सागर के उस पार प्यार

इस पार से उस पार

विशाल है जिसका संसार

यहां जरुरत, वहां चाहत

इसकी महिमा बेशुमार

न कोई किनारा न दीवार

न पता गहराई का न आकार

सागर के उस पार प्यार। 

कोशिश करते हैं लोग

इसे पाने की

सोचते हैं

पा जाएं इसका अंत बनके दोस्त यार॥ 

सागर से गहरा है यह

डूबने वाले बहुत डूबे हैं

कुछ कर सामना मछलियों का, मगरमच्छों का 

अपना लक्ष्य चूके हैं

मैं भी कर रहा हूं कोशिश 

इस पार से, उस पार जाने की

साहिल का है इंतजार

अंधी राह है मेरी

साहिल में

आएगा जब ज्वार-भाटा

नौका लग जाए उस पार

आएगा तूफान अगर

तो समां लेगी मंझधार

पर विश्वास के साथ बढ़ना होगा

अपना लक्ष्य पूर्ण करना होगा

सागर के उस पार प्यार।

 इस सागर के उस पार

आनंद है बेशुमार 

मेरे साहिल मुझे ले चलना

जहां बैठा है मेरा दोस्त यार

सागर के उस पार प्यार॥

-केवल राम  चंबा, हिमाचल प्रदेश

 

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