सीमा पर आतंकी संसद में नेता हावी

(नर्मदा नेगी, नाहन)

बहुत भरोसा किया था देश ने प्रधानमंत्री की बातों पर कि भारत अब पड़ोसी मुल्कों से नजर झुकाकर नहीं, नजर मिलाकर बात करेगा। और शायद ऐसा ही पड़ोसी मुल्कों के प्रधानमंत्री बोलते होंगे कि अब भारत की सीमा पर नहीं, सीमा में घुसकर हमला करें आतंकी। यही अब हो रहा है। आतंकी अब सीमाओं में घुसकर सेना के कैंपों पर हमला कर रहे हैं। अभी कुछ ही दिन पहले महाराष्ट्र के एक कर्नल सीमा पर शहीद हो गए और दो दिन पहले आतंकियों ने सेना के कैंप पर ही हमला कर दिया। कितने बुलंद हौसले हो गए हैं आतंकियों के। अब तक हमारे नेताओं का व्यवहार देखकर दुश्मन देश भी समझ चुके हैं कि यहां केवल जुबानी जंग ही लड़ी जा सकती है।  जब भी सीमा पर कुछ होेता है, भारतीय नेता संसद में बयान देते हैं, सिर्फ संसद में। ऊधमपुर में आतंकी नावेद पकड़ा गया तो सभी न्यूज चैनल बता रहे थे कि गृह मंत्री संसद में बयान देंगे और दो दिन बाद संसद में बयान आया। आखिर उस बयान से क्या लाभ हुआ? उस बयान से ज्यादा तो देश की जनता ही जानती है। मोदी के भाषणों ने चुनाव तो जीत लिए, लेकिन सीमा पर हम हर दूसरे दिन कुछ न कुछ हार रहे हैं। कभी उन लोगों की भी चिंता करो जो सीमा क्षेत्रों में बंकरों में जिंदगी बिता रहे हैं। तीस साल बाद बहुमत वाली सरकार आई, पर हालात अल्पमत वाली सरकार से भी बदतर हो गए।

 

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