Daily Archives

Sep 10th, 2012

नेताओं का भ्रम या घमंड

(शिल्पा सूद, कसौली) कांग्रेस का बाहरी शोर थमा। अध्यक्ष बदली हुआ, पर बहस थमने का नाम नहीं ले रही। कौन बनेगा प्रधानमंत्री, यह संशय बरकरार है। पार्टी के अंदर लड़ते-लड़ते थक चुके योद्धा क्या बाजी जीत पाएंगे। देश की फिक्र होती तो लड़ते न,…

एक सनातन तलाश

समाजवाद एक ऐसा स्वप्निल संसार है, जो लेखकों, बुद्धिजीवियों, विचारकों,सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं को सदैव से आकर्षित करता रहा है। हालांकि इस आदर्श का अवतरण अभी तक यथार्थ की खुरदुरी भूूमि पर नहीं हुआ है। डा. सच्चिदानंद सिन्हा एक ऐसे…

धागा

  पिछले रक्षाबंधन के उपरांत पूरे एक साल तक मैं जिन हालातों से गुजरा था, सभी जानते हैं। करुणा भी मेरे हालात से बेखबर नहीं थी। मदद तो दूर साल भर तक उसने न तो कभी हमारे घर आने की जरूरत समझी और न ही कुछ पूछताछ करने की। क्या साल में एक दिन भाई…

न्यायाधीश का फैसला कितना न्यायिक

(कुलदीप नैयर,लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं) कुछेक मामलों में न्यायाधीशों के पास हस्तक्षेप करने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं रह गया। फिर भी कार्यपालिका के क्षेत्र में अनाधिकार हस्तक्षेप करने वाले न्यायाधीशों द्वारा दिए गए निर्णयों के साथ एक…

संदेश देना साहित्य का कर्तव्य

साहित्य व्यक्ति को  बड़े से बड़ा दुख सहने की शक्ति देता है और समाज को दिशा देता है। यह साहित्यकार का काम है कि वह समाज को संदेश देने वाली रचनाओं  की रचना करे। यह कहना है हरियाणा ग्रन्थ अकादमी के उपाध्यक्ष व कथाकार कमलेश भारतीय का। वे…

केंद्र ने दिया या हक से मिला

तालियों की भिडं़त जलसों से और जनता के बीच जुनून आजमाने की नौबत में सियासत। मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के सवालिया निशान की चुभन कांग्रेसी दीवारों पर स्पष्ट है और इसलिए केंद्र बनाम हिमाचल की जंग इस बार चुनावी मुद्दा होगी। हिमाचल जैसे छोटे…

राष्ट्रीय महत्त्व के फैसलों पर पारदर्शिता जरूरी

(जोगिंद्र ठाकुर, कुल्लू) संसद का मानसून सत्र कोयला ब्लाक आबंटन विवाद की भेंट चढ़ गया। सरकार आबंटन में हुई अनियमितताओं को नकारती रही और सीएजी की रिपोर्ट को एक झूठा आकलन बताकर इसमें किसी भी प्रकार का नुकसान न होने की दलील देती रही। जब कैग…

वार्षिकोत्सव मनाएं वार्षिक श्राद्ध नहीं

जिस प्रकार श्राद्ध पक्ष में हम अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं, कुछ वैसे ही हिंदी को याद करने का चलन चल पड़ा है। मेरे एक पड़ोसी जब तक जीवित रहे,पुत्र और पुत्रवधू के साथ उनकी कभी भी नहीं बनी। उनकी मृत्यु के बाद वही पुत्र उनको स्मरण करते हुए…

बिजली बिल

(मेहर चंद महाशा, कांगड़ा) कांगड़ा उपमंडल के बिजली विभाग के सहायक अभियंता के ध्यान में गुहार है कि बिजली के बिल पहले दो माह के बाद आते थे, यह सिस्टम ठीक था। यदि इससे लंबे समय के बाद बिजली बिल दिए जाएंगे, तो अधिक पैसा जमा कराने से सभी गरीब…

ठाकरे बंधुओं का परमिट सिस्टम

(कैलाश ठाकुर, नया लोरन) हिंदी भाषी लोगों पर राज ठाकरे के आलोचनात्मक  विचारों का अनुगमन करते हुए उद्धव ठाकरे ने भी कहा है कि मुंबई में रहने वाले बिहारियों को परमिट सिस्टम लागू किया जाना चाहिए। यह वक्तव्य भारतीय संविधान में वर्णित…