नहीं मिला बजट, मजदूर मायूस

कोटबेजा —  मनरेगा योजना में चल रही पैसे की भारी किल्लत ने विकास खंड धर्मपुर में योजना के तहत स्वीकृत कार्यों पर पूर्ण विराम लग गया है। मनरेगा मजदूरों को न तो अब 15 दिन के अंदर मजदूरी का भुगतान हो रहा है व न ही ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीणों को इस योजना से रोजगार प्राप्त हो रहा है आलम यह है कि मनरेगा योजना के तहत स्वीकृत जिन कायर्ोें का एग्रीमेंट पंचायत प्रतिनिधियों ने करवाया है। उन कार्यों के लिए सिमेंट लेने के लिए भी पंचायतों को पैसा नहीं मिल रहा है। फलस्वरूप विकास खंड की तीन दर्जन पंचायतों में सैकड़ों कार्य पैसा न होने के कारण अधर में लटक गए हैं। मनरेगा योजना में समय पर पैसा न आने के कारण ग्रामीणों का सरकार के प्रति रोष बढ़ता जा रहा है। जानकारी के अनुसार पंचायतों में आयोजित होने वाली ग्राम सभाओं की बैठक में कोरम पूरा होने पर मनरेगा योजना का शैल्फ तैयार कर मंजूरी के  लिए जाता है। कार्यों की मंजूरी आने पर पंचायत कार्यों क ो शुरू करती है तथा 15-15 दिन के बाद मजदूरों का मस्टररोल निकाला जाता है, लेकिन अधिकतर पंचायतों में सैकडों कार्य का पहला मस्टररोल तो निकाल दिया है, लेकिन कार्य में लगने वाले मटिरियल के लिए पैसा न होने से विकास कार्य लटक गए हैं। इसके इलावा कई पंचायतों का पिछले एक साल से मैटीरियल का पैसा भी नहीं मिल पा रहा है। पैसा न होने से पंचायत प्रतिनिधि मंजूर कार्य का एग्रीमेंट नहीं करवा रहे हैं। मनरेगा योजना से स्वीकृत कार्य न होने से ग्रामीणों ने पंचायतों में होने वाली ग्राम सभाओं ने जाना बंद कर दिया है।  उधर, इस विषय में बीडीओ धर्मपुर मयंक नेगी ने बताया कि पैसा न आने से उक्त हालात पैदा हुए हैं। पैसा आने पर पंचायतों को दे दिया जाएगा।

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