राजकीय महाविद्यालय थुरल पहले शैक्षणिक सत्र में 9 छात्रों ने दाखिला लिया था व यहां छात्रों की संख्या धीरे-धीरे बढ़कर 1982 में 25 पहुंच गई। 1983 में इस महाविद्यालय का नामकरण महाराजा संसार चंद के नाम पर कर दिया गया व स्थानीय लोगों व जनप्रतिनिधियों के प्रयास से वर्ष 2005 में इस महाविद्यालय का सरकारीकरण

समाज अपने लिए सफलता के मानक व रास्ते तय करता है और इस हिसाब से हिमाचली परिदृश्य में आ रहे बदलाव स्पष्ट हैं। हर साल परीक्षा परिणामों  का स्कूली सफर एक साथ कई भूमिकाएं तय करता है और इनके बीच अभिभावकों का योगदान हमेशा नए आकाश छूता है। हिमाचली बच्चों ने न केवल प्रदेश स्कूल

एक साल की सत्ता के बावजूद मोदी चुनावी मुद्रा में हैं। वही अंदाज, वही तेवर, वही सियासी हमले और वही जनता की सामूहिक हुंकारें! प्रधानमंत्री मोदी ने ‘अच्छे दिनों’ को अब परिभाषित किया है और कहा है कि चोर-लुटेरों के बुरे दिन आ गए हैं। उन्हें चीखने-चिल्लाने दो। बीते 60 सालों के दौरान राजनीतिक गलियारों

सर्वदलीय सम्मेलन का आयोजन साइमन आयोग की नियुक्ति के समय और उससे पहले भी अनुदार दल की सरकार में भारत-सचिव लार्ड बर्केनहैड ने भारतीय नेताओं को चुनौती दी थी कि  वे ऐसा संविधान बनाकर दिखाएं जो  साधारणतया भारत के सभी लोगों को मान्य  हो। उनका कहना था कि  घोर सांप्रदायिक मतभेदों के कारण भारतीय स्वयं

धर्मशाला —  जिला कांगड़ा में महिला आरक्षी पदों की भर्ती पर पहले दिन पहुंची अधिकतर युवतियां ग्राउंड टेस्ट को पास नहीं कर पाई हैं। पुलिस मैदान में भर्ती के लिए पहले शारीरिक परीक्षण परीक्षा को लेकर दौड़, लांग जंप व हाई जंप सहित अन्य मानकों पर युवतियां खरी नहीं उतर पाई हैं। इसके चलते भर्ती

(डेविड एडवर्ड्ज लेखक, शेफिल्ड विश्वविद्यालय में संरक्षण विज्ञान के व्याख्याता हैं) हालांकि मनुष्य के लालच एवं मांस भक्षण के तेजी से बढ़ने की वजह से इस बात की पूरी संभावना है कि अभी और जंगल नष्ट होंगे। खेती की उपज और उत्पादकता दोनों बढ़ा भी ली जाती हैं, तो भी वर्तमान व भविष्य की मांग

(तुषार कुमार लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता हैं ) अनेक क्षेत्रों में अधिकतम तापमान के रिकार्ड टूट गए हैं। 45 डिग्री सेल्सियस और उससे अधिक तापमान के  आंकडे़ अभी से दर्ज किए जा रहे हैं। तपिश के ये आंकड़े साबित कर रहे हैं कि पिछले दशकों में इनसान ने प्रकृति से जिस तरह का खिलवाड़ किया है,

धर्मशाला —  अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कांगड़ा में पर्यटन को भले ही पंख लगाने के लिए जिला के हवाई अड्डे का विस्तार किया जा रहा है, लेकिन इस विस्तारीकरण से अपने आशियाने टूटने का खौफ लोगों में घर कर कर गया है। एयरपोर्ट के विस्तारीकरण को लेकर निशानदेही के कार्य के साथ ही क्षेत्र के लोगों

सबसे अधिक सफल व्यक्ति वे होते हैं, जो अपनी हॉबी या शौक को ही अपना करियर बनाते हैं। ऐसा काम करते हुए वे कभी बोर नहीं होते बल्कि घंटों जुटे रहने के बाद भी वे खुश और ऊर्जा से भरपूर बने रहते हैं। ऐसे कामों को कहीं बाहर जाकर सीखने की जरूरत नहीं पड़ती… सैकड़ों

(शगुन हंस, योल) पता ही नहीं चला कि कब मोदी सरकार एक साल पूरा कर गई। जश्न का जुनून तो देखो कि मोदी रैली के लिए मथुरा पहुंच गए। उपलब्धियां गिनाते-गिनाते एक घंटा बीत गया और उस भाषण के दौरान आठ बार पानी पिया। मोदी सरकार के एक साल के कार्यकाल का यदि आकलन किया