‘स्‍मार्ट’ परेशानी

ऐसा नहीं है कि इस उपकरण के केवल फायदे ही फायदे हैं। नए शोध बताते हैं कि स्मार्टफोन मानव व्यवहार में नई तरह की समस्याओं को जोड़ रहा है। लोगों का स्मार्टफोन के साथ हर पल का जुड़ाव कई समस्याएं भी पैदा कर रहा है। यह समस्याएं मनोवैज्ञानिक हैं और इनका विस्तार बैटरी खत्म होने से लेकर स्टेटस अपलोड करने तक फैला हुआ है…

utsavस्मार्टफोन जीवन का अभिन्न हिस्सा बनते जा रहे हैं। यदि आप अपने साथ स्मार्ट फोन लेकर चल रहे हैं तो यह आपका समाज और आपके रिश्ते भी आपके साथ चल रहे होते हैं। रिश्तों के तानेबाने में क्या और कितना परिर्वन हो रहा है, उससे आप तुरंत रू-ब-रू होते रहते हैं। सुख-दुख का आपका संसार स्मार्ट फोन में समाया रहता है। इसके अतिरिक्त भीड़ की धक्का मुक्की का शिकार हुए बगैर आप कई काम इस उपकरण के जरिए कर लेते हैं। यात्रा टिकट से लेकर सिनेमा हाल की टिकट तक, बिलों के भुगतान से लेकर खरीददारी तक सब कुछ आप स्मार्टफोन के जरिए आसानी से कर लेते हैं। ऊबने की स्थिति में  संगीत से लेकर खेल तक का मनोरंजन यह छोटा सा उपकरण आपको उपलब्ध करवाता है। ऐसा नहीं है कि इस उपकरण के केवल फायदे ही फायदे हैं। नए शोध बताते हैं कि स्मार्टफोन मानव व्यवहार में नई तरह की समस्याओं को जोड़ रहा है। लोगों का स्मार्टफोन के साथ हर पल का जुड़ाव कई समस्याएं भी पैदा कर रहा है। यह समस्याएं मनोवैज्ञानिक हैं और इनका विस्तार बैटरी खत्म होने से लेकर स्टेटस अपलोड करने तक फैला हुआ है। लोवा स्टेट यूनिवर्सिटी में हुए हालिया शोध के अनुसार स्मार्टफोन  लोगों में नोमोफोबिया नामक नई बीमारी पैदा कर रहा है। नामोफोबिया उन समस्त मनोवैज्ञानिक समस्याओं का समूह का नाम है जो स्मार्टफोन के कारण पैदा हो रही हैं। नामोफोबिया कहीं बैटरी डिस्चार्ज तो नहीं हो गई है, कहीं नए संदेश तो नहीं आ चुके हैं, मैं किसी सूचना से वंचित तो नहीं हो गया हूं, जैसे मन में आने वाले भ्रांत विचारों से संबंधित है। आपने कई लोगों को देखा होगा कि वे अपना फोन व्यग्रता से खोज रहे होते हैं जबकि उनका फोन उनकी जेब में पड़ा हुआ होता है। इसी तरह कुछ लोग अपने फोन को इसलिए बार- बार देख रहे होते हैं कि कहीं बैटरी तो डिस्चार्ज नहीं हो गई है। जबकि वह फोन चार्ज करके घर से निकले हुए होते हैं। स्मार्टफोन से जुड़ी परेशानियों की शृंखला बहुत बड़ी है। अगर आप तक मैसेज या कॉल नहीं पहुंच रहे तो आप परेशान होने लगते हैं। अगर आप स्मार्टफोन से जरूरी जानकारी नहीं निकाल पा रहे तो आप परेशान हो जाते हैं।  अगर आपके पास प्रीपेड कनेक्शन है तो स्मार्टफोन में बैलेंस कम होते ही आपको घबराहट होने लगती है। इंटरनेट की स्पीड भी व्यक्ति के तनाव को बढ़ाती है।  कुछ लोगों को हमेशा  स्मार्टफोन खोने का डर बना रहता है। फेसबुक या अन्य सोशल नेटवर्किंग साइट पर खुद का स्टेटस अपलोड न कर पाने या दूसरों के स्टेटस न पढ़ पाने पर भी बेचैनी होती है।  स्मार्टफोन व्यक्ति को कुछ अनावश्यक गतिविधियों में उलझाए रखता है। कुछ घंटे बीत जाने के बाद व्यक्ति कुछ सकारात्मक न कर पाने के कारण खुद को कोसने लगता है और इसके कारण उसका आत्मविश्वास रसातल में पहुंच में जाता है। ऐसे में सबसे जरूरी  काम यह है कि हम स्मार्टफोन का प्रयोग भी ‘स्मार्ट’  तरीके से करें।

-जयप्रकाश सिंह

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