रघुनाथ जी की प्रतिष्ठा 350 साल बाद

कुल्लू —  सदियों पहले अयोध्या के त्रेतानाथ मंदिर से कुल्लू लाए गए अधिष्ठाता रघुनाथ जी के मंदिर की करीब साढ़े तीन सौ साल बाद पुन: प्रतिष्ठा होने जा रही है। यानी यहां इतिहास स्वयं को दोहराता नजर आएगा। रघुनाथ की नगरी में करीब हफ्ता भर चलने वाले धार्मिक अनुष्ठान का शुक्रवार से आगाज होगा। पूर्व रियासत कुल्लू पर1637 से 1672 तक हुकूमत करने वाले तत्कालीन राजा जगत सिंह के शासनकाल में भगवान रघुनाथ जी, सीता माता और हनुमान की अष्टधातु से निर्मित बेशकीमती प्रतिमाओं को सैकड़ों मील दूर अवध से लाकर यहां पर प्रतिष्ठा की गई थी। पिछले साल सुल्तानपुर स्थित रघुनाथ जी के मंदिर में चोरी की सनसनीखेज वारदात ने देव समाज को भीतर तक झकझोर कर रख दिया था। हालांकि करीब चार माह बाद चोरी की घटना का पटाक्षेप होते ही रघुनाथ जी वापस कुल्लू लौट आए। एक पहलू यह भी है कि रघुनाथ जी की प्रतिमा चुराने वाले नेपाली मूल के शातिर चोर नर बहादुर के देश में प्रलयकारी भूकंप ने वहां पर सब कुछ तहस-नहस करके रख दिया है। इसे देव कोप के साथ भी जोड़कर देखा जा रहा है। उधर, चोरी की घटना के बाद अब रघुनाथ जी के आदेशानुसार देव रीति अनुसार मंदिर की पुन: प्रतिष्ठा की जा रही है। खास बात यह है कि चोरी की घटना से सबक लेते हुए सुल्तानपुर स्थित देवालय में इस बार सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। मंदिर का मजबूत सुरक्षा चक्र संतुष्ट करने वाला है। अत्याधुनिक क्लोज सर्किट कैमरे भी देवालय में होने वाली हरेक गतिविधि पर पैनी नजर रखेंगे। मंदिर के प्रतिष्ठा समारोह को लेकर देवलुओं में खासी जिज्ञासा देखने को मिल रही है। रघुनाथ जी के प्रथम सेवक छड़ीबरदार महेश्वर सिंह तथा कारदार दानवेंद्र सिंह समेत राजपरिवार के सभी सदस्य पिछले कई दिनों से मंदिर की प्रतिष्ठा समारोह की तैयारियों में जुटे हुए हैं। देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोत्तराम ठाकुर के मुताबिक रघुनाथ जी मंदिर के प्रतिष्ठा समारोह को लेकर देव समाज के लोग खासा उत्साहित हैं। इतिहास को दोहराते देखना वाकई में अचंभित कर देने वाली घटना रहेगी।

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