हिमाचल में अब न बीएड कालेज खुलेंगे, न जेबीटी

NEWSसोलन— हिमाचल प्रदेश में अब कोई भी नया बीएड कालेज और जेबीटी कालेज नहीं खुलेगा। यहां तक कि सरकारी कालेजों में बीएबीएड व बीएससीबीएड जैसे चार वर्षीय समायोजित पाठ्यक्रम शुरू करने की मुहिम भी ठंडे बस्ते में पड़ गई है। कारण यह है कि प्रदेश में निजी व सरकारी क्षेत्र में किसी भी प्रकार के कालेज ऑफ एजुकेशन खोलने पर सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव व शिक्षा का कार्यभार देख रहे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पीसी धीमान ने प्रदेश निजी शिक्षा नियामक आयोग व निजी बीएड कालेजों के प्रबंधक वर्ग के  साथ हुई बैठक में इस आशय पर मुहर लगा दी है। सूत्रों के अनुसार इस उच्च स्तरीय बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव पीसी धीमान, नियामक आयोग की अध्यक्ष सरोजनी गंजू ठाकुर, एनसीटीई के क्षेत्रीय निदेशक डा. एसके चौहान, शिक्षा निदेशक डा. दिनकर बुराथोकी, आयोग के सचिव डा. चौहान सहित 45 कालेजों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। हिमाचल प्रदेश में इस समय कुल 73 बीएड कालेज संचालित हैं। इनमें से 71 निजी व दो सरकारी क्षेत्र में चल रहे हैं। प्रति वर्ष इस कोर्स में आठ हजार सीटें प्रबंधकों को भरनी पड़ती हैं। सरकार ने अब यह निर्णय लिया है कि प्रदेश में बीएड करने के इच्छुक विद्यार्थियों की निरंतर घटती संख्या को देखते हुए यहां और कालेज न खोले जाएं। इन कालेजों को मान्यता प्रदान करने वाली सर्वोच्च संस्था एनसीटीई के नए अधिनियम 2014 के अनुसार अब शिक्षा में समायोजित पाठ्यक्रम खोलने का प्रावधान किया गया है। कयास लगाए जा रहे थे कि सरकारी कालेजों में ग्रेजुएशन के साथ बीएड को इंटिग्रेट करके चार वर्षीय कोर्स शुरू किया जा सकता है। अब नए अधिनियमों में बीएड कोर्स को दो वर्ष का कर दिया गया है। ऐसा निर्णय लेने पर प्रदेश में पहले से ही संचालित 73 बीएड कालेजों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा सकता था। अब सरकार ने नए इंटिग्रेटिड शिक्षा पाठ्यक्रमों को सिर्फ पहले से ही संचालित कालेजों में शुरू करने की हरी झंडी दी है तथा सरकारी क्षेत्र में बीएड इंटिग्रेटिड कोर्स शुरू करने का निर्णय टाल दिया है। नियामक आयोग के सचिव डा. मनोज चौहान ने इस निर्णय की पुष्टि करते हुए कहा कि बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव पीसी धीमान ने इस पर सरकार की ओर से मुहर लगा दी है।

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