कठोर कर्त्तव्‍यों को निभाती सौम्‍या सांबशिवान

अपने कार्य को बखूबी अंजाम दे रही सिरमौर एसपी को यदि मौजूदा समय में पुलिस महकमे की ब्रांड एंबेसेडर कहा जाए, तो गलत नहीं होगा क्योंकि मौजूदा समय में उन्हें अपनी नम्र भाषा शैली व संस्कृति प्रिय स्वभाव के कारण सिरमौर के हर कल्चरल कार्यक्रम में लोगों द्वारा आमंत्रित किया जा रहा है…

utsavसिरमौर में एसपी के पद पर नवनियुक्त सौम्या सांबशिवान इन दिनों सिरमौर की महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन कर उभर रही हैं, तो वहीं दूसरी तरफ अपनी कार्यशैली से अपराध जगत में भी अपना लोहा मनवा रही हैं। अपने कार्य को बखूबी अंजाम दे रही सिरमौर एसपी को यदि मौजूदा समय में पुलिस महकमे की ब्रांड एंबेसेडर कहा जाए तो गलत नहीं होगा क्योंकि मौजूदा समय में उन्हें अपनी नम्र भाषा शैली व संस्कृति प्रिय स्वभाव के कारण सिरमौर के हर कल्चरल कार्यक्रम में लोगों द्वारा आमंत्रित किया जा रहा है। हर कोई उनके सान्निध्य में रहने की कोशिश करता रहता है, हालांकि इसके अलावा अपने कार्य और दंबग निर्णयों के चलते कुछ लोगोें के लिए यह बात नाकाबिले गौर भी साबित हो रही है, परंतु इन सब से अलग सुश्री सौम्या बेरोक टोक एवं निडरता से अपने कार्य को आंनद के साथ कर रही हैं, परंतु दूसरी तरफ उनके जीवन सफर में कई ऐसे मुकाम और भी हैं जिसमें यदि उनका लक्ष्य आड़े नहीं आता तो शायद आज वह भी किसी खूबसूरत अभिनेत्री का किरदार निभा रही होतीं। सौम्या सांबशिवान शुरू से ही आईपीएस का सपना दिल में लिए आगे बढ़ रही थीं, परंतु साहित्य एवं सस्ंकृति से जुडे़ प्रोग्रामों में इनकी जान बसती है, इसी के चलते वह शुरू से ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेती रही हैं। हम में से शायद ही कोई जानता होगा कि सिरमौर की यह दंबग पुलिस अफसर अपने समय की मिस साउथ इंडिया रह चुकी हैं। 2010 बैच की आईपीएस अधिकारी सौम्या सांबशिवान ने सितंबर 2003 में मिस साउथ इंडिया ताज झटक लिया था। जिसमें बतौर इनामी राशि सौम्या को एक लाख रुपए नकद प्राप्त हुए थे। 24 मार्च 1980 को जन्मी यह आईपीएस अधिकारी मूलतः केरल के पालघाट से संबंध रखती हैं। हिंदी व अंग्रेजी के साथ-साथ अधिकारी को मलयाली भाषा में महारत हासिल है। ब्यूटी विद बे्रन की कहावत चरितार्थ करती सौम्या को बचपन से ही स्वावलंबी बनने का जुनून था। सौंदर्य व मॉडलिंग के जगत में दाखिल होने से पहले  सौम्या एक प्राइवेट बैंक में भी नौकरी कर चुकी हैं। मॉडलिंग जगत में अपनी धाक जमाने के बाद सौम्या ने अपने शिखर पर पहुंचे करियर को अलविदा कह दिया और अपने लक्ष्य को चरितार्थ करने में लग गईं व 2010 में आईपीएस आफिसर बन कर अपना सपना साकार करने के बाद वह लगातार अपने धार्मिक व कल्चरल प्रोग्रामों से जुड़ी रहीं। लगातार कड़ी मेहनत व लगन से सौम्या आज सिरमौर के अपराध जगत में अपराधियों को नाकों चने चबवा रही हैं। इसके अलावा उनकी कार्य शैली से प्रेरित होकर कई युवा लड़कियां उन्हें अपना प्रेरणा स्रोेत मान रही हैं। अपनी मेहनत को कामयाबी का चोला पहनाने वाली इस महिला का मानना है कि जीवन में सफलता आपकी लगन व तपस्या के साथ निरंतर प्रयास मांगती है, जीवन में लक्ष्य से नहीं भटकना चाहिए। अपनी शैक्षिक योग्यता के तहत बॉयोटेक में बीएससी के अलावा सौम्या ने पीजीडीबीए का कोर्स भी किया है। हालांकि अपने अतीत के बारे में एसपी सौम्या कभी किसी कार्यक्रम में कोई चर्चा नहीं करती हैं। उनका मानना है कि पुलिस महकमे के अनुशासन की पालना पहला कर्त्तव्य है। बावजूद इसके सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आर्कषण से वह स्वयं को दूर भी नहीं रख पाती हैं।

छोटी सी मुलाकात

utsavकाम करिए, बाकी सब कुछ कायनात करेगी

पुलिस के अंदाज में सबसे खूबसूरत और बदसूरत क्या ?

सबसे खूबसूरत न्याय है, लेकिन उसमें सहानूभूति का अंश शामिल होना चाहिए और इसमें बदसूरत कुछ भी नही लगता,यह जिंदगी का सबसे बेहतर अनुभव है।

हिमाचल से अपका नाता ?

इस देवभूमि से मेरा शिक्षा का नाता रहा है। मैने सोलन जिला के केंद्रीय विद्यालय से तीन साल  शिक्षा ग्रहण की है। यह मेरे जीवन का सुखद पहलू रहा है।

आप ग्लैमर से पुलिस गश्त तक खुद को कितना बदल पाईं?

आप जैसी परिस्थिति में रहना चाहते हैं परिस्थितियां आपको स्वयं ही उस माहौल में उतार लेती हैं। जीवन में बदलाव अनायास ही आ जाता है। मै अपनी विचारधारा से आज भी जुड़ी हुई हूं।

बतौर पुलिस अधिकारी आपकी प्राथमिकताएं?

ऐसी पुलिस कार्यप्रणाली जोकि परिणामपरक हो, जिसमें लोगों का भरोसा व संवेदनाएं बनी रहें ।

क्या आपको हिमाचली लोग भोले लगे, या पाप की गठरी यहां भी खुल रही है?

(हसंते हुए) यहां के लोगों का मेरे प्रति और मेरा उनके प्रति बेहद लगाव है। यहां के लोग भोले व सीधे हैं और जहां भगवान होते हैं वहां शैतान का भी आवास होता ही है।

अब तक की आपकी सबसे बड़ी चुनौती?

इस बारे में कोई टिपणी नही कर पाऊंगी क्योंकि मेरे लिए चुनौतियां कोई एक विशेष नही होती, हर चुनौती विश्ष्टि होती है। हर चुनौती से जीवन में आगे बढ़ने का सबक मिलता है।

आगे बढ़ने में  आपका सिद्धांत व पे्ररणा स्रोत?

यदि आप सूरज की तरह चमकना चाहते हैं, तो उसी की तरह जलना भी होगा। जिंदगी में सोने की भांति दमकने के लिए खुद को मेहनत व कड़ी तपस्या की आग में तपाना पड़ता है। मैने इस सिद्धांत को अपने जीवन में उतारा है और जीवन में आगे बढ़ने के लिए मेरे प्रेरणा स्रोत पूर्व राष्ट्रपति स्व. डा.एपीजे अब्दुल कलाम रहे हैं।

जीवन में उत्साह, ऊर्जा व उत्थान के लिए अपना दर्शन क्या है?

काम करते रहो बाकी चीजें कायनात (प्रकृति) खुद देख लेगी।

हिमाचल में युवा आपको अपना रोल मॉडल मानते हैं, तो आपको कैसा लगता है?

प्रेरणा मिलती है और अच्छा बनने की ताकि उन्हे और प्रेरणा मिले।

हिमाचली युवाओं को अपनी क्षमता का भरपूर इस्तेमाल करने के लिए आपके कुछ टिप्स?

निरंतर अभ्यास ही व्यक्तित्व का निरंतर विकास करने ेमें सहायक होता है। यही परिवर्तन का मार्ग है। अपने लक्ष्य पर केंद्रित होकर अपने आत्मविश्वास के साथ मेहनत करें, सफलता आपके साथ होगी।

—अंजलि त्यागी, कालाअंब

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