Daily Archives

Nov 5th, 2015

सुरीले गीतों पर नालागढ़ फिदा

बीबीएन— ‘दिव्य हिमाचल मीडिया ग्रुप’ की अनूठी पेशकश ‘हिमाचल की आवाज सीजन-चार’ का जादू औद्योगिक नगरी बीबीएन के सिर चढ़कर बोला। नालागढ़ में ‘हिमाचल की आवाज सीजन-चार के हुए ऑडिशन में हुनरमंद गायकों ने सुरीली

दिवाली से पहले ही जाम होने लगा शहर

 सोलन— सोलन शहर में दिवाली नजदीक आने पर शहर में इन दिनों ट्रैफिक भी अधिक बढ़ गया है, जिसके चलते शहर में जाम लगने की समस्या अधिक बढ़ गई है।  जानकारी के अनुसार दीपावली के त्योहार को कुछ ही दिन रह गए हैं, जिसके कारण शहर में खरीददारी के लिए…

ऊना ने लूटी मस्ती की महफिल

ऊना —  प्रदेश के  अग्रणी मीडिया ग्रुप दिव्य हिमाचल द्वारा आयोजित ‘हिमाचल की आवाज’ सीजन-4 का ऑडिशन बुधवार को रॉकफोर्ड- डे बोर्डिंग सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित हुआ। ऑडिशन को लेकर संगीत प्रेमियों में खासा क्रेज देखा गया। सुबह नौ बजे से ही…

खंभे से दे मारी बाइक एक की मौत

कांगड़ा —  मंगलवार कांगड़ा के पुराना बस स्टैंड के बाहर तेज रफ्तार मोटरसाइकिल बिजली के पोल से टकरा गई। इस हादसे में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर  हैं। जानकारी के अनुसार बिजली के पोल के साथ भिड़ंत हो जाने  पर केंद्रीय…

हम नहीं सुधरेंगें

आपके पास है अगर कोई ऐसा फोटो या वीडियो, जो बयां करता हो अव्यवस्था। बताता हो ‘हम नहीं सुधरेंगे’ या हो कोई घटनाक्रम तो तुरंत करें ‘व्हाटस ऐप’  94184 07889, 98163-242६4 या 98171-92111 पर। प्रकाशित होने पर सबसे बेहतर फोटो या वीडियो को महीने के…

हिंदी-नेपाली भाई-भाई

यह मिथ अब दोनों देशों के बीच टूटने के कगार पर है। भारत और नेपाल की सीमाएं खुली हैं। दोनों तरफ  के लोग कई कामों से आते-जाते रहते हैं। दोनों देशों में आध्यात्मिकता का भी एक संबंध है। भारतीयों और नेपालियों में वैवाहिक संबंध भी हैं। लेकिन अब…

आज रेहडि़यां हटाओ, कल सुबह फिर वहीं पाओ

कांगड़ा —  शहर में रेहड़ी-फड़ी वालों को बसाना प्रशासन और नगर परिषद के लिए एक बड़ी चुनौती है। दीगर है कि जब भी शहर में अतिक्रमण हटाने की बात आती है, तो सबसे पहले रेहड़ी-फड़ी वाले ही पुलिस व प्रशासन के निशाने पर रहते हैं। पूर्व में इन…

ब्लैकबेरी हो गई कांग्रेस

( पीके खुराना लेखक, वरिष्ठ जनसंपर्क सलाहकार और विचारक हैं ) केजरीवाल की ही तरह लोकसभा चुनावों में करारी हार के बाद नीतीश कुमार और लालू यादव भी संभले हैं, जबकि कांग्रेस वहां भी अप्रासंगिक नजर आती है। देश की जमीन में काफी नीचे तक फैली हुई…

कुछ मजबूरियां अपनी, कुछ जमाने के तंज

( सुरेश कुमार लेखक, योल, कांगड़ा से हैं ) अगर पुलिस से काम लेना है, तो पहला काम यही है कि उसका मनोबल ऊंचा किया जाए। पुलिस का मतलब वर्दी नहीं होता कि वर्दी पहन ली है, तो मशीन बन जाए, जब तक चाहो ड्यूटी लो। पुलिस की वर्दी में अगर एक सजग…

रचनात्मक हो विरोध

 ( किशन सिंह गतवाल, सतौन, सिरमौर ) न तो देश में ऐसा माहौल है और न असहिष्णुता का दौर इस कद्र भयंकर हुआ है कि एक बुद्धिजीवी वर्ग को सड़क पर उतरकर विरोध प्रकट करने की जहमत उठानी पड़े। इससे अधिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता क्या होगी कि हम…