आज रेहडि़यां हटाओ, कल सुबह फिर वहीं पाओ

news newsकांगड़ा —  शहर में रेहड़ी-फड़ी वालों को बसाना प्रशासन और नगर परिषद के लिए एक बड़ी चुनौती है। दीगर है कि जब भी शहर में अतिक्रमण हटाने की बात आती है, तो सबसे पहले रेहड़ी-फड़ी वाले ही पुलिस व प्रशासन के निशाने पर रहते हैं। पूर्व में इन रेहड़ी-फड़ी वालों को सड़क किनारे से हटाने की तमाम कोशिशें फेल रही हैं। काबिले गौर है कि इस प्रक्रिया मे प्रशासन ने रातोंरात रेहडि़यां भी जब्त कर ली थीं। उसके बाद फिर से यहां रेहडि़यां-फडि़यां शुरू हो गईं और अब तहसील चौक से लेकर बस अड्डा तक रेहडि़यों व फडि़यों वालों का कब्जा है। एक अनुमान के अनुसार मौजूदा समय में करीब 150 रेहड़ी-फड़ी लगती हैं। उल्लेखनीय है कि जब प्रशासन ने रेहडि़यां शहर से उठाने के लिए सख्ती बरती थी तो इन्हें बसाने की प्रक्रिया भी शुरू की थी। करीब चार-पांच माह पूर्व नगर परिषद कांगड़ा ने 25-25 हजार रुपए करीब दो दर्जन रेहड़ी वालों से अग्रिम राशि के रूप में लिए थे और यह दावा किया था कि इन रेहड़ी वालों को खोखे बना कर दिए जाएंगे। उसके बाद 25-25 हजार रुपए इन रेहड़ी वालों से लिया जाएगा। इन्हें खोखो का कब्जा देने के बाद कांगड़ा में रेहड़ी-फड़ी पर प्रतिबंध लगाने की बात प्रशासन ने कही थी, लेकिन पिछले पांच-छह माह में ऐसी कोई प्रक्रिया शुरू न होने से निराशा है।

लोगों का पैदल चलना तक दुश्वार

बहुतकनीकी संस्थान की दीवार के बाहर हालांकि पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ बनाया है और ग्रिल भी लगा दी है, लेकिन वहां भी रेहड़ी-फड़ी वाले काबिज हो गए हैं और पैदल चलने वाले लोगों के लिए आफत खड़ी हो गई है। इस वजह से दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ी है। मुख्यमंत्री का मत है कि रेहड़ी-फड़ी वालों का पंजाकरण हो और उन्हें बसाने की प्रक्रिया शुरू हो और उसके बाद यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई रेहड़ी-फड़ी शहर में न लगे।

150 रेहड़ी-फड़ी वालों का पंजीकरण

नगर परिषद ने कांगड़ा में करीब 150 रेहड़ी-फड़ी वालों की पंजीकरण किया है। उनमें 500-500 रुपए पंजीकरण शुल्क भी लिया गया है, लेकिन उन्हें बसाने की प्रक्रिया ठोस ढंग से शुरू न हो पाई है, परंतु रेहड़ी-फड़ी वालों की तादाद बढ़ती जा रही है। यह सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। ऐसे रेहड़ी-फड़ी वालों में बाहरी राज्यों से आए लोगों की भी संख्या काफी अधिक है। पंजीकृत 150 रेहड़ी-फड़ी वालों को बसाने की प्रक्रिया शुरू हो और भविष्य में रेहड़ी-फड़ी लगने पर प्रतिबंध लगे तो बात बने।

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