आतंकियों के साथ सख्ती धर्मपूर्ण है

By: Jul 18th, 2016 12:16 am

( स्वामी रामस्वरूपजी आचार्य लेखक, योल, कांगड़ा से हैं )

आज संपूर्ण विश्व की जनता उग्रवाद से दुखी है। यदि संपूर्ण विश्व के नेता एकजुट होकर इस समस्या को जड़ से समाप्त नहीं करते, तो जनता इसके खूनी पंजे से लहूलुहान होती रहेगी, बहु-बेटियों की अस्मत लूटी जाएगी, नई पीढि़यों को जन्नत का लालच देकर उग्रवाद का पाठ पढ़ाकर उनका भविष्य बर्बाद किया जाएगा…

विश्व में बढ़ते हुए आतंकवाद पर लगाम लगाने में अमरीका, फ्रांस, ब्रिटेन, रूस जैसी महान शक्तियों की विफलता मन में बेचैनी सी पैदा करती है। हां! यह तो निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि आईएसआईएस के कई ठिकाने ध्वस्त हुए हैं। किसी हद तक उनके पर कुतरे भी गए हैं, परंतु उनके क्रूर एवं निर्दयी दस्तों को पूर्णतया विराम न लगाने के कारण नित्य बेकसूर लोग उनके हाथों बेरहमी से प्राण गंवा रहे हैं। जन्म और मृत्यु का नियंत्रण तो केवल परमेश्वर के हाथ में ही कहा गया है। लेकिन जबसे उग्रवाद के विषैले खूनी पंजे जनता पर अचानक प्रहार करने लगे हैं, तो विद्वान यह सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि जहां परमेश्वर तो कर्मानुसार मृत्यु प्रदान करता है, वहां ये उग्रवादी कब, कहां और कैसे बेकसूरों को मृत्यु के घाट उतार देते हैं, इसका कोई पता नहीं चलता।

फ्रांस में भी बेकसूर जनता के साथ आईएसआईएस ने जो मृत्यु का ताडंव दिखाया है, उसकी जितनी भी निंदा की जाए, वह कम है। फ्रांस के नीस शहर में जब जनता ‘नेशनल डे’ को हर्षोल्लास और उमंग से मना रही थी, तभी अचानक इस भीड़ पर एक सनकी आतंकी ने बेरहमी से ट्रक चढ़ा दिया। राक्षसवृत्ति की कोई हद नहीं होती। इसका उदाहरण यह है कि इन बेकसूरों को मारने के बाद आईएसआईएस के उग्रवादियों ने खुशी का जश्न भी मनाया। चश्मदीद गवाह के अनुसार उग्रवादियों ने ट्रक में से पिस्टल से गोलियां भी चलाईं। ट्रक में हथियार एवं ग्रेनेड लदे हुए थे। लगभग आठ महीने में तीसरी बार फ्रांस पर यह बड़ा हमला किया गया। इस हमले के मद्देनजर भारतवर्ष में भी हाई अलर्ट लागू किया गया है। भारत में हैदराबाद से पकड़े हुए उग्रवादियों ने यह खुलासा भी किया है कि उग्रवादियों की नजर अजमेर शरीफ को नष्ट करने पर टिकी थी। जहां  सभी मजहबों एवं ईश्वर से उत्पन्न वेदवाणी में प्रत्येक नर-नारी को उपदेश दिया जाता है कि वे पृथ्वी पर शांति कायम करने के लिए नित्य खुदा/परमात्मा की पूजा करें, इंद्रियों पर संयम रखें, माता, बहन-बेटियों की इज्जत करें, विश्व में भाईचारा बढ़ाएं, हिंसा से दूर रहें, किसी का दिल न दुखाएं इत्यादि। इस विषय में कुरान शरीफ में भी स्पष्ट कहा-

‘दुनिया एक इबादत गाह है और इसका हर काम इबादत है।’

अर्थात यह सारा संसार खुदा का पूजा स्थल है। इसमें प्रत्येक शुभ कार्य खुदा/परमेश्वर की पूजा है, परंतु उग्रवाद मजहब एवं इनसानियत से परे अपने अलग ही खुद के नियम बनाकर चलता है। अगर ऐसा नहीं है तो वह खुदा की दी इस जमीन को, जिस पर इनसानों के लिए परोपकार एवं शुभ कार्य करके खुदा की पूजा की जाती है, बेकसूरों के खून से रंग कर अपवित्र न करता। यदि उग्रवाद एक देश की समस्या होती, तब तो उसी एक देश के राजा का कर्त्तव्य था कि उग्रवाद को अपने सामर्थ्य से उखाड़कर फेंके। जैसा कि यजुर्वेद मंत्र 11/14 एवं 15 में कहा-

– राजा सबका रक्षक हो एवं धार्मिक हो।

– राजा सदा अपनी सेना को सुशिक्षित एवं हृष्ट-पुष्ट रखे। जब शत्रुओं से युद्ध करना चाहे तब अपने राज्य को उपद्रवों से रहित करके युक्ति एवं बल से शत्रुओं का हिंसन करें।

– अथर्ववेद मंत्र 2/7/2 में स्पष्ट कहा कि जब प्रतापी राजा प्रजा का दिया हुआ कर लेकर दुष्टों को दंड देता है, तो प्रजा आनंदयुक्त होती है, अन्यथा नहीं।

वेदों में तो विशेषकर राज, सरकार, मंत्रीगण आदि को ईश्वर की आज्ञा है कि राज्य में ऐसी व्यवस्था हो कि किसी भी हालत में प्रजा दुखी नहीं रहनी चाहिए। आज एक राष्ट्र की नहीं, अपितु संपूर्ण विश्व की जनता उग्रवाद से दुखी है। अब इस परिस्थिति में यदि संपूर्ण विश्व के नेता एकजुट होकर शीघ्र ही इस भयानक समस्या को जड़ से समाप्त नहीं करते तो जब-जब विश्व की जनता इस उग्रवाद के खूनी पंजे से लहूलुहान होगी, बेघर होगी, बहु-बेटियों की अस्मत लूटी जाएगी, नई पीढि़यों को जन्नत का लालच देकर उग्रवाद का पाठ पढ़ाकर उनका भविष्य बर्बाद किया जाएगा, तब-तब ऐसे उग्रवादियों द्वारा किए हुए पाप का फल उग्रवादियों सहित देश की सरकारों, मंत्रियों द्वारा भी भोगा जाता रहेगा। हमें यह समझना होगा कि यदि कोई राष्ट्र अपनी रक्षा के लिए हथियार एकत्र करता है, तो वह वेदों में जायज कहा है, क्योंकि वह दूसरे देशों के लिए इतना भयानक नहीं होता, जितना कि एक उग्रवादी संगठन, जिसका अपना कोई राष्ट्र नहीं होता। यह सारी दुनिया के राष्ट्रों को हिंसा द्वारा डरा-धमकाकर, बेकसूर जनता की बेरहम हत्या करके इस्लामिक राज्य करने की इच्छा रखता है। अतः क्योंकि ऐसे उग्रवादी संगठन दया, धर्म, मजहब आदि किसी को भी नहीं मानते, इसलिए संपूर्ण पृथ्वी के राष्ट्रों को एकजुट होकर ऐसे उग्रवादी संगठनों का नामोनिशान मिटा देना चाहिए, उन्हें नेस्तनाबूद कर देना चाहिए, क्योंकि ऐसा करना प्रत्येक राष्ट्र के राजा का धर्म कहा है।

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