केसीसी चेयरमैन के चुनाव को चुनौती

हमीरपुर— केसीसी बैंक के सिंघासन का तख्ता पलट करने के लिए एक बार फिर द्वंद शुरू हो गया है। केसीसी बैंक के चेयरमैन जगदीश सिंह सिपहिया के चुनाव को आरसीएस की अदालत में चुनौती दी गई है। भवारना जोन से जगदीश चंद सिपहिया से निदेशक पद का चुनाव हारने वाले रणजीत सिंह राणा ने याचिका दायर की है। उन्होंने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि जगदीश चंद सिपहिया को वर्ष 1997 में एक कर्मचारी को थप्पड़ मारने के आरोप में कोर्ट ने दोषी करार दिया था। इस पर उन्हें सीजेएम कोर्ट पालमपुर की अदालत ने सजा सुनाई थी। याचिका में कहा गया है कि जगदीश चंद सिपहिया ने नामांकन के दौरान इस तथ्य को छिपाया है। लिहाजा को-आपरेटिव सोसायटी के नियम 1971 की धारा 41 के तहत नामांकन में इसका उल्लेख करना जरूरी होता है। रणजीत सिंह राणा ने अपनी याचिका में कहा है कि सजा के तथ्य को छिपाने और नियमों के विरुद्ध चुनाव लड़ने के आरोप में जगदीश चंद सिपहिया का चुनाव रद्द किया जाए। इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए आरसीएस ने यह मामला डिप्टी आरसीएस को भेज दिया है। इस पर डिप्टी आरसीएस ने जगदीश चंद सिपहिया को नोटिस जारी करते हुए उन्हें नौ अप्रैल को इस पर जवाब दायर करने के लिए कहा है। इस मामले पर जगदीश चंद सिपहिया का कहना है कि वर्ष 1997 में एक कर्मचारी उनसे उलझ पड़ा था। उस दौरान उनकी धर्मपत्नी पंचायत प्रधान थीं। कर्मचारी बिना वजह प्रधान से मैं-मैं, तू-तू करने लग पड़ा और उसने धक्का मार दिया। पत्नी के साथ हो रहे इस दुर्व्यवहार पर उन्होंने कर्मचारी को लताड़ा था। इस पर सीजेएम कोर्ट पालमपुर ने उन्हें पहले सजा सुनाई थी और उसी दौरान बाइज्जत बरी कर दिया था। अगर अदालत से कोई व्यक्ति बाइज्जत बरी होता है तो उसी दौरान केस भी समाप्त हो जाता है। लिहाजा इसके उपरांत वह दो बार पंचायत प्रधान और एक बार बीडीसी मेंबर बन चुके हैं। इसके अलावा दो बार विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं। श्री सिपहिया ने कहा कि ऐसे मनगढ़ंत मामले उछालकर उनकी मानहानि की जा रही है। अलबत्ता वे किसी भी जांच को तैयार हैं।

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