बेल्हा देवी

By: May 30th, 2015 12:16 am

सिद्धपीठ के रूप में विख्यात मां बेल्हा देवी धाम की स्थापना को लेकर तरह-तरह के मत हैं। वन गमन के समय भगवान श्रीराम सई नदी के तट पर रुके थे और उसके बाद आगे बढ़े। राम चरित मानस में भी गोस्वामी तुलसीदास ने इसका उल्लेख किया है। मान्यता है कि बेल्हा की अधिष्ठात्री देवी के मंदिर की स्थापना भगवान राम ने की थी और यहां पर उनके अनुज भरत ने रात्रि विश्राम किया था…

AasthaAasthaउत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय के प्राचीन शहर बेल्हा में बेल्हा देवी मंदिर स्थित है। अवध क्षेत्र के अंतर्गत पूर्वांचल का प्रख्यात सिद्धपीठ मां बेल्हा देवी मंदिर वैदिक नदी सई के पावन तट पर अवस्थित है। इतिहास-इस धाम को लेकर कई किंवदंतियां हैं। एक धार्मिक किंवदंती यह है कि राम वनगमन मार्ग के किनारे सई नदी को त्रेता युग में भगवान राम ने पिता की आज्ञा मानकर वन जाते समय पार किया था। यहां उन्होंने आदिशक्ति का पूजन कर अपने संकल्प को पूरा करने के लिए शपथ ली थी। दूसरी मान्यता यह है कि चित्रकूट से अयोध्या लौटते समय भरत ने यहां रुककर पूजन किया और तभी से यह स्थान अस्तित्व में आया। यह भी मान्यता है कि जब सती अपने पिता के यज्ञ में बिना बुलाए पहुंच गई थी, तो वहां पर अपने पिता द्वारा किया गया अपमान सहन न कर सकी। अपने पति भगवान शंकर के अपमान से क्षुब्ध होकर जाते समय माता गौरी के कमर बेल का कुछ भाग सई नदी के किनारे गिरा था, जिस से जोड़कर इसे बेला कहा जाता है।

रामायण में उल्लेख- सिद्धपीठ के रूप में विख्यात मां बेल्हा देवी धाम की स्थापना को लेकर तरह-तरह के मत हैं। वन गमन के समय भगवान श्रीराम सई नदी के तट पर रुके थे और उसके बाद आगे बढ़े। राम चरित मानस में भी गोस्वामी तुलसीदास ने इसका उल्लेख किया है। मान्यता है कि बेल्हा की अधिष्ठात्री देवी के मंदिर की स्थापना भगवान राम ने की थी और यहां पर उनके अनुज भरत ने रात्रि विश्राम किया था। इसे दर्शाने वाला एक पत्थर भी इस धाम में था। इसी प्रकार कई अन्य जनश्रुतियां हैं। पुरातत्वविदों का मत-इतिहास के पन्ने कुछ और कहते हैं। एक तथ्य यह भी आता है कि चौहान वंश के राजा पृथ्वीराज चौहान की बेटी बेला थी। उसका विवाह इसी क्षेत्र के ब्रह्मा नामक युवक से हुआ था। बेला के गौने के पहले ही ब्रह्मा की मृत्यु हो गई तो बेला ने सई नदी के किनारे खुद को सती कर लिया। इसलिए इसे सती स्थल और शक्तिपीठ के तौर पर भी माना जाता है। वास्तु के नजरिए से मंदिर उत्तर मध्यकाल का प्रतीत होता है। पुरातात्विक आधार पर भले ही इन तथ्यों के प्रमाण नहीं मिलते हैं लेकिन आस्था के धरातल पर उतरकर देखें तो मां बेल्हा क्षेत्रवासियों के हृदय में सांस की तरह बसी हुई हैं। मंदिर से जुड़े पुरावशेष न मिलने के कारण इसका पुरातात्विक निर्धारण अभी नहीं हो सका। बहरहाल पुरातत्व विभाग का प्रयास जारी है। मेला एवं मुंडन संस्कार-शुक्रवार और सोमवार को यहां मेला लगता है, जिसमें जनपद ही नहीं बल्कि आसपास के कई जिलों के लोग पहुंचकर मां का दर्शन पूजन करते हैं। हजारों श्रद्धालु दर्शन को आते हैं, रोट चढ़ाते हैं, बच्चों का मुंडन कराते हैं और निशान भी चढ़ाते हैं। बेला मंदिर बाद में जन भाषा में बेल्हा हो गया और इस शहर का नाम भी बेल्हा पड़ गया।

Himachal List

Free Classified Advertisements

Property

Land
Buy Land | Sell Land

House | Apartment
Buy / Rent | Sell / Rent

Shop | Office | Factory
Buy / Rent | Sell / Rent

Vehicles

Car | SUV
Buy | Sell

Truck | Bus
Buy | Sell

Two Wheeler
Buy | Sell

Polls

क्या सड़कों को लेकर केंद्र हिमाचल से भेदभाव कर रहा है ?

View Results

Loading ... Loading ...

Miss Himachal Himachal ki Awaz Dance Himachal Dance Mr. Himachal Epaper Mrs. Himachal Competition Review Astha Divya Himachal TV