सड़क सुरक्षा है ठेंगे पर

( डा. सत्येंद्र शर्मा, चिंबलहार, पालमपुर )

लहराते, बल खाते हैं, नाबालिग बाइक वाले,

सर्कस इनकी जन्मस्थली, वो असली घरवाले।

पीते-खाते, मस्ती करते, झूम रहे मतवाले,

सुट्टा कसकर लगा रहे, वो मंत्री जी के साले।

भागो-भागो दूर हटो, ये ऊपर चढ़ जाएंगे,

बिना हेलमेट, मारेंगे या खुद ही मर जाएंगे।

बाइक दिलवाई किस्तों में, छाई बड़ी गरीबी,

परसों ही नीलाम हुई, लाला ने सड़क खरीदी।

कार खड़ी की बीच सड़क में, बोलोगे तो झगड़ेंगे,

मौका पाकर रात कभी, अंधियारे में रगड़ेंगे।

जल्दी काकू चले गए, हरदम जाने की जल्दी,

दो दिन पहले शगुन लिया, तभी लगी थी हल्दी,

इन्हें कौन समझाएगा, परिजन, शिक्षक सब डरते।

होते हैं शहीद सड़कों पर, संकरी है बल खातीं,

धीरे-धीरे जाना मोनू, मम्मा रोज सिखाती।

सोनू ने टूटी पुलिया को, रेस कोर्स सा जाना,

हड्डी सारी चूर हुई, बचने का नहीं ठिकाना।

आयु समझ ली चार दिनों की, बच्चे हुए सयाने,

जोर नहीं अब मां-बाप का, काम किए मनमाने।

सड़क सुरक्षा ठेंगे पर, क्यों लाइसेंस बनवाए,

जबरों को है इज्जत प्यारी, तो चुप ही रह जाएं।

रोते-रोते आंखें सूजीं, परिजन बिलख रहे हैं,

जाने वाला चला गया, वो अब बिखर रहे हैं।

 

You might also like