Daily Archives

Sep 27th, 2012

ओबामा बनाम गांधी

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में विश्व के नेताओं को संबोधित करते जिस तरह महात्मा गांधी के सिद्धांतों का उल्लेख किया है, वह मौजूदा हालात में खास मायने रखता है। इन दिनों जिस तरह इस्लाम विरोधी फिल्म को लेकर मुस्लिम…

सामाजिक उत्तरदायित्व की चुनौतियां

{पीके खुराना,लेखक, एक वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं} भारतीय कंपनियों में दान की परंपरा तो है, पर दान का कारपोरेटाइजेशन नीतिगत रूप में लागू नहीं है, बल्कि बहुत सी भारतीय कंपनियां तो सेवा कार्य के कारपोरेटाइजेशन यानी कारपोरेट सोशल…

पर्यटन के नए पैगंबर

मुरारी बापू की कथा के निष्कर्ष सामान्य भी रहें, लेकिन धर्मशाला में सजा पंडाल अपनी विशिष्टता के आलोक में पर्यटन की दुनिया बदल देता है। जहां दलाईलामा, प्रेम कुमार धूमल, अशोक सिंघल व प्रवीण भाई तौगडि़या जैसे विशिष्ट लोग हाजिरी भरते हों, वहां…

पार्टी कार्यकर्ता का किरदार

{प्रेम चंद माहिल, लरहाना, हमीरपुर} हमारे देश में बहुदलीय शासन प्रणाली है। हर दल के अपने कार्यकर्ता होते हैं, जिनकी कार्यप्रणाली पर राजनीतिक दल स्थिर रहता है। हर पार्टी में तीन प्रकार के कार्यकर्ता होते हैं। ईमानदार, कर्त्तव्यपरायण,…

संभालें नई पौध को

{बचन सिंह घटवाल,लेखक, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सुनहेत कांगड़ा में प्रवक्ता हैं} आज जीवन के परिदृश्य पर बहकावे का ग्रहण लगता जा रहा है। बहकावे के वशीभूत लड़कियां जीवन की सार्थकता को न समझते हुए लड़के के द्वारा दिखाए गए सुनहरे…

और यह भी…

{नरेंद्र सिंह, डलहौजी} जेबीटी भर्ती पर फिर स्टे लगा। लगता नहीं कि इस जन्म में जेबीटी के 2008-10 के बैच को नौकरी मिले। सरकार तो जेबीटी का एक और बैच बिठा रही है। अगर सरकार संजीदा होती तो ये प्रशिक्षित जेबीटी कब के नौकरी लगे होते, पर ऐसा…

विपरीत दूरियां

{ज्ञान चंद शर्मा, मंडी} कमल सम, प्रमुदित जग अभिशप्त सा, यह जीवन किसे सुनाए, अंतर्मन में दबी वेदना के स्वर! नीले अंबर के बितांन तले, हिरण सम कुलांचे भरते तुम, जीवन की अंतहीन पगडंडियों, पर लड़खड़ाते लंगड़ाते हम!…

अनशन में अव्वल हिमाचली

{दयाल चंद रघुवंशी, सोलन} आज हमारे प्रदेश की जनता को एक अनोखी बीमारी ने घेर लिया है और अब यह बीमारी लाइलाज बनती जा रही है और पीडि़त लोग खाना-पीना तक छोड़ रहे हैं। दरअसल इस मर्ज का नाम अनशन है। अपनी बात मनवानी हो ख्वाहिशें, पूरी करनी हो या…

पढ़ाई-नौकरी में खड्ड बनी रोड़ा

चुवाड़ी — रोजगार पाने की मन में चाह लिए बेरोजगार पंजीकरण करवाने की अपनी लालसा को तब मन में दबा लेते हैं, जब बारिश में लबालब बहती खड्ड को बिना पुल पार करना पड़ता है। भटियात क्षेत्र के रोजगार उपकार्यालय जहां

सड़क से रेलिंग साफ, बोर्ड से ‘चेतावनी’ गायब

कांगड़ा — कुदरत का करिश्मा कहें या माता बज्रेश्वरी देवी की कृपा वशिष्ठ परिवार पर हुई और वे सभी लोग बच गए। अलबत्ता खूनी बनेर खड्ड पिछले दो दशकों में दो दर्जन से भी अधिक लोगों को लील चुकी है। अधिकांश लोग ऐसे थे जो आए तो मीलों दूर से माता…