कुछ करने की हो ललक, साफ दिखती है मंजिल की झलक

नालागढ़ — औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में 48 डिग्री तापमान बेशक रहता हो और ऐसे गर्म मौसम में सेब की फसल उगी हो तो यह लोगों के लिए कोतूहल का विषय है। नालागढ़ उपमंडल की हटड़ा बेला में दो सगी बहनों ने सेब उगाकर यह करिश्मा कर दिखाया है। आज

May 10th, 2015 7:54 pm

newsनालागढ़  — औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में 48 डिग्री तापमान बेशक रहता हो और ऐसे गर्म मौसम में सेब की फसल उगी हो तो यह लोगों के लिए कोतूहल का विषय है। नालागढ़ उपमंडल की हटड़ा बेला में दो सगी बहनों ने सेब उगाकर यह करिश्मा कर दिखाया है। आज इन सेबों के पौधों और फलों को देखने के लिए स्थानीय लोग तो क्या पड़ोसी राज्यों के लोग भी यहां आकर सेब की पैदावार की जानकारी लेने में मशगूल हो गए है। इन दोनों बहनों ने यह अपनी मेहनत से कर दिखाया है और इन्हें प्रेरणा मिली अपने मायके से। मायके में इन्होंने अधिक तापमान में भी सेब की पैदावार देखी तो मन में ख्याल आया कि वह अपने घरों पर भी सेब की फसल उगा सकती है। शुरुआत 50 पौधों से की और चार साल बाद इसका फल मिलने लगा है, जो क्षेत्र के लोगों का आकर्षक का केंद्र बना हुआ है। जानकारी के अनुसार नालागढ़-स्वारघाट मार्ग पर महादेव पुल के समीप हटड़ा बेला गांव की दो सगी बहनों कमला देवी व विमला देवी ने सेब की फसल उगाकर क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इन दोनों महिलाओं ने गोल्डन प्रजाति के सेबों की फसल उगाई है। यही नहीं इन महिलाओं की उगाई फसलों को जिला सोलन में लगने वाले ऐतिहासिक शूलिनी मेले में लगने वाली प्रदर्शनी में खासतौर पर आमंत्रित किया जाता है।औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में अधिकतम तापमान 48 डिग्री तक पहुंच जाता है और ऐसे गर्म मौसम में सेब की फसल उगाने का ख्याल इन दोनों महिलाओं के ध्यान में आया है। कमला देवी ने कहा कि उनका मायका घुमारवीं में है और घुमारवीं के पनियाला में उन्होंने सेब की फसल उगी हुई देखी, जिस पर उनके मन में विचार किया और घुमारवीं जैसे गर्म क्षेत्र में सेब की फसल उग सकती है, तो नालागढ़ में भी यह फसल उग सकती है। इसी विचार के साथ उन्होंने करीब चार साल पहले 50 सेब के पौधे लाए और अपने खेतों में लगा दिए। अब इनमें सेब लग गए है, जिससे क्षेत्र के लोग इन्हें देखने के लिए रोजाना आ रहे है।  आज इन सेबों के पौधों और फलों को देखने के लिए स्थानीय लोग तो क्या पड़ोसी राज्यों के लोग भी यहां आकर सेब की पैदावार की जानकारी लेने में मशगूल हो गए है।

एक पौधे में 50 किलो सेब की फसल

कमला देवी ने कहा कि ऐसे मौसम में सेब कैसे उग रहा है, तो उनका कहना है कि यह पौध मौसम के अनुकूल तैयार की गई है और घुमारवीं में तैयार हो रही पौध विदेशों में भी जा रही है। कमला देवी ने कहा कि क्षेत्र के लोग उनसे सेब उगाने के बारे में पूछते है और नंगल और झजरा गांव के लोग उनसे सेबों के पौधे ले जा चुके है। कमला देवी ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी होती है, जब उनसे सेबों के बारे में पूछा जाता है। अभी तक सेब अपने लिए तैयार किए है, लेकिन एक-एक सेब के पौधे में कम से कम 50 किलो सेब हो रहा है।

लो चिलिंग वैरायटी से बढ़ी पैदावार

बागबानी विभाग के डिप्टी डायरेक्टर एमएल धीमान ने कहा कि लो चिलिंग वैरायटी से गर्म क्षेत्रों में सेब पैदा हो रहे है और यह पौधे मौसम के अनुकूल स्वतः ही चल पड़ते है। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्रों के लिए सेब की प्रजाति गोल्डन डोरसेट और अन्ना तैयार की गई है।

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