द्वितीय नवरात्र मां शैलपुत्री

नवरात्र पर्व के दूसरे दिन भगवती दुर्गा के दूसरे विग्रह मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाए हाथ में कमण्डल रहता है। इनकी उपासना से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। जीवन के कठिन संघर्षों में भी उसका मन कर्तव्य-पथ से विचलित नहीं होता। इस दिन योगीजन स्वाधिष्ठान ’चक्र में ध्यान केंद्रित करते हैं।

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