ड्रोपा स्टोंस

By: May 30th, 2015 12:15 am

ऐसा माना जाता है कि यह लगभग 12 हजार साल पुरानी हैं। इसके जरिए कुछ लोगों ने एक सभ्यता को स्थापित करने की कोशिश भी है। विभिन्न देशों में इन पत्थरों पर अलग-अलग तरह के प्रयोग भी हुए हैं…

आप ड्रोपा को एलियंस से भी जोड़ सकते हैं।  ये अपने आप में एक अजूबा ही हैं, पर सच्चाई यही है कि ड्रोपा कहे जाने वाले ये लोग चारफुट के इंसानों जैसे जीव थे जो किसी समय धरती पर आ कर इंसानों के बीच रहे थे। हालांकि ये कौन थे, इस बात का खुलासा अभी तक नहीं हो पाया है। सन 1938 में अचानक ही चीन की गुफाओं में मोटी धूल की परत के नीचे कुछ अजीब सी चीजें मिलीं। वे किस कार्य में प्रयोग की जाती रही होंगी इसका पता नहीं लगा। हालांकि जाहिर था कि जो कुछ भी सामने था उसकी तकनीक काफी एडवांस थी । ये सैकड़ों की संख्या में मिली हुई डिस्क थीं, जिनका व्यास लगभग 9 इंच का था हर डिस्क के बीच में समान आकार का छेद था और देखने में ये फोनोग्राफ की तरह दिखती थीं। इन पर हीयरोग्लाफिक भाषा में कुछ लिखा हुआ था। जांच करने पर पता लगा कि ये दस से बारह हजार साल पुराने फोनोग्राफ के रिकार्ड थे। इन पर स्पेसशिप और उनके पायलट्स के बारे में लिखा गया था। गौरतलब है कि स्पेसशिप के ये पायलट खुद को ड्रोपा कहते थे। ये रहस्यमय डिस्क मिलने के बाद भी ये 20 साल तक ऐसे ही पड़ी रहीं। इनपर लिखी गई लिपि इतने छोटे अक्षरों में थी कि इन्हें मैग्नीफाइंग ग्लास से ही पढ़ा जा सकता था। इसके विपरीत स्थानीय लोगों की मानें तो वे पुरानी पीढि़यों से चली आई कहानी बताते हैं कि यहां कोई स्पेसक्रॉफ्ट क्रैश हो गया था। ड्रोपा लोगों ने उसे ठीक करने की काफी कोशिश की पर ठीक नहीं कर पाए और फिर इसे यहीं छोड़ कर चले गए। इसी के साथ एक और कहानी भी चली आ रही है कि ड्रोपा बादलों से उतरे और स्थानीय लोगों ने उन्हें मार डाला, पर उन्हीं में कुछ बच भी गए  आागे चल कर वे स्थानीय लोगों में घुल मिल गए। तब उन्होंने बताया कि वे सिरस नामक नक्षत्र समूह से आए थे। फिलहाल ये डिस्क तीन हजार ईसापूर्व की आंकी गई हैं। ड्रोपा स्टोंज के बारे में कुछ भी निश्चिततापूर्वक नहीं कहा और इससे जो भी कहानियां जुड़ी है,उनकों वैज्ञानिक रूप से कभी भी साबित नहीं किया जा सका है और इसी कारण इससे जुड़े रहस्यमयता भी बढ़ती गई है।  जितनी मुंह उतनी बातें। ऐसा माना जाता है कि यह लगभग 12 हजार साल पुरानी हैं। इसके जरिए कुछ लोगों ने एक सभ्यता को स्थापित करने की कोशिश भी है। विभिन्न देशों में इन पत्थरों पर अलग-अलग तरह के प्रयोग भी हुए हैं, लेकिन इनके निष्कर्षाें में भारी भिन्नता देखने को मिलती है। इन सब खोजों के बावजूद ड्रोपा स्टोंस पृत्वी के परे प्राणियों के अस्तित्व में विश्वास रखने वाले वैज्ञानिकों और रहस्यवादियें को अपनी तरफ आकर्षित करते रहते हैं। जब कभी उड़नतश्तरी देखी जाती है अथवा एलियंज की चर्चा होती है अथवा किसी भी ब्रह्माडीय हरकत का जिक्र होता है तो उसके साथ ड्रोपा स्टोंस भी चर्चा में आ जाते हैं। वैज्ञानिक प्रगति के साथ अन्य ग्रहों पर प्राणियों की खोज का प्रयास भी गति पकड़ रहा है। इसके बारे में छोटे-मोटे सुराग भी मिल रहे हैं इन सुरागों के साथ ही मनुष्य की कल्पना भी विस्तृत हो रही है, नए-नए क्षितिजों की कल्पना की जा रही है। और अन्य ग्रहों पर मनुष्यों अथवा प्राणियों के अस्तित्व की बात तो एक आदिम मान्यता है, इसलिए विज्ञान इस विषय को लेकर चाहे जो कहे, ड्रोप स्टोंस आने वाले दशकों में लोगों को आकर्षित करते रहेंग।

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