सम्मान से बदल जाती है सभी की सोच

utsavकंगना रणौत इंडस्ट्री की उन हीरोइनों में से एक हैं, जिन्होंने अपने अभिनय के क्राफ्ट को लगातार नई ऊंचाई दी है। इस बार ‘क्वीन’ जैसी हिट फिल्म में नेशनल अवार्ड हासिल करने के बाद उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह अपने कंधों पर फिल्म का भार उठा सकती हैं। इन दिनों वह चर्चा में हैं ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स’ से। इस खास मुलाकात में उन्होंने हमसे कई मुद्दों पर बातचीत की….

सुना है आपने ‘तनु वेड्स मनु’ के लिए ‘डर्टी पिक्चर’ छोड़ दी थी। आनंद राय में ऐसा क्या खास नजर आया?

‘तनु वेड्स मनु’की पहली स्क्रिप्ट भी मुझे बेहतरीन लगी थी। स्क्रिप्ट इतनी फनी थी की किरदारों का नैरेशन सुनते वक्त हंस-हंस कर मेरा पेट दुख गया था। ‘डर्टी पिक्चर ’ की स्क्रिप्ट भी काफी अच्छी लगी थी, लेकिन कहीं न कहीं वह फिल्म मुझे अपनी पिछली फिल्मों फैशन, और वो लम्ह से काफी सिमिलर लगी थी। मुझे लगा कि ‘तनु वेड्स मनु’ में मुझे कुछ नया करने का मौका मिलेगा, इसलिए मैंने ‘डर्टी पिक्चर’ छोड़ दी।

‘क्वीन’ के बाद ‘तनु वेड्स मनु’ भी शादी जैसे विषय पर ही आधारित है। शादी को लेकर आपकी क्या राय है।

मुझे लगता है शादी के लिए अभी मैं काफी छोटी हूं। मै महज 28 साल की हूं। मेरी फैमिली काफी परंपरागत है, बावजूद इसके वे समझते हैं कि जिस फील्ड में मैं हूं, वहां 10 साल संघर्ष करने के बाद यह मुकाम हासिल किया है मैंने। कुछ साल और मेहनत करके इसे मजबूत कर लूं फिर उसके बाद मैं आराम से अपनी शादी कर सकती हूं। शादी को लेकर मेरी राय काफी सकारात्मक है, लेकिन ऐसा भी जरूरी नहीं कि हर किसी को शादी करनी चाहिए, बच्चे पैदा करने ही चाहिए। यह तो वही बात हो गई कि हम कहें, सभी को इंजीनियर या डाक्टर बनना चाहिए। शादी के लिए मानसिक तैयारी बहुत जरूरी है वरना यह बोझ बन जाती है।

नेशनल अवार्ड पाकर कैसा महसूस कर रही हैं?

मेरे ख्याल से 10 सालों का जो संघर्ष था उसके बाद इसका मिलना एक अलग सी संतुष्टि का एहसास है। मुझे इससे पहले भी नेशनल अवार्ड फैशन के लिए बेस्ट सपोर्टिंग मिला था, लेकिन शायद उस वक्त मैं उसे इतना इंजॉय नहीं कर पाई थी और उस समय मुझे अवार्ड की अहमियत भी पता नहीं थी। अब मैं जान गई हूं कि पूरे देश में राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना कितनी बड़ी बात है।

आपके परिवार ने अभिनय के फैसले के कारण आपसे नाता तोड़ लिया था, मगर अब पुरस्कार पाने के बाद उनका रिएक्शन क्या था?

मेरे ख्याल से यह नेशनल अवार्ड मेरे परिवार के लिए ज्यादा अहमियत रखता है। मेरा फैमिली बैकग्राउंड थोड़ा पोलिटिकल है। मेरे ग्रेट ग्रैंड फादर सरजू सिंह रनौत 15 साल तक हिमाचल प्रदेश के मिनिस्टर रह चुके हैं। पापा को बहुत अच्छा लगा कि हम राष्ट्रपति भवन में गए और उनके हाथों अवार्ड मिला। उनका चेहरा चमक रहा था। उन्होंने बहुत गर्वित महसूस किया।

अब कभी आपके पेरेंट्स ने कहा कि बेटा हम शुरू में गलत और तुम सही थी?

इस बारे में मेरी परिवार के साथ कभी फोर्मल बात तो नहीं हुई है। उन्होंने कभी यह खुले तौर पर स्वीकार तो नहीं किया, लेकिन जैसे होता है न धारणाएं बदल जाती हैं। लोगों से मैंने सुना है कि मेरे पेरेंट्स जिन चीजों के खिलाफ  रहते थे, आज सबके सामने उन्हीं चीजों की वकालत कर रहे हैं। आज वे लोगों को सलाह दे रहे हैं कि आपको अपने बच्चों को उनकी इच्छानुसार आगे बढ़ने देना चाहिए। जब मैं उन्हें ऐसा करते देखती हूं तो लगता है कि जैसे वे मेरे नहीं किसी और के पेरेंट्स हों। मैंने बचपन से लेकर बड़े होने तक देखा कि मेरे फादर में बच्चों की सोच या इच्छा को ज्यादा रिस्पेक्ट नहीं रही। वह हमेशा बच्चों की हर बात नकार दिया करते थे। अकसर हमें डांट डपट कर चुप करा देते थे कि तुम्हें क्या पता। लेकिन अब मुझे ही नहीं, मेरे भाई- बहनों को भी आजादी देते हैं कि वे अपने जिंदगी के फैसले खुद लें।

फिलहाल आप सिंगल हैं?

मैं ज्यादातर अपनी रिलेशनशिप के बारे में बातें नहीं करती। मैं कुछ सालों तक रिलेशनशिप में थी, लेकिन वह ज्यादा नहीं चली और हां अब मै सिंगल हूं। रिलेशनशिप में होने का अपना एक अलग एक्साइटमेंट होता है। जब आप किसी से प्यार में होते हैं तो उसका एक अलग मजा होता है। सिंगल रहने का भी एक अलग ही आनंद है। यह एक्साइटमेंट तो बनी ही रहती है कि अब मेरी जिंदगी में कौन आएगा वो कैसा होगा।

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