हिमाचली सैनिकों की खुशदिली का राज

Sep 29th, 2012 12:15 am

(कर्नल जसवंत सिंह चंदेल वीएसएम बॉडीगार्ड हाउस कलोल, बिलासपुर हिमाचल प्रदेश)

कुछ समय पहले हमारे मुख्यमंत्री महोदय से किसी ने यह जानने की कोशिश की थी कि हिमाचल के लोग इतने अनुशासित कैसे हैं। प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने जवाब दिया था कि यह इसलिए है, क्योंकि हिमाचल में बसने वाले हर परिवार से कोई न कोई सेना में है या था…

जब तक मैं सेना में सेवारत था, उस समय के बारे में बात नहीं कर सकता हूं, लेकिन पिछले 15 वर्षों से जबसे मैं पूर्व सैनिक बना हूं, हिमाचल के किसी सैनिक ने आत्महत्या नहीं की है। यह अपने आप में एक सराहनीय बात है। मेरा मकसद किसी प्रदेश के सैनिक पर अंगुली उठाना नहीं है, मैं तो केवल हिमाचल के सैनिक पर अपने विचार प्रकट करने जा रहा हूं। कुछ समय पहले हमारे मुख्यमंत्री महोदय से किसी ने यह जानने की कोशिश की थी कि हिमाचल के लोग इतने अनुशासित कैसे हैं। प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने जवाब दिया था कि यह इसलिए है, क्योंकि हिमाचल में बसने वाले हर परिवार से कोई न कोई सेना में है या था। सेना में आत्महत्या बारे मंत्री का बयान शोचनीय है। सन् 2003 में 96, 2004 में 100, 2005 में 77, 2006 में 129, 2007 में 118, 2008 में 123, 2009 में 96, 2010 में 115, 2011 में 102 और 31 जुलाई, 2012 तक 62 सैनिकों ने आत्महत्या की है। आत्महत्या करना जुर्म है, पाप है और कलंक भी। आत्महत्या हर क्षेत्र में, हर समाज में, हर प्रांत में और हर तबके में आए दिन होती है, लेकिन सेना का समाज अनुशासित है, वहां ऐसा होना जरूर एक अचंभा सा लगता है। सेना में आत्महत्या क्यों की जाती होगी या क्या-क्या कारण हो सकते हैं। सबसे पहला कारण लंबे समय तक घर परिवार से दूर रहना है। यह समस्या हर सैनिक झेलता है, इसमें कोई शक की बात नहीं है। सैनिक कब अपने परिवार को साथ रखता है? दो या तीन वर्ष के फील्ड या हाई आल्टीच्यूड या फिर इमर्जेंसी वाली जगहों से जब उसकी पलटन कहीं पीस स्टेशन में आती है, तब परंतु तब भी कितने प्रतिशत। किसी सूरत में तीन प्रतिशत सैनिकों को परिवार रखने के लिए घर मिलते हैं। पीस स्टेशन में तीन वर्ष तक ही सैनिक रहता है, उसके बाद वापस फील्ड हाई अल्टीच्यूड या इमर्जेंसी वाली जगहों पर चला जाता है। एक सिपाही 15 वर्ष तक नौकरी करता है और आंकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो नौकरी के पहले तीन वर्ष तक वह कुंवारा होता है, तीन वर्ष बीवी साथ रखता है, तीन वर्ष नान फैमिली स्टेशन फिर शायद तीन वर्ष बीवी बच्चे साथ रह सकते हैं। कहने का मकसद कि 15 वर्षों में कोई सिपाही ही ऐसा होगा जो कि तीन-चार वर्ष अपने बच्चों को साथ रख पाता है।  छुट्टी समय पर न मिलना दूसरा कारण हो सकता है। सूबेदार मेजर से लेकर एक सिपाही तक को 60 दिन की सालाना छुट्टी और 30 दिनों की कैजुअल लीव मिलती है। मान लो एक पलटन में 1000 सैनिक हैं। हुकम यह है कि 20 से 25 प्रतिशत से ज्यादा सैनिक किसी एक समय पर पलटन से बाहर नहीं हो सकते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि पलटन का 200 से 250 सैनिक ही किसी एक समय पर पलटन से बाहर हो सकता है। बाहर का मतलब छुट्टी पर, अस्पताल में, आर्मी कोर्सों पर, कहीं दूसरी जगह डेपुटेशन या ड्यूटी पर होना। लड़ाई के समय यह पाबंदी और हो जाती है। सेना में अधिकारी को बाकियों से 10 दिन छुट्टी कम मिलती है।  देश की रक्षा के प्रति चिंता भी आत्महत्या का कारण बनती है। रक्षा भी ऐसी कि कभी-कभी चौबीसियों घंटे सख्त काम, कभी-कभी नींद की कमी, कभी-कभी समय पर खाना पीना नहीं। भई सेना में जवान अपनी मर्जी से भर्ती होता है, हमारे देश में कानून सेना में सेवा का विधान नहीं है। इसलिए सैनिक को जिस्मानी ताकत के साथ दिमागी ताकतवर होना जरूरी है। इससे मिलते जुलते कई और कारण हो सकते हैं। हिमाचल प्रदेश के सैनिक सही सोच वाले हैं, वे हिम्मत वाले हैं। संस्कारों की बात करें तो हमारे संस्कार बहुत सारों से अच्छे हैं। वैसे भी पड़दादे से लेकर पड़पोते तक सैनिक ही हैं। हिमाचली आदर करना जानता है। हिमाचल में बहुत कम बूढ़े वृद्ध आश्रमों में रहते हैं, वह इसलिए कि बच्चे बहुएं उनकी देखभाल करती हैं। हिमाचली सैनिक अपनी पलटन की इज्जत के लिए मर मिट सकता है। सबसे बड़ी बात कि किसी परिवार का अगर कोई सैनिक अधिकारी है तो उस परिवार का दूसरा सदस्य हवलदार या सूबेदार भी है, जिससे आपसी संबंध मधुर हैं। हिमाचली सैनिक अपने अधिकारियों पर भरोसा करते हैं। इन्हीं कारणों से हिमाचली सैनिक आत्महत्या नहीं करता है, वह हर समस्या का समाधान ढूंढ लेता है। सेना के अधिकारियों को एक बार फिर पुरानी परिपाटी पर जाना पड़ेगा। जवानी के घर-गांव का दौरा करना चाहिए, जो पुराने समय में होता था, जवान की समस्याओं को समय रहते सुलझाना होगा, यह समझना होगा कि सेना का अधिकारी फाइलें या किताबें कमांड नहीं करता है, वह इनसान के दिल और दिमाग पर राज करता है। जवान अधिकारी का बेटा है, भाई और जवान के अलावा अधिकारी-अधिकारी नहीं रह सकता है।

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