कामिनी कौशल

By: Apr 13th, 2014 12:16 am

अन्य नाम : उमा कश्यप

जन्म : 16 जनवरी, 1927

कर्म-क्षेत्र : अभिनेत्री

मुख्य फिल्में : जेलयात्रा, जिद्दी, नीचा नगर, बिरज बहु, हीरालाल पन्नालाल, पूरब और पश्चिम, लागा चुनरी में दाग, शहीद आदि

पुरस्कार-उपाधि : बिरज बहू के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्म फेयर पुरस्कार

कामिनी हिंदी फिल्मों की एक ऐसी अभिनेत्री और टीवी कलाकार हैं जिसने अपनी शालीनता से सभी का दिल जीत लिया। इनका वास्तविक नाम उमा कश्यप था। कामिनी कौशल नाम चेतन आनंद ने दिया और इसी नाम से यह जानी गईं…

utsavकामिनी कौशल का जन्म ब्रिटिश भारत के लाहौर (पंजाब) में हुआ था। कामिनी के पिता प्रोफेसर शिवराम कश्यप अंतरराष्ट्रीय स्तर के जाने-माने वनस्पति शास्त्री थे और लाहौर के ही गवर्नमेंट कालेज में पढ़ाते थे। लाहौर के मशहूर बॉटेनिकल गार्डन के संस्थापक होने के साथ-साथ वह साईंस कांग्रेस के अध्यक्ष भी थे। कामिनी कौशल का परिवार लाहौर के चौबुर्जी इलाके में रहता था। लेडी मैकक्लैगन हाई स्कूल से उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की थी। इसके बाद किन्नेयर्ड कालेज से अंग्रेजी में बीए ऑनर्स किया। इनके परिवार का माहौल काफी खुला हुआ था। कामिनी बचपन से ही रेडियो नाटकों में हिस्सा लेती थीं, इसके अतिरिक्त घुड़सवारी, तैराकी और साइकिलिंग भी करती थीं। कामिनी कौशल की बहन की असामयिक ही मृत्यु हो गई थी, जिस कारण अपनी भतीजियों के भविष्य की चिंता उन्हें थी। अपनी भतीजियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए ही कामिनी ने अपने जीजा ब्रह्मस्वरूप सूद से विवाह कर लिया और मुंबई आ गईं। ब्रह्मस्वरूप सूद पोर्ट ट्रस्ट में काम करते थे। उन्होंने कामिनी को फिल्मों में काम करने की पूरी आजादी दे दी थी। उस समय फिल्मों में काम करना अच्छा नहीं माना जाता था। चेतन आनंद कामिनी के बड़े भाई के करीबी दोस्त थे और उन दिनों अपनी पहली फिल्म नीचा नगर की तैयारियों में लगे हुए थे। एक रोज उन्होंने रेडियो नाटक सुनकर कामिनी को अपनी फिल्म की मुख्य भूमिका के लिए लेना चाहा, किंतु कामिनी ने साफ इनकार कर दिया। चेतन ने एक बार फिर से उन पर अपनी फिल्म में काम करने के लिए दबाव डाला, जिसके लिए अपने बड़े भाई के कहने पर कामिनी को हां करना पड़ा। चेतन आनंद की पत्नी उमा आनंद भी उस फिल्म में एक अहम भूमिका कर रही थीं, इसलिए चेतन ने कामिनी को उनके असली नाम की जगह फिल्मी नाम दिया था। वर्ष 1946 में बनी फिल्म नीचा नगर के संगीतकार पंडित रविशंकर थे। कांस फिल्म समारोह में शामिल होने और पुरस्कार हासिल करने वाली यह पहली भारतीय फिल्म थी। 1947 में बनी फिल्म जेलयात्रा में कामिनी के नायक राज कपूर थे, जिनकी बतौर निर्माता-निर्देशक पहली फिल्म आग (1948) में भी कामिनी कौशल ने एक अहम भूमिका की। फिल्मिस्तान स्टूडियो की फिल्म दो भाई (1947) में कामिनी के नायक उल्हास थे तो इसी बैनर की शहीद और नदिया के पार (1948) में दिलीप कुमार। इसके बाद अगले दस वर्षों में कामिनी ने नमूना, शबनम, शायर, आरजू, बिखरे मोती, पूनम, आंसू, आस, शहंशाह, बिराज बहू, चालीस बाबा एक चोर, संगम, आबरू, बड़ा भाई, बड़े सरकार, जेलर, नाइट क्लब और बैंक मैनेजर जैसी 33 फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं निभाई। के आर्ट्स के बैनर में बनी फिल्म पूनम और चालीस बाबा एक चोर का निर्माण कामिनी कौशल ने ही किया था। कामिनी कौशल बतौर चरित्र अभिनेत्री 40 से भी ज्यादा सालों तक सक्रिय रहीं। अभिनय के इस दूसरे दौर में उन्होंने 60 से ज्यादा फिल्मों, 1980 के दशक के मध्य में बने अंग्रेजी धारावाहिक ज्वेल इन दि क्राउन और वक्त की रफ्तार, ऊपरवाली घरवाली, संजीवनी, शन्नो की शादी जैसे कुछ हिंदी धारावाहिकों में अभिनय किया। 2007 में बनी लागा चुनरी में दाग कामिनी कौशल की अभी तक की आखिरी हिंदी फिल्म है। 2008 में लंदन में बनी उनकी एक अंग्रेजी फिल्म दि स्क्वायर रूट 2 भी प्रदर्शित हुई थी।

 

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