का अहम रोल रहा है। मुख्यमंत्री की कुर्सी, क्योंकि सालों तक इसी जिला के पास रही है, इसलिए प्रदेश की राजनीति में इसका कोई सानी नहीं। दूसरे बड़े जिलों को छोड़कर मात्र आठ सीटों वाला शिमला जिला राजनीतिक समीकरण बनाता व बिगाड़ता रहा है, क्योंकि यहां कई कद्दावर नेता रहे हैं जो सीएम की कुर्सी के काफी करीब रहे। मुख्यमंत्री बनने की होड़ किसमें नहीं होती और वह भी तब जब अपने-अपने ही जिला से दो-दो मुख्यमंत्री रहे। रामलाल ठाकुर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, वहीं वीरभद्र सिंह  पांच दफा मुख्यमंत्री की कुर्सी पर रहे। कांग्रेस के दिग्गजों विद्या स्टोक्स और स्वर्गीय जय बिहारी लाल खाची भी मुख्यमंत्री की कुर्सी के नजदीक  पहुंचते-पहुंचते रह गए। विद्या स्टोक्स कांग्रेस के कई अहम पदों पर रही हैं, वह विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर भी रह चुकी हैं और पार्टी अध्यक्ष भी। वर्तमान में विधायक दल की नेता हंै। इन अहम पदों पर रहकर उनका मुख्यमंत्री की कुर्सी पर दावा काफी पुख्ता रहा। वर्ष 2003 में जब कांग्रेस सत्ता में आई तो स्टोक्स ने सीएम की कुर्सी पर दांव खेला, मगर उनकी इच्छा पूरी नहीं हो सकी। स्टोक्स को राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का करीबी भी माना जाता है, लेकिन फिर भी वीरभद्र सिंह का वर्चस्व रहा, जिन्होंने बाद में फिर कुर्सी संभाली। स्टोक्स से पहले स्वर्गीय जय बिहारी लाल खाची जो कांग्रेस सरकार में कई पदों पर रहे भी सीएम बनना चाहते थे। इस कुर्सी को हासिल करने के लिए उन्होंने भी कई दांव खेले। कुमारसैन-सुन्नी की राजनीति में खाची का कोई मुकाबला नहीं था, जिसे आज भी माना जाता है।

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