इस खेल कैलेंडर को सुविधाएं भी चाहिए

भूपिंदर सिंह लेखक

( पेनलटी कार्नर पत्रिका के संपादक हैं )

वाटर स्पोर्ट्स जैसा कठिन व खतरनाक खेल लगातार तथा उचित प्रशिक्षकों को देखरेख में ही संभव है। इसलिए इसे जनप्रिय बनाने के लिए जहां इसके खेल प्रशिक्षकों व उपकरणों की सख्त जरूरत है, वहीं महाविद्यालयों के विद्यार्थी खिलाडि़यों के लिए समय देना भी अनिवार्य हो जाता है…

अगस्त के पहले सप्ताह में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के खेल प्रतियोगिताओं का खेल कैलेंडर खेल परिषद की बैठक में तय हो गया। इस कैलेंडर में इस वर्ष वाटर स्पोर्ट्स शूटिंग तथा योग जैसी खेलों को पहली बार शामिल किया गया है। पानी की खेलों के लिए हिमाचल प्रदेश में बिलासपुर की गोबिंद सागर झील तथा कांगड़ा में पौंग डैम दो प्ले फील्ड उपलब्ध हैं। पौंग डैम में गुरु नानक विश्वविद्यालय अमृतसर पिछले कई वर्षों से अपनी अंतर महाविद्यालय खेलों का आयोजन करवाता आ रहा है। हिमाचल प्रदेश राज्य साहसिक खेल विभाग का वाटर स्पोर्ट्स विंग, जो पौंग डैम में है, हर वर्ष प्रदेश के महाविद्यालय के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के लिए अपने यहां कभी-कभी बुलाता भी है। हिमाचल प्रदेश में इस समय प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के अंतर्गत सौ से भी अधिक सरकारी व गैर सरकारी महाविद्यालय संबद्धता प्राप्त किए हुए हैं। वाटर स्पोर्ट्स के लिए इस समय उपकरण केवल बिलासपुर तथा पौंग डैम में ही उपलब्ध हैं। इसलिए अगर लगातार प्रशिक्षण प्राप्त करना हो तो केवल वही महाविद्यालय इन सुविधाओं का उपयोग कर सकते हैं, जो बिलासपुर तथा पौंग डैम के बिलकुल नजदीक हैं। प्रशिक्षण शिविर लगाने के लिए प्रतियोगिता से पहले केवल दस दिन का प्रावधान है और वाटर स्पोर्ट्स जैसा कठिन व खतरनाक खेल लगातार तथा उचित प्रशिक्षकों को देखरेख में ही संभव है। इसलिए इस खेल को जनप्रिय बनाने के लिए जहां इसके खेल प्रशिक्षकों व उपकरणों की सख्त जरूरत है, वहीं महाविद्यालयों के विद्यार्थी खिलाडि़यों के लिए समय देना भी अनिवार्य हो जाता है। रूसा शुरू हो जाने से स्नातक स्तर के विद्यार्थी खिलाडि़यों के लिए खेलों में अभ्यास के लिए समय देना भी मुश्किल हो जाता है। रूसा के तहत स्नातक स्तर का विद्यार्थी अपनी कक्षा के पाठ्यक्रम में क्रैडेट प्राप्ति के लिए अधिक हाजिरी चाहता है, वहां लंबे समय तक प्रशिक्षण मांगने वाले इस खेल के लिए कैसे समय निकलेगा? प्राध्यापक शारीरिक शिक्षा तथा प्राचार्य महोदय को सोच-समझ कर इसका जल्द ही हल निकालना होगा। अधिक महाविद्यालय वाटर स्पोर्ट्स में भाग लें, इसके लिए महाविद्यालयों को वाटर स्पोर्ट्स विभाग के संपर्क में रहना होगा कि कब-कब वे अपने यहां इन खेलों को सिखाने के लिए कैंप आयोजित करते हैं।

शूटिंग में हिमाचल का नाम ओलंपिक पदक तालिका तक विजय कुमार ने चमका दिया है और समरेश जंग, सोनिया राणा सहित कई अंतरराष्ट्रीय शूटर हिमाचल की संतानें हैं, मगर उनके साथ हिमाचल का नाम नहीं है। उनकी तैयारी व उनके प्रश्रयदाता केंद्र है या और राज्य। हिमाचल में शूटिंग को प्रदेश विश्वविद्यालय कैलेंडर में डालना बहुत अच्छा प्रयास है, मगर शूटिंग के लिए उपयोग में आने वाले महंगे वैपन तथा असलह के बारे में क्या महाविद्यालय स्वयं व्यवस्था कर पाएंगे? प्रतियोगिता आयोजित करवाने के लिए राज्य में अभी तक एक भी शूटिंग रेंज नहीं है। ऐसे में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शूटिंग प्रतियोगिता के आयोजन में कठिनाई भी आएगी। इसलिए हिमाचल सरकार के वाटर स्पोर्ट्स तथा खेल विभाग को इन दोनों खेलों को महाविद्यालय स्तर पर आयोजित करवाने के लिए सहायता करनी होगी। हिमाचल  प्रदेश विश्वविद्यालय योग, पावर लिफ्टिंग तथा महिला कुश्ती में भी इस बार अंतरमहाविद्यालय प्रतियोगिता आयोजित करवाएगा। इन खेलों के लिए जो आधारभूत ढांचा व उपकरण चाहिए होते हैं, वे लगभग सभी महाविद्यालयों में उपलब्ध हैं। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय को नेटबाल, कोर्फबाल, सॉफ्टबाल आदि खेलों में भी अंतर महाविद्यालय खेल प्रतियोगिताएं शुरू करवा देनी चाहिएं, ताकि प्रतिभा व सुविधा के अनुसार विद्यार्थी खिलाडि़यों को प्रतियोगिता के लिए अधिक से अधिक खेल मिल सके। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय को अगर खेलों में अंतर विश्वविद्यालय स्तर पर अच्छा करना है, तो पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला की तरह महाविद्यालयों के साथ मिलकर खेल विंग अधिक से अधिक महाविद्यालयों में खोलने चाहिएं और वहां पर प्रशिक्षकों का प्रबंध करना चाहिए। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने नए खेल कैलेंडर के मार्फत खेलों को सुधार के इरादे तो जाहिर कर दिए हैं, लेकिन इसके सफल क्रियान्वयन के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना शेष है। बेशक इन खेलों के आयोजन की राह में कई अवरोध हैं, लेकिन इन्हें हटाना भी असंभव नहीं है। उम्मीद है कि विश्वविद्यालय इन चुनौतियों से निपटने के लिए वैकल्पिक मार्ग भी खोज लेगा।

ई-मेलः penaltycorner007@rediffmail.com

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