बुझे चेहरों का प्रवचन

( डा. राजन मल्होत्रा, पालमपुर )

भाजपा को बिहार चुनावों में मिली हार पर मंथन जारी है। यह जरूरी भी था, क्योंकि बिहार चुनावों के बाद अब थोड़े ही समय बाद तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। उन चुनावों में पार्टी बेहतर प्रदर्शन कर सके, इसके लिए पार्टी की कमजोरियों को दूर करने के लिए मंथन आवश्यक था। इससे इतर भाजपा के ही कुछ कुंठित, बजुर्ग नेता अब बिहार चुनावों में मिली हार का जिम्मेदार मोदी और अमित शाह को ठहरा रहे हैं। लालकृष्ण आडवाणी, शत्रुघ्न सिन्हा, मुरली मनोहर जोशी और यशवंत सिन्हा सरीखे नेता अब हार के लिए सिर्फ मोदी और शाह को कसूरवार मान रहे हैं। ध्यान में रहे कि मोदी-शाह पर कटाक्ष करने वाले ये तमाम हारे हुए जुआरी हैं। केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद इन लोगों को मंत्रिमंडल में कोई स्थान नहीं मिला था। इनकी कुंठा का असल कारण तो वही है, जिसके कारण यह पूरी जमात तिलमिलाई हुई है। हो सकता है कि बिहार चुनावों में मोदी और शाह की जोड़ी बिहारी जनता को विकास की बात नहीं समझा पाए, लेकिन इस तरह के घृणित बयान देकर अब ये पार्टी का कौन सा भला कर रहे हैं? पार्टी का हिस्सा होने के नाते बिहार चुनाव में पार्टी के बेहतर प्रदर्शन करे, इसके लिए प्रयास करना इनका दायित्व नहीं बनता था? पार्टी नेतृत्व को चाहिए कि बेलगाम हुए इन नेताओं पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करे।

 

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