टेस्ट पारी से रुखसत

By: Jan 1st, 2015 12:15 am

भारत की टेस्ट क्रिकेट का एक अनमोल हीरा अंततः खुद को समेटने लगा और इस तरह महेंद्र सिंह धोनी ने अपने कुछ कदम वापस लिए। क्रिकेट सज्जा में टेस्ट मैचों की शृंखला से किनारा करते हुए धोनी ने समय की रफ्तार को समझा, जबकि फटाफट व टी-ट्वेंटी के हिसाब से माही अपनी शक्ति के स्रोत सहेज रहा है। विदेशी धरती पर लगातार छठी सीरीज हारते देश की व्यथा पर यह जबरदस्त टिप्पणी है कि एक सितारा ऐसे मैदान से लुप्त हो रहा है। बेशक 2014 को क्रिकेट का इतिहास कई उपलब्धियों, निराशाओं व विवादों के कारण याद रखेगा, लेकिन साल के अंत में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले रहे धोनी को भुलाना मुश्किल होगा। इन वर्षों की लंबी पारी में क्रिकेट का पर्याय बनते हुए, धोनी ने सफलता के कई मुहावरे और जीत के मुहाने बदले। एक अविश्वसनीय क्रिकेट यात्रा का ऐसा सफर जो हर अवसर में एक नायक साबित हुआ और विश्व के मंच पर उम्मीदों का तहलका बनकर चकित करता उन्माद रहा। झारखंड के पिछडे़पन से बाहर निकल कर धोनी की तूती बजी और अपनी शोहरत के हर आयाम को भुनाने में यह खिलाड़ी सफल रहा। क्रिकेट के मंच पर छाए धोनी ने सफलता के ऐसे मंत्र जुटाए, जिन पर बिजनेस स्कूलों को मंथन करना पड़ा और हैसियत की बुलंद होती तस्वीर विज्ञापन जगत का ब्रांड बन गई। धोनी अगर मैदान पर रोमांच की अदाकारी का प्रदर्शन करता रहा, तो जिंदगी के हर पल को अपने व्यक्तित्व के नूर से भी भरता रहा। यह खेल का नशा था, जो धोनी की इबारत लिखता रहा, लेकिन टेस्ट क्रिकेट को यकायक अलविदा करने से कुछ संदेह उभरे हैं। आस्ट्रेलिया के आगे भले ही जीत का काफिला न बना हो, पर बीच में अपनी भूमिका समेटने से धोनी ने देश को सोचने पर विवश किया है। यकीनन यह धोनी का निजी फैसला है, फिर भी वक्त इसकी गवाही नहीं देता और न ही सीरीज के बीच आए फैसले की प्रशंसा करेगा। बेशक टेस्ट मैचों की ढलान पर धोनी की कप्तानी के विदेशों में रंग सूख रहे हों या लगातार हार के सिलसिले परेशान कर रहे हों, लेकिन ऐसे कदम के लिए कहीं से कोई दबाव नहीं था। यह खिलाड़ी अपनी प्रवृत्ति के अनूठेपन पर सवार होकर जिस तरह अवतरित हुआ, उसी अंदाज में टेस्ट मैचों से अलहदा होकर भी धोनी ने सभी को अचंभित किया है। धोनी के अनोखे अंदाज की आक्रामक पृष्ठभूमि में कई रिकार्ड सदा सुरक्षित रहेंगे। ये चाहे लंबे छक्के हों, निर्णायक पारियों में जीत के रन बटोरने का कौशल हो या विनम्र स्वभाव से टीम को बांधने की कोशिश हो, धोनी ने सदा चकित किया। लंबे बालों के साथ लंबे डग भरते महेंद्र सिंह धोनी ने कप्तानी की राह जितनी जल्दी से पकड़ी, उतनी ही तेजी से यह शख्स भारतीय क्रिकेट को बुलंदियों की ओर अग्रसर करता रहा। क्रिकेट इतिहास के अपने पन्नों पर धोनी ने भले ही साल के अंत के साथ, टेस्ट मैचों को अलविदा कहा, लेकिन यह शैली वन-डे व टी-ट्वेंटी की अपनी धाक को बरकरार रखना चाहेगी। टेस्ट मैचों की थकान से बाहर धोनी की वचनबद्धता वर्ल्ड कप को देख रही है, लेकिन इससे पहले वह अपनी विरासत विराट कोहली को सौंप रहे हैं। विराट कोहली की क्षमता में धोनी की नम्रता का समावेश आगामी टेस्ट मैचों का वास्तविक टेस्ट होगा, जबकि दूसरी ओर धोनी सुकून भरे संन्यास से उत्साहवर्द्धक वर्ल्ड कप को अपनी कितनी ऊर्जा दे पाते हैं, इसका इंतजार रहेगा।

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