रंग लाई मुग्धा की मेहनत

utsavutsavरोजाना दस घंटे की पढ़ाई ने एक सामान्य लड़की को सीबीएसई के जमा दो में शिखर पर पहुंचा दिया। कुछ कर गुजरने के सपने देखने वाली मुग्धा अरोड़ा की मेहनत ही थी कि वह प्रदेश भर में टॉप पर आई। माता-पिता को आदर्श मानने वाली मुग्धा ने कुछ करने की ठानी और रोजाना पढ़ने के लिए निर्धारित इन्हीं 10 घंटों का कमाल है कि वह आज कामयाबी के शिखर पर है। सीबीएसई की बारहवीं की परीक्षा में 97.6 प्रतिशत अंक लेकर प्रदेश में संभावित अव्वल रही पांवटा साहिब के ‘द स्कॉलर्स होम स्कूल’ की मुग्धा अरोड़ा कम्प्यूटर इंजीनियर बनना चाहती है। मुग्धा का कहना है कि वह अपने लक्ष्य की और बढ़ रही है तथा उसे हासिल करके रहेगी। ‘दिव्य हिमाचल’ के साथ बातचीत मे मुग्धा ने कहा कि उसने बोर्ड़ की परीक्षा के लिए कोई विशेष तैयारी नही की। बल्कि रूटीन की तरह 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती रही और परिणाम आशा के अनुरूप सामने आए हैं। इससे पहले मुग्धा ने जेईई मेन्स की परीक्षा मे भी 234 अंक लिए है जो प्रदेश मे कहीं रैंक में हो सकते हैं। मुग्धा के पिता राजकुमार अरोड़ा एक मेकेनिकल इंजीनियर हैं तथा पांवटा साहिब में ही एक निजी कंपनी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मुग्धा की मां अंजु अरोड़ा निजी स्कूल मे बतौर प्रधानाचार्या कार्यरत हैं। मुग्धा की मां अंजु अरोड़ा ने बताया कि उन्होंने कभी भी अपने बच्चे को पढ़ाई के लिए फोर्स नहीं किया। पढ़ाई करना उसका अपना निर्णय है तथा हम लोगों ने उसे सिर्फ  सपोर्ट किया है। वह अपनी लगन व अध्यापकों के मोटिवेशन से आज यहां पंहुची है। मुग्धा की एक बड़ी बहन है जो एमबीए कर बंगलूर में जॉब करती हैं। मुग्धा ने बताया कि यदि किसी का लक्ष्य स्पष्ट हो तथा लगन पक्की हो तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। इस संसार मे कठिन कुछ भी नहीं है। बस कड़ी मेहनत करने का इरादा होना चाहिए। हालांकि मुग्धा अपनी सफलता का श्रेय अपने स्कूल के अध्यापकों को देती है। वह कहती है कि स्कूल का माहौल और अध्यापकों की मेहनत से उसने यह मुकाम हासिल किया है।

छोटी सी मुलाकात

मुग्धा ने कब अपने लिए यह लक्ष्य तय किया?

मैंने अपने लिए कोई लक्ष्य तय नहीं किया मुझे पढ़ाई का परिणाम अपने आप मिल गया।

आपका असली मुकाम?

अभी किसी अच्छे रेपुटेड कालेज से बी.टेक करूंगी। उससे आगे फिलहाल नही सोचा है। वैसे कम्प्यूटर इंजीनियर बनना चाहती हूं।

आपका असली आइकॉन?

कोई विशेष नहीं। परंतु वह हर इनसान जो अपने काम को गंभीरता व पूरी लगन के साथ करता है।

इस सफलता के लिए आपका सबसे बड़ा मंत्र और प्ररेणा स्रोत?

स्टडी को जरूरी काम में मत लो इसे एंज्वाय करो। आप पढ़ाई को खेल की तरह लोगे तो सब आसान हो जाएगा। मेरी प्रेरणा स्रोत मेरी मां है।

पढ़ाई के अलावा मुग्धा का सबसे रोचक विषय?

एंकरिंग, लोगों से बातचीत करना और इवेंट मैनेज करना मुझे बहुत पंसद है।

इतिहास  के किस नायक से प्रभावित या  पाठ्यक्रम से बाहर कोई किताब जो  मार्ग दर्शन करती है?

‘वा टरीलॉजी बाई अमीष त्रिपाठी’। यह किताब मुझको सिखाती है कि लोगों की भिन्नता को स्वीकार करो। कोई भी अच्छा या बुरा नहीं होता। लोग सिर्फ  भिन्न होते हैं।

इस सफलता के मायने तथा यहां तक पहुंचने के लिए तीन प्रमुख सिद्धांत?

ऐसा कुछ भी नहीं जो हासिल न किया जा सके। सही दिशा में कड़ी मेहनत करने से हमेशा इच्छुक परिणाम सामने आते हैं। मुग्धा के तीन सिद्धांतों में अवधारणा को समझने के लिए ध्यान को केंद्रित करना, कमजोर पक्षों की पहचान करना व उसमें ऐच्छिक सुधार करना तथा अंधविश्वास से दूर रहने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए।

अपने जूनियर को अगर प्रेरित करना हो तो क्या संदेश देंगी?

आज कड़ी मेहनत करो कल कभी नहीं आता। एकाग्र मन से पढ़ाई पर ध्यान दो तथा ध्यान बांटने वाली चीजों जैसे टीवी और मोबाइल फोन से दूर रहो।

अंको के पहाड़ पर चढ़ने वाली मुग्धा को कभी तनाव होता है। इससे मुक्त कैसे होती हैं?

क्यों नहीं। ऐसे क्षणों में मैं अपने माता-पिता और अध्यापकों से बातचीत कर सही राय लेती हूं।

मां-बाप और समाज के लिए बेटियों की सबसे बड़ी ताकत?

एक शिक्षित बेटी समाज को शिक्षित व सुदृढ़ करती है।

गर्व के इन क्षणों का किस तरह आनंद ले रही हैं और भविष्य में क्या ऐसी परीक्षा फिर लौटेगी?

यह केवल शुरुआत है। जिंदगी में बहुत कुछ करना बाकी है। जिंदगी की हर परीक्षा के लिए साहस और आत्मबल मिला है।

क्या जीवन ऐसी सफलता के बाद आसान हो गया या खुद से चुनौती बढ़ गई?

जीवन हमेशा से आसान रहा। चुनौतियां तो आती जाती रहती हैं। सफलता व असफलता केवल जिंदगी के क्षणिक पड़ाव हैं।

आपके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी ताकत?

तनाव व दबाव में काम करने की योग्यता और मुश्किलों का सामना कर आगे बढ़ने के गुण।

आपका सबसे बड़ा दोस्त?

मेरा परिवार दिनेश पुंडीर, पांवटा साहिब

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