तनाव कम करता है डांस

शिमला— हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी द्वारा आयोजित दो दिवसीय रंगमंच व्याख्यान एवं राज्य स्तरीय रंगकर्मी सम्मेलन के दूसरे दिन की व्याख्यान संगोष्ठी में ‘स्कूली स्तर पर नाट्य प्रशिक्षण क्या मान्य रखता है’ विषय पर चर्चा की गई। सम्मेलन में शामिल रंगकर्मी और साहित्यकारों ने माना कि आज के तनावपूर्ण जीवन में स्कूली स्तर पर थियेटर व नाट्य प्रशिक्षण देने से बच्चों के अंदर का तनाव कम होता है। सम्मेलन के प्रथम सत्र में पटियाला से आए रंगकर्मी डा. योगेश गंभीर ने ‘अनिवार्य विषय के रूप में स्कूली शिक्षा में रंगमंच प्रशिक्षण की प्रासंगिकता‘ विषय पर अपना व्याख्यान दिया। इस सत्र की अध्यक्षता प्रसिद्ध रंगकर्मी व साहित्यकार श्रीनिवास जोशी ने की। डा. योगेश गंभीर ने अपने व्याख्यान में कहा कि उनके नाटक प्रवेश के पीछे मनोहर सिंह की प्रेरणा रही है। उन्होंने कहा कि मानवीय सभ्यता की कहानी थियेटर से जुड़ी है। स्कूली स्तर पर नाट्य प्रशिक्षण शिविर के दौरान हुए अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने यह माना कि बच्चों में व्याप्त मानसिक तनाव का उन्मूलन काफी हद तक नाट्य प्रशिक्षण से संभव हुआ था। इसी आधार पर उनका कहना था कि यदि स्कूली स्तर पर रंगमंच प्रशिक्षण दिया जाए तो समाज में व्याप्त हिंसा, अपराध और दुर्व्यवहार की प्रवृत्ति समाप्त हो सकती है। हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी के सचिव अशोक हंस ने कहा कि डा. योगेश गंभीर हिमाचल अकादमी से जुड़े रहे हैं। सचिव अकादमी ने कहा कि रंगमंच के क्षेत्र में बहुत से बच्चों को प्रशिक्षित किया है। चर्चा परिचर्चा को आगे बढ़ाते हुए डा. देवेंद्र गुप्ता, प्रो. कमल शर्मा, सुदर्शन वशिष्ठ, अच्छर सिंह परमार, अजय शर्मा, डा. कैलाश आहलूवालिया, सीमा शर्मा, फरजाना सय्यद आदि रंगकर्मियों और विद्वानों ने कहा कि चहुंमुखी विकास के लिए स्कूली स्तर पर रंगमंच प्रशिक्षण आवश्यक है। अपने अध्यक्षीय भाषण में श्रीनिवास जोशी ने कहा कि थियेटर कल्पनाशक्ति, सृजनात्मकता और आत्मविश्वास को बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि आज के इस तनावपूर्ण युग में नाट्य प्रशिक्षण बहुत जरूरी है।

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