शहीद डोलेराम की शहादत पर आनी क्षेत्र को नाज

Jul 15th, 2016 12:16 am

newsकुल्लू   —  कर चले हम फिदा जानो तन साथियो.. अब तुम्हारे हवाले बतन साथियो…जी हां, कुछ ऐसा ही ब्यां कर गए कुल्लू जिला एक मात्र कारगिल शहीद डोले राम। कुल्लू जिला के आनी बाहय सराज क्षेत्र में नित्थर के गांव शकरोली के निवासी शहीद डोले राम ने तीन जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध के दौरान सियाचीन की ग्लेश्यिरायुक्त खतरनाक पहाड़ी पर अपने अदम्य साहस और वीरता का परिचय देते हुए 17 दुश्मनों को मार गिराया था। भारत मां की रक्षा के लिए दुश्मनों से लोहा लेते वह स्वयं भी शहीद हो गए। शहीद डोलाराम की शाहदत का यह दिन उनके गृह क्षेत्र नित्थर में हर वर्ष बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है। अप्रैल 1965 को आनी के नित्थर क्षेत्र के गांव शकरोली में कमला नंद कटोच के घर पैदा हुए डोले राम पिता के दो पुत्रों में से बड़े और अपनी एक बहन से छोटे थे। डोले राम में देश सेवा के गुण बचपन से ही विद्यमान थे, दोनों भाई बचपन में अकसर चोर सिपाही का खेल खेला करते थे। वर्ष 1984 में हाई सेंकेडरी की परीक्षा उत्तीर्ण करने के उपरांत वह साक्षात्कार के माध्यम से अगस्त 1985 में पैरा मिलीट्री स्पेशल फोर्स यूनिट नाहन में बतौर पैरा कमांडों भर्ती हुए। डोले राम ने मांउट क्लाइविंग में स्पेशल कोर्स किया हुआ था और इसी कोर्स में अगले प्रशिक्षण के लिए उन्हें अन्य साथियों के साथ मिशन कारगिल पर भेजा गया। उस समय वह एक इंस्पेक्टर रैंक पर थे। इसी बीच तीन जुलाई 1999 को कारगिल की पहाड़ी पर भारत की जांबाज सेना का पाकिस्तानी दुश्मनों से जबरदस्त युद्ध चला। इस भीषण युद्ध के दौरान इंस्पेक्टर डोले राम ने भारत मां की रक्षा के लिए अपनी जान की परवाह न करते हुए 17 दुश्मनों को मार गिराया और युद्ध में दुश्मनों ने भी डोले राम के सीने में कई गोलियां दागी, मगर अपने अदम्य साहस को कायम रखते हुए जब वह सियाचीन की पहाड़ी को फतेह करने के लिए आगे बढ़े, ग्लेश्यिरों के बीच दुश्मनों द्वारा बिछाई गई, माइंज पर जैसे ही उनका पैर पड़ा, तो माइंज ब्लास्ट हुई और डोले राम देश के लिए कुर्बान हो गए। जो अपने पीछे एक बूढ़ी मां, छोटा भाई और पत्नी व दो बच्चों को अलविदा कह गए। कुल्लू जिला के इस एकमात्र कारगिल शहीद की शहादत पर हजारों लोगों की आंखें नम हो गई। शहीद की पत्नी प्रेमा देवी ने बताया कि पति के खो जाने का गम हालांकि उन्हें उम्रभर सताता रहेगा, मगर उन्हें इस बात का गर्व है कि उनके बहादुर जाबांज पति ने भारत मां की रक्षा के लिए अपनी कुर्बानी दी है। चार  जुलाई 1999 को शहीद का डोले राम शव चंडीगढ़ लाया गया और पांच जुलाई को उन्हें अपने गृह क्षेत्र नित्थर लाया गया। जहां छह जुलाई 1999 को पूरे सैनिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।  शहीद डोले राम को मरणोपरांत सेना पदक से नवाजा गया, जिसे उनकी पत्नी प्रेमा देवी ने देश के महामहिम राष्ट्रपति के हाथों से प्राप्त कर स्वयं को गौरवांवित महसूस किया। कारगिल युद्ध में शहीद हुए जाबांज जवानों की याद में सेना द्वारा कारगिल में हर वर्ष 25, 26 और 27 जुलाई को वीरता दिवस मनाया जाता है, जिसमें शहीदों के परिजनों को पूरा सम्मान दिया जाता है। वहीं सरकार की ओर से भी तीन जुलाई को प्रति वर्ष शहीदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। शहीद डोला राम की यादगार में सरकार ने उनके गृह क्षेत्र नित्थर में स्थित जमा दो विद्यालय में उनका स्मारक बनाने, स्कूल को शहीद डोलेराम मेमोरियल का नाम देने और उनके गुह क्षेत्र को जोड़ती कोइल से नित्थर 15 किलोमीटर सड़क मार्ग को भी मेमोरियल का नाम देने का वायदा किया  था, जिसमें से स्कूल व सड़क का वायदा तो काफी पहले पूरा हो गया था, मगर स्मारक का वायदा 17 सालों बाद तीन जुलाई 2016 को पूरा हुआ। सरकार ने शहीद के परिवार के जीवन यापन के लिए उनके नाम से परिवार को एक पेट्रोल पंप भी आबंटित किया गया, जिसे शहीद की पत्नी प्रेमा देवी चला रही है। उनके दो पुत्रों में से बड़े बेटे अश्विनी कटोच ने बी-टेक पूर्ण कर ली है और छोटे बेटे अंकुश कटोच ने एमबीए उत्तीर्ण किया है। बहरहाल, आनी बाहय सराज को शहीद डोले राम जैसे वीर साहसी सैनिक की वीरता और शाहदत पर नाज है।

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