सेवा से सम्मान हासिल करतीं राम दुलारी पऱ्र्पेप्रे

By: May 17th, 2015 12:12 am

यह कामयाबी व पहचान उन्हें उनके सेवाभाव ने दिलाई है। 1977 में करियर बतौर नर्सिंग स्टूडेंट शुरुआत करने वाली राम दुलारी ने वर्ष 1981 में  स्टाफ नर्स आईजीएमसी में ज्वाइन किया। 9 साल तक बतौर स्टाफ नर्स अपनी सेवाएं आईजीएमसी में दीं। उसके बाद 2008 तक बतौर वार्ड सिस्टर काम किया। वर्तमान में राम दुलारी बतौर नर्सिंग अधीक्षक अपनी सेवाएं दे रही हैं…

किन्नौर के रिब्बा में वर्ष 1960 में जन्मी राम दुलारी नेगी आज प्रदेश में ही नहीं पूरे देश में अपनी विशेष पहचान बनाने में कामयाब रही हैं। यह कामयाबी व पहचान उन्हें उनके सेवाभाव ने दिलाई है। 1977 में करियर बतौर नर्सिंग स्टूडेंट शुरुआत करने वाली राम दुलारी ने वर्ष 1981 में  स्टाफ नर्स आईजीएमसी में ज्वाइन किया। नौ साल तक बतौर स्टाफ नर्स अपनी सेवाएं आईजीएमसी में दीं। उसके बाद 2008 तक बतौर वार्ड सिस्टर काम किया। वर्तमान में राम दुलारी बतौर नर्सिंग अधीक्षक अपनी सेवाएं दे रही है। नर्सिंग के इस सफर के दौरान उन्हें व्यावसायिक और पारिवारिक जीवन में तालमेल बिठाने में कई बार मुश्किलें भी आईं। कारण घर पर दो छोटे बच्चे भी थे, लेकिन इन मुश्किलों से पार पाने में दुलारी के पति सुंदर नेगी ने उनका पूरा सहयोग दिया। आईजीएमसी में बतौर नर्सिंग अधीक्षक सेवाएं दे रहीं रामदुलारी नेगी को हाल ही में नर्सिंग के प्रतिष्ठित अवार्ड नेशनल फ्लोरेंस नाइटिंगेल 2015 अवार्ड से नवाजा गया है। राम दुलारी ने 12 मई को न्यू दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में यह सम्मान प्राप्त किया। सेवा के इस क्षेत्र में उनकी यह उपलब्धि प्रदेश के लिए बड़े गौरव की बात है।

छोटी सी मुलाकात

आपको नर्सिंग क्षेत्र का सर्वोच्च सम्मान मिला कैसा महसूस हुआ?

मैं बेहद खुश हूं। जब मुझे इस सम्मान को पाने की सूचना मिली थी, तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा था। राष्ट्रपति से सम्मान पाना किसी के लिए भी उसके जीवन का सबसे सुखद क्षण होता है।

जब आप ने नर्सिंग को बतौर करियर चुना तो क्या कभी सम्मान के बारे में सोचा?

मैंने कभी भी यह नहीं सोचा था कि मुझे यह प्रतिष्ठित सम्मान पाने का मौका मिलेगा। यह भी सच है कि मैंने कभी भी सम्मान पाने की इच्छा से काम नहीं किया बल्कि नर्सिंग को मैंने अपने जीवन का कर्त्तव्य माना है।

 नर्सिंग को आप किस तरह देखती हैं?

नर्सिंग मेरी नजर में केवल एक व्यवसाय नहीं है बल्कि मानव जीवन की सेवा का सबसे बेहतरीन माध्यम है।

 नर्सिंग के क्षेत्र में आपका सफर?

मैंने 1977 में बतौर नर्सिंग स्टूडेंट शुरुआत की और वर्ष 1981 में बतौर स्टाफ नर्स आईजीएमसी में ज्वाइन किया। 9 साल तक बतौर स्टाफ नर्स अपनी सेवाएं आईजीएमसी में दीं। उसके बाद 2008 तक बतौर वार्ड सिस्टर अपनी सेवाएं दीं। उसके बाद मैटर्न और वर्तमान में बतौर नर्सिंग अधीक्षक अपनी सेवाएं दे रही हूं।

 नर्सिंग में आने की प्रेरणा?

मैं स्कूल की छुट्टियों में अपने मामा की बेटी के पास किन्नौर से शिमला आती थी। वह आईजीएमसी में नर्स थीं। वह मेरे लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बनी क्योंकि मैं उन्हें हमेशा ही मरीजों की सेवा के लिए तत्पर देखती थी। उन्हें देखकर मुझे लगता था कि लोगों की सेवा करने का यह सबसे अच्छा तरीका है।

  आपको यहां तक पहुंचाने में आपकी मेहनत के अलावा किसका सहयोग मिला?

मुझे यहां तक पहुंचाने में अस्पताल के मेरे वरिष्ठ और कनिष्ठ सहयोगियों का सबसे बड़ा योगदान है। वरिष्ठों ने जहां समय-समय पर मेरा मार्गदर्शन किया, तो वहीं कनिष्ठोें ने मेरे काम को आगे बढ़ाया।

 अस्पताल में बतौर नर्स और घर में एक मां कैसे मैनेज करती हैं?

जब बच्चे छोटे थे तो थोड़ी समस्या आती थी, लेकिन मेरे पति सुंदर नेगी ने घर को संभालने में हमेशा मेरा सहयोग दिया।

क्या आपको कभी लगा कि आपका काम आपकी जिम्मेदारियों को निभाने के आड़े आ रहा है?

जी हां कभी-कभी। जब मुझे बच्चों के साथ कहीं जाना होता था, लेकिन अस्पताल में काम की अधिकता के कारण मैं नहीं जा पाती थी, लेकिन मरीजों की सेवा से मिलने वाली संतुष्टि इस परेशानी से ज्यादा बड़ी होती है।

 अपने परिवार के बारे में बताइए?

मेरे पति सुंदर नेगी बैंकिंग क्षेत्र से हाल ही में सेवानिवृत्त हुए हैं। मेरे दो बच्चे हैं अखिलेश और अमितेश। अखिलेश कैट टॉपर रह चुका है और वर्तमान में आस्ट्रेलिया में एक मेडिकल कंपनी में कार्यरत है। अमितेश ने हाल ही में इंदौर से एमबीए किया है।

 नर्सिंग करने वाली युवा पीढ़ी के लिए कोई संदेश?

बस यही कहना चाहूंगी कि नर्सिंग को केवल मात्र व्यवसाय न समझें बल्कि इसे मानवता की सेवा का सबसे बेहतरीन माध्यम मानें।

हिमाचल में नर्सिंग में क्या सुधार किया जा सके?

नर्सिंग अपने आप में सेवा है, लेकिन कई बार काम भी अधिकता आज कल की युवा पीढ़ी को चिड़चिड़ा बना देती है। नर्सिंग में स्टाफ की कमी है। इसके कारण काम अधिक रहता है। इसलिए नर्सिंग स्टाफ की कमी को दूर करने की जरूरत है।

आप अपने को कब सम्मानित महसूस करती हैं?

जब मेरे वरिष्ठ मेरे काम की सराहना करते हैं तो मुझे काफी अच्छा लगता है।

अपको अपने ऊपर कब गर्व होता है?

हमेशा! जब भी किसी जरूरतमंद की सहायता कर पाती हूं। ऐसा कई बार होता है। जब दूरदराज के क्षेत्रों में मरीज यहां आते हैं। उनकी यहां जान-पहचान कम होती है। ऐसे में अकसर वे परेशान हो जाते हैं। जब भी मैं ऐसे लोगों के संपर्क में आती हूं  उनकी पूरी मदद करने का प्रयास करती हूं।

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