प्रदेश में भी पुत्रजीवक बीज के चाहवान

शिमला— योग गुरु बाबा रामदेव के हिमाचल में मौजूद पतंजलि योग पीठ सेवा केंद्रों में भी पुत्रजीवक बीज उपलब्ध है। पुत्रजीवक बीज को लेकर देश में नया विवाद खड़ा हुआ है, मगर यह विवाद आखिर क्यों है। पतंजलि का कहना है कि इन बीजों का नाम पुत्रजीवक बीज जरूर है, मगर इनका उपयोग पुत्र प्राप्ति के लिए नहीं, बल्कि बांझपन दूर करने के लिए किया जाता  है। हिमाचल प्रदेश में इस तरह के रोगी यहां ये पुत्रजीवक बीज खरीदते हैं। गांव-गांव तक पतंजलि के ये सेवा केंद्र मौजूद हैं, जहां पर पुत्रजीवक बीज उपलब्ध हैं। 30 रुपए प्रति पैकेट की दर से यह पुत्रजीवक बीज मिलते हैं और इन्हें वही लोग इस्तेमाल कर सकते हैं, जो बांझपन का शिकार हो या वे महिलाएं जिनका बार-बार गर्भपात होता हो। इन बीजों का हिंदी नाम पुत्रजीवक बीज है, जबकि बॉटनीकल इसका नाम पुत्रजीवा रॉक्सबर्घी है। पतंजलि का कहना है कि हजारों साल से इन बीजों का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रदेश में इन बीजों की हालांकि अधिक बिक्री नहीं है, परंतु पतंजलि ने इन्हें अपने सभी सेवा केंद्रों में अन्य दवाओं के साथ उपलब्ध करवाया है। इसके बारे में लोगों को भी यहां पर अधिक जानकारी नहीं है, जिस कारण भी इनकी बिक्री ज्यादा नहीं। ऐसे में अब जबकि  इसके नाम को लेकर विवाद खड़ा हुआ है तो लोग भी इसके बारे में जानने लगे हैं, मगर नाम और इसके काम को लेकर लोगों में असमंजस है, जिसे लेकर विवाद भी खड़ा हुआ है। हिमाचल में बाबा रामदेव के उत्पादों  की डिमांड काफी ज्यादा रहती है, जिनकी करोड़ों रुपए की बिक्री यहां पर होती है।

औषधि पर बेवजह खड़ा किया विवाद

पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट के हिमाचल पदाधिकारी लक्ष्मी दत्त शर्मा ने कहा कि बेवजह से विवाद खड़ा किया जा रहा है। पुत्रजीवक बीज के पैकेट पर कहीं भी यह नहीं लिखा है कि इससे पुत्र प्राप्ति होती है। यह बीज बंधत्व व स्त्री विकारों में लाभप्रद है और उसी के लिए बिकता है।

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