समाजशास्त्र में करियर बुने सफलता का ताना बाना

Jul 6th, 2016 12:25 am

cereerसमाजशास्त्र समाज में रहने वाले लोगों से जुड़ा हुआ विषय है। सीधा समाज से जुड़ा होने के कारण आज के दौर में इसका बड़ा महत्त्व है। मौजूदा दौर में इसकी तुलना एमबीए से की जाती है। इसमें रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। यह विषय न केवल साधारण बल्कि रोचक भी है। समाज की जीवन में अहम भूमिका है और इसी समाज का अध्ययन  इस विषय में किया जाता है…

मानव समाज के अध्ययन को समाजशास्त्र कहते हैं। भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार पूरी दुनिया में मनुष्य की सामाजिक संरचना बदल जाती है। हर समाज की अलग-अलग परंपराएं होती हैं। आधुनिकीकरण और बढ़ती जटिलताओं के कारण अब समाजशास्त्र के अंतर्गत चिकित्सा, सैन्य संगठन, जनसंपर्क और वैज्ञानिक ज्ञान का भी अध्ययन किया जाता है। आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक प्रणालियों में समाजशास्त्र की शुरुआत भी पश्चिमी देशों से ही हुई। समाजशास्त्र समाज में रहने वाले लोगों से जुड़ा हुआ विषय है। सीधे समाज से जुड़ा होने के कारण आज के दौर में इसका बड़ा महत्त्व है। मौजूदा दौर में इसकी तुलना एमबीए से की जाती है। इसमें रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। यह विषय न केवल साधारण बल्कि अत्यंत रोचक भी है। समाज की जीवन में अहम भूमिका है और इसी समाज का अध्ययन  इस विषय में किया जाता है।

इतिहास

ऐसा माना जाता है कि 14वीं शताब्दी के उत्तर अफ्रीकी अरब विद्वान इब्न खलदून प्रथम समाजशास्त्री थे, जिन्होंने सामाजिक एकता और सामाजिक संघर्ष के वैज्ञानिक सिद्धांतों को पहली बार उजागर किया। एक विषय के रूप में समाजशास्त्र की शुरुआत सबसे पहले 1890 में अमरीका के कंसास विश्वविद्यालय में हुई। 1891 ई. में कंसास विश्वविद्यालय में इतिहास और समाजशास्त्र विभाग की स्थापना की गई। समाजशास्त्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग 1895 में शुरू हुआ। 1905 में सारी दुनिया के पेशेवर समाजशास्त्रियों के संगठन की स्थापना हुई।

अवसरों के अंबार

समाज शास्त्र में अवसरों की कोई कमी नहीं है। शिक्षा और गैर सरकारी संगठनों के साथ काम करने के अलावा आप प्रशासनिक सेवा, मीडिया और कारपोरेट घरानों में भी अपने लिए नौकरी तलाश सकते हैं। सोशल साइंस के विभिन्न विषयों में जॉब अवसर हाल के दिनों में सबसे ज्यादा बढ़े हैं। एमए के बाद प्रशासनिक सेवा और रिसर्च इंस्टीच्यूट में प्रवेश पाने के लिए सोशल साइंस सबसे बेहतर विषय है। मीडिया में भी इस विषय के जानकारों की काफी मांग है क्योंकि वे समाज और उससे जुड़ी घटनाओं को दूसरों की तुलना में बेहतर तरीके से समझ पाते हैं और इन विषयों पर अपना पक्ष रखते हुए दर्शकों और पाठकों को उसके अनछुए पहलुओं से भी रू-ब-रू करवा पाते हैं। समाजशास्त्र के छात्र एनजीओ के साथ भी काम कर सकते हैं। साथ ही वे समाज से जुड़े अन्य विषयों जैसे पर्यावरण, लिंगभेद आदि पर भी काम कर सकते हैं। इसके अलावा अध्यापन के क्षेत्र में भी काफी अच्छे अवसर हैं।

शैक्षणिक योग्यता

समाजशास्त्र में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए कला संकाय में स्नातक होना आवश्यक है। इसके साथ सोशल साइंस, पोलिटिकल साइंस, इंटरनेशनल रिलेशन, साइकोलॉजी और ह्यूमेनिटी का व्यावहारिक ज्ञान होना अनिवार्य है। पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद इसमें पीएचडी की जा सकती है।

वेतनमान

समाजशास्त्र के क्षेत्र में वेतन इस बात पर निर्भर करता है कि आप ने सरकारी क्षेत्र में ज्वाइन किया है या निजी क्षेत्र में। आप अपने देश में ही रोजगार पर लगे हैं या फिर विदेश में किसी एनजीओ के साथ कार्यरत हैं। इस फील्ड में आरंभिक वेतन लगभग 15000 से 20000 हजार तक है। कार्य अनुभव और पद के अनुसार वेतन बढ़ता जाता है।

हिमाचल में कितना रोजगारपरक है यह विषय

हिमाचल अपने सीमित क्षेत्रफल के बावजूद बड़े उद्योगों  और निवेशकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। यहां पर कई नए प्रोजेक्ट, उद्योग और सीमेंट के कारखाने स्थापित हैं। इसलिए हिमाचल में समाजशास्त्र के जानकारों की मांग भी काफी बढ़ी है। कंपनियां अपने श्रमिकों के लिए पुनर्वास योजनाएं बनाने के लिए समाजशास्त्र विषय के विशेषज्ञों को रखती हैं। हिमाचल में वर्तमान परिप्रेक्ष्य को देखते हुए यह करियर ज्यादा रोजगारपरक है। केवल उद्योग और प्रोजेक्ट ही नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल के बढ़ते कदम भी समाजशास्त्र विषय की मांग को बढ़ा रहे हैं। स्कूलों और कालेजों में भी इस विषय के विशेषज्ञों के लिए काफी स्कोप रहता है। हिमाचल में गैर सरकारी संगठनों की भी बहार है, तो इन संगठनों में समाजशास्त्रियों की काफी मांग है। हिमाचल में इस विषय का भविष्य काफी उज्ज्वल दिखाई देता है। हिमाचली युवा इस विषय में पारंगत होकर बेहतर करियर का निर्माण कर सकते हैं।

क्यों खास है समाजशास्त्र

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। बिना समाज के मनुष्य जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इस कारण समाज का महत्त्व बढ़ा है और जरूरत बढ़ी है समाजशास्त्र की। समाज शास्त्र यह जानने के लिए जरूरी है कि जिन परिस्थितियों में हम रह रहे हैं उसकी विसंगतियों को दूर कैसे किया जाए। इसी तरह यह हमें अपने पारंपरिक मूल्यों व बाहरी दुनिया के बीच संतुलन बनाने एवं व्यक्तिगत व सार्वजनिक क्रियाओं को पूरा करने का विवेक भी देता है। एक तरह से कहा जाए तो सभी तरह की नीतियों और रणनीतियों का संबंध मानव जीवन की उन्नति से जुड़ा होता है इसलिए करियर के लिहाज से इस विषय का महत्त्व स्वतः ही बढ़ जाता है। मानव सभ्यता, संस्कृति, सोसायटी, जातीयता और सामाजिक संगठन आदि की जानकारी से हम अपने वर्तमान को अधिक बेहतर बना सकते हैं। इन सारे विषयों के बारे में बच्चों को शिक्षित कर उनका बेहतर समाजीकरण किया जा सकता है। इससे समाज में हमारी अपनी संस्कृति की तादात्मयता बनी रहती है।

विभिन्न कोर्सेज

* अप्लाइड सोशोलॉजी

* सोशोलॉजी ऑफ रिलीजन

* इकॉनोमिक सोशोलॉजी

* पोलिटिकल सोशोलॉजी

* सोशोलॉजी ऑफ किनशिप

समाजशास्त्र के उद्देश्य

* सामाजिक जीवन में आ रहे परिवर्तनों की पहचान करना।

* समाज से अंधविश्वास एवं नकारात्मक सोच को दूर करने का प्रयास करना।

* सामाजिक विशेषताओं की पहचान कर मानवता को एकसूत्र में बांधने का प्रयास करना।

विदेशों में भी अवसर

समाजशास्त्र में विशेषज्ञता हासिल करने के बाद रोजगार की संभावनाएं काफी होती हैं। ये अवसर अपने देश में भी हैं, पर विदेशों में भी समाजशास्त्र विशेषज्ञों की काफी मांग है। यूनिसेफ और रेडक्रॉस जैसी संस्थाएं समाजशास्त्र के विशेषज्ञों को काफी अच्छे पैकेज पर अवसर उपलब्ध करवाती हैं। यानी कि इसका करियर विस्तार विदेशों तक संभावनाएं पैदा करता है।

प्रमुख शिक्षण संस्थान

* हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी, शिमला (हिप्र)

* गवर्नमेंट कालेज धर्मशाला (हिप्र)

* कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र

* पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़

* दिल्ली यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली

* जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली

* बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल

* देवी अहिल्या बाई विश्वविद्यालय, इंदौर

* जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली

* टाटा इंस्टीच्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, मुंबई

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