केबल डिजिटाइजेशन से खुलती संभावनाएं

( राजेश कुमार जसवाल लेखक, ऊना के सहायक लोक संपर्क अधिकारी  हैं )

केबल टीवी डिजिटाइजेशन के कारण जहां उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्तायुक्त केबल टीवी प्रसारण की सुविधा सुनिश्चित हुई है, वहीं दर्शकों को अपनी पंसद  के टीवी चैनल देखने की आजादी भी मिली है…

भारत की जनगणना-2011 के आंकड़ों के अनुसार देश में 117 मिलियन यानी 11.7 करोड घरों में टीवी की सुविधा उपलब्ध है। वहीं फीकी-केपीएमजी रिपोर्ट-2015 के अनुसार यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 168 मिलियन यानी 16.8 करोड़ तक पहुंच गया है और इस लिहाज से विश्व भर में भारत का स्थान चीन व अमरीका के बाद आता है। इसी रिपोर्ट के अनुसार देश के कुल टीवी उपभोक्ताओं का 59 फीसदी यानी की लगभग 9.9 करोड़ केबल टीवी लगभग चार करोड़ डीटीएच, एक करोड़ डीडी फ्री डिश व आइपीटीवी तथा 1.9 करोड़ परिवार डीडी टेरेस्ट्रेअल के साथ जुड़े हुए हैं। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने अगस्त, 2010 में केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) संशोधन अध्यादेश-2011 के तहत भारत में डिजिटल संबोधनीय केबल प्रणालियों के कार्यान्वयन को लेकर चार विभिन्न चरणों में एनालॉग केबल टीवी सेवाओं को डिजिटल संबोधनीय केबल टीवी प्रणाली में परिवर्तित करने की सिफारिश की है। इसके तहत प्रथम चरण में 31 अक्तूबर, 2012 तक देश के चार महानगरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई, जबकि दूसरे चरण के अंतर्गत 31 मार्च, 2013 तक देश के एक मिलियन आबादी वाले 38 शहरों को केबल टीवी डिजिटाइजेशन के तहत लाया गया है। तीसरे फेज में 31 दिसंबर, 2015 तक देश के सभी नगरीय क्षेत्रों तथा 31 दिसंबर, 2016 तक देश के बचे हुए क्षेत्रों को केबल टीवी डिजिटल नेटवर्क के तहत लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी प्रक्रिया के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश के 53 नगरीय क्षेत्रों के लगभग सवा लाख परिवारों को केबल टीवी डिजिटाइजेशन के साथ 31 दिसंबर, 2015 तक जोड़ा जाना लाजिमी है। इसमें प्रदेश का नगर निगम क्षेत्र शिमला, 30 नगर परिषद क्षेत्र, जिसमें रोहड़ू, रामपुर, ठियोग, सोलन, कुल्लू, मनाली, ऊना, हमीरपुर, सुजानपुर, धर्मशाला, कांगड़ा, पालमपुर, नूरपुर, नगरोटा, देहरा, ज्वालाजी, चंबा व डलहौजी तथा 22 नगर पंचायतों वाले क्षेत्र शामिल हैं।

ऐसे में प्रदेश के इन 53 नगरीय क्षेत्रों में केबल टीवी का प्रसारण कर रहे मल्टी सिस्टम आपरेटर (एमएसओ) तथा लोकल केबल आपरेटर (एलसीओ) को केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम-1995 एवं केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) संशोधन अधिनियम-2011 की धारा तीन के अंतर्गत सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार तथा संबंधित प्रसारण क्षेत्र के पंजीकरण प्राधिकरण के पास पंजीकरण के लिए आवेदन करना तथा धारा चार (क) के तहत सभी केबल आपरेटर एमएसओ व एलसीओ को निर्धारित तिथि के बाद केबल टीवी का डिजिटल संबोधनीय प्रणाली (डीएएस) के तहत प्रसारण करना अनिवार्य है। यही नहीं, केबल टीवी नेटवर्क पंजीकरण नियम-5 के तहत सभी स्थानीय केबल आपरेटर्स को अपने प्रसारण क्षेत्र के मुख्य डाकपाल तथा पंजीकरण नियम 11-सी के तहत मल्टी सिस्टम आपरेटर को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार में पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। इसी तरह केबल टीवी नेटवर्क अधिनियम की धारा-5 के तहत प्रोग्राम कोड तथा धारा-6 के अनुसार निर्धारित विज्ञापन कोड लेना भी जरूरी है, जिसके बिना केबल टीवी पर प्रसारण अवैध है। इसके अतिरिक्त धारा-8 के तहत केबल आपरेटर को दूरदर्शन के 25 चैनल, जिसमें डीडी नेशनल, लोकसभा, राज्यसभा, डीडी न्यूज, ज्ञानदर्शन, स्पोर्ट्स, किसान चैनल शामिल हैं, का प्रसारण करना भी अनिवार्य है। ऐसे में यदि केबल टीवी आपरेटर सरकार द्वारा निर्धारित तिथि तथा केबल टीवी नेटवर्क विनियमन अधिनियम के तहत नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ केबल टीवी नेटवर्क विनियमन संशोधन अधिनियम-2011 के अनुसार प्राधिकृत अधिकारी नियमों के विरुद्ध केबल टीवी प्रसारणकर्ता के उपकरणों को जब्त कर सकता है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के अनुसार देश में प्रथम व द्वितीय चरण में हुए केबल टीवी डिजिटाइजेशन के कारण जहां उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्तायुक्त केबल टीवी प्रसारण की सुविधा सुनिश्चित हुई है, वहीं दर्शकों को अपनी पंसद  के टीवी चैनल देखने की आजादी भी मिली है। साथ ही केबल टीवी के डिजिटलाइजेशन के कारण सरकार के राजस्व में भी बतौर मनोरंजन कर तथा सेवा कर के बढ़ोतरी दर्ज हुई है। ऐसे में हिमाचल प्रदेश के सभी 53 नगर निकाय क्षेत्रों में केबल टीवी का प्रसारण कर रहे केबल आपरेटर एमएसओ व एलसीओ केबल टीवी नेटवर्क विनियमन अधिनियम के तहत अपना पंजीकरण करवाना सुनिश्चित करें, ताकि प्रदेश के लाखों केबल टीवी उपभोक्ताओं को सेट टॉप बॉक्स के माध्यम से डिजिटल प्रसारण की सुविधा समयानुसार सुनिश्चित हो सके।

ई-मेल : rajesh.jaswal75@gmail.com

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